America Debt Crisis: टैरिफ नीति ने बढ़ाई ट्रंप की मुश्किलें, 40 ट्रिलियन डॉलर के कर्ज तले दबा अमेरिका

दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका पहली बार 40 ट्रिलियन डॉलर से अधिक के राष्ट्रीय कर्ज के बोझ तले पहुंच गई है। रक्षा खर्च, सामाजिक योजनाओं, बढ़ते ब्याज और बजट घाटे के कारण देश की आर्थिक चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं।

Post Published By: Komal Chauhan
Updated : 20 August 2026, 10:22 AM IST
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New Delhi: अमेरिका का राष्ट्रीय कर्ज पहली बार 40 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को पार कर गया है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश का कुल राष्ट्रीय कर्ज बढ़कर 40.047 ट्रिलियन डॉलर हो गया है। यह रिकॉर्ड स्तर ऐसे समय पर सामने आया है, जब अमेरिका लगातार बढ़ते बजट घाटे और सरकारी खर्च से जूझ रहा है। आर्थिक जानकारों का कहना है कि दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के लिए यह केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि भविष्य की आर्थिक चुनौतियों का संकेत भी है।

ट्रंप और बाइडेन दोनों के कार्यकाल में तेजी से बढ़ा कर्ज

अगर वर्ष 2017 से तुलना की जाए, जब डोनाल्ड ट्रंप पहली बार राष्ट्रपति बने थे, तब से अब तक अमेरिका का राष्ट्रीय कर्ज दोगुने से भी अधिक हो चुका है। जो बाइडेन के कार्यकाल में भी कर्ज बढ़ने की रफ्तार जारी रही और अब ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के दौरान यह 40 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंच गया।

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका का कर्ज अब लगभग हर पांच महीने में 1 ट्रिलियन डॉलर बढ़ रहा है। अक्टूबर में यह 38 ट्रिलियन डॉलर था, मार्च में 39 ट्रिलियन डॉलर पहुंचा और अगस्त में 40 ट्रिलियन डॉलर का आंकड़ा पार कर गया।

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आखिर क्यों बढ़ रहा है अमेरिका का कर्ज?

विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका के बढ़ते कर्ज के पीछे कई बड़े कारण हैं। रक्षा बजट पर भारी खर्च, सोशल सिक्योरिटी और मेडिकेयर जैसी योजनाओं पर लगातार बढ़ता व्यय, पुराने कर्ज पर बढ़ता ब्याज और लगातार बना बजट घाटा इसकी प्रमुख वजहें हैं। सरकार को अपने खर्च पूरे करने के लिए लगातार उधार लेना पड़ रहा है। यही कारण है कि राष्ट्रीय कर्ज हर साल नए रिकॉर्ड बना रहा है।

कर्ज की पूरी तस्वीर समझिए

अमेरिकी वित्त विभाग के अनुसार कुल 40.047 ट्रिलियन डॉलर के कर्ज में से करीब 32.266 ट्रिलियन डॉलर जनता, निवेशकों और वित्तीय संस्थानों के पास सरकारी बॉन्ड और सिक्योरिटीज के रूप में है। वहीं करीब 7.782 ट्रिलियन डॉलर विभिन्न सरकारी विभागों और एजेंसियों के बीच का आंतरिक कर्ज है। इससे साफ है कि सरकार अपने खर्चों को पूरा करने के लिए लंबे समय से उधारी पर निर्भर है।

क्या टैरिफ नीति भी बनी आर्थिक दबाव की वजह

विश्लेषकों का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक टैरिफ नीति ने वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता बढ़ाई। हालांकि टैरिफ का उद्देश्य घरेलू उद्योगों को मजबूत करना था, लेकिन इससे आयात महंगा हुआ, व्यापारिक तनाव बढ़ा और कई क्षेत्रों में आर्थिक दबाव भी देखने को मिला। दूसरी ओर सरकारी खर्च लगातार बढ़ता गया, जिससे कर्ज पर नियंत्रण नहीं हो सका।

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आम लोगों पर भी पड़ सकता है असर

आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ते राष्ट्रीय कर्ज का असर केवल सरकारी आंकड़ों तक सीमित नहीं रहेगा। यदि कर्ज और ब्याज भुगतान बढ़ता रहा तो भविष्य में टैक्स व्यवस्था, सरकारी योजनाओं और आर्थिक विकास पर इसका असर पड़ सकता है। साथ ही वैश्विक निवेशकों का भरोसा भी प्रभावित हो सकता है।

सरकार का क्या कहना है?

अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि सरकारी खर्च में फिजूलखर्ची, धोखाधड़ी और अनावश्यक व्यय को कम करने की दिशा में काम किया जा रहा है। साथ ही आर्थिक विकास की गति बढ़ाकर कर्ज और GDP के अनुपात को नियंत्रित करने की योजना बनाई जा रही है।

40 ट्रिलियन डॉलर का राष्ट्रीय कर्ज अमेरिका के सामने खड़ी सबसे बड़ी आर्थिक चुनौतियों में से एक बन चुका है। रक्षा, सामाजिक योजनाओं और बढ़ते ब्याज भुगतान के बीच सरकार पर वित्तीय दबाव लगातार बढ़ रहा है। आने वाले वर्षों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिका आर्थिक विकास और बढ़ते कर्ज के बीच संतुलन कैसे बनाता है।

Location :  New Delhi

Published :  20 August 2026, 10:14 AM IST

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