समंदर के सिकंदर बनेंगे भारतीय युद्धपोत: अब चीन-पाकिस्तान की उड़ेगी नींद, भारत-जापान की Unicorn डील से गायब होंगे हमारे वॉरशिप

भारत और जापान के बीच ऐतिहासिक रक्षा समझौता हुआ है। दोनों देश मिलकर नौसेना के लिए 'यूनिकॉर्न' एंटीना सिस्टम बनाएंगे, जिससे भारतीय युद्धपोत दुश्मन के रडार पर अदृश्य हो जाएंगे। जानें मेक इन इंडिया की इस बड़ी कामयाबी के बारे में।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 3 July 2026, 9:06 AM IST
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New Delhi: भारत और जापान ने रक्षा क्षेत्र में एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए पहली बार मिलकर एक बेहद आधुनिक मिलिट्री इक्विपमेंट बनाने का फैसला किया है। दोनों देश अब भारतीय नौसेना के युद्धपोतों के लिए 'यूनिकॉर्न' (NORA-50 इंटिग्रेशन मास्ट) नाम का अत्याधुनिक रेडियो एंटीना सिस्टम तैयार करेंगे।

नई दिल्ली में जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची के साथ एक संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते की घोषणा की। पीएम मोदी ने इस प्रोजेक्ट को दोनों देशों के रणनीतिक और रक्षा संबंधों में एक नया स्वर्णिम अध्याय बताया है।

क्या है 'यूनिकॉर्न' तकनीक और यह कैसे काम करती है?

'यूनिकॉर्न' दरअसल एक एडवांस नौसैनिक रेडियो एंटीना सिस्टम है जो युद्धपोतों को छुपाने यानी 'स्टेल्थ' क्षमता देने का काम करता है। पारंपरिक युद्धपोतों पर कई तरह के एंटीना अलग-अलग जगहों पर लगे होते हैं, जिससे दुश्मन के रडार उन्हें आसानी से पकड़ लेते हैं।

लेकिन 'यूनिकॉर्न' सिस्टम में इन सभी एंटीना को एक ही खास रडार डोम (रेडोम) के भीतर समेट दिया जाता है। इससे युद्धपोत का रडार सिग्नेचर बेहद कम हो जाता है, जिससे वह समंदर के बीच दुश्मन के रडार की नजरों से लगभग ओझल हो जाता है।

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मल्टी-टास्किंग फीचर्स से लैस होगा यह सिस्टम

इस सिंगल रडार डोम के अंदर कई अत्याधुनिक मिलिट्री तकनीकें एक साथ काम करेंगी। इसमें टैक्टिकल डेटा लिंक, टैक्टिकल एयर नेविगेशन सिस्टम (TACAN), एडवांस संचार प्रणाली, आइडेंटिफिकेशन फ्रेंड ऑर फो (IFF) और इलेक्ट्रॉनिक सपोर्ट मेजर्स (ESM) जैसे बेहद संवेदनशील उपकरण शामिल होंगे। इन सभी टूल्स के एक जगह कंबाइन होने से न सिर्फ जहाज की स्टेल्थ क्षमता बढ़ेगी, बल्कि उसकी सुरक्षा भी पहले से कई गुना मजबूत हो जाएगी।

जापान की महारत और 'मेक इन इंडिया' की ताकत

इस बेजोड़ तकनीक को जापान की दिग्गज कंपनियों एनईसी कॉर्पोरेशन, सांपा कोग्यो और द योकोहामा रबर कंपनी ने मिलकर तैयार किया है। जापान अपनी नौसेना के 'मोगामी क्लास' स्टेल्थ फ्रिगेट्स में इसका सफल इस्तेमाल कर रहा है।

अब 'मेक इन इंडिया' अभियान के तहत भारत में इसका सह-उत्पादन भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) द्वारा किया जाएगा। जापान अपनी डिजाइन और तकनीकी विशेषज्ञता साझा करेगा, जबकि भारत इसका निर्माण और जहाजों पर एकीकरण (Integration) करेगा।

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चीन और पाकिस्तान के लिए क्यों बढ़ा खतरा?

रणनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, यह डील हिंद महासागर और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन और पाकिस्तान की आक्रामक हरकतों पर लगाम लगाएगी। चीनी नौसेना अक्सर रडार सिग्नेचर के जरिए दूसरे देशों के जहाजों को ट्रैक करती है, लेकिन 'यूनिकॉर्न' लगने के बाद भारतीय वॉरशिप्स को ट्रैक करना नामुमकिन जैसा हो जाएगा। इस समझौते के साथ ही भारत, जापान की इतनी संवेदनशील मिलिट्री तकनीक हासिल करने वाला एशिया का दूसरा देश बन गया है, जो इस बात का सबूत है कि वैश्विक मंच पर भारत का कद कितना मजबूत हो चुका है।

Location :  New Delhi

Published :  3 July 2026, 9:06 AM IST

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