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यूपी पुलिस में सुसाइड केस बढ़ने से मचा हड़कंप (Source: Pinterest)
New Delhi/Luckow: कई तरह के कीर्तिमानों और कार्यों के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस अक्सर सुर्खियों में बनी रहती है। देश के सबसे बड़े जनसंख्या वाले राज्य उत्तर प्रदेश की पुलिस फोर्स में लगभग 4 लाख कर्मचारी हैं। इस संख्या बल के हिसाब से यूपी पुलिस एक कमान के रूप में दुनिया का सबसे बड़ा एकल पुलिस बल भी है। लेकिन हाल के दिनों में यूपी पुलिस अलग कारणों से चर्चा में है, जिस कारण इस सबसे बड़े पुलिस बल में एक तरह से हड़कंप मचा हुआ है। कारण है, यूपी पुलिस के कर्मचारियों से जुड़ी सुसाइड की घटनाओं का लगातार सामने आना। हाल के दिनों में यूपी पुलिस के सिपाही से लेकर दरोगा तक ने अलग-अलग और अज्ञात कारणों से खुद की जान दे दी।
यूपी पुलिस में लगातार बढ़ रही सुसाइड की इन घटनाओं ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिये हैं। इन घटनाओं से कई तरह के सवाल खड़े कर दिये हैं। यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या ड्यूटी का स्ट्रेस या सिस्टम की खामियों के कारण ये घटनाएं हो रही हैं। चलिए जानते हैं इस रिपोर्ट में 2026 की ऐसी ही घटनाओं के बारे में
बस्ती की घटना अकेली नहीं है। इस साल उत्तर प्रदेश में पुलिसकर्मियों की आत्महत्या के कई मामले सामने आए हैं। हर मामले में परिस्थितियां अलग बताई गई हैं, लेकिन घटनाओं की लगातार सामने आती तस्वीर पुलिस विभाग में मानसिक दबाव और व्यक्तिगत परेशानियों पर सवाल जरूर खड़े करती है।
अगस्त में लखनऊ के गोमतीनगर थाने में तैनात 26 वर्षीय सिपाही आकाश यादव ने बैरक में आत्महत्या कर ली। उनके पिता ने एक महिला सिपाही पर मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया। पिता की शिकायत पर महिला सिपाही के खिलाफ FIR दर्ज की गई और मामले की जांच शुरू हुई। हालांकि आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
जुलाई में बुलंदशहर के औरंगाबाद थाने में तैनात 25 वर्षीय सिपाही सुधीर ठाकुर ने ड्यूटी के दौरान अपनी सर्विस राइफल से खुद को गोली मार ली। घटना के बाद एक ऑडियो सामने आया, जिसमें उन्होंने नौकरी और जीवन से परेशान होने की बात कही थी और कुछ पुलिसकर्मियों पर प्रताड़ना के आरोप लगाए थे। मामले में वरिष्ठ अधिकारियों ने जांच के आदेश दिए।
जुलाई में गाजियाबाद के नंदग्राम थाने में तैनात कांस्टेबल पवन राठी ने किराए के आवास में आत्महत्या कर ली। रिपोर्टों में पत्नी के साथ पारिवारिक विवाद और निजी तनाव की बात सामने आई। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
मई में पुलिस मुख्यालय में तैनात 34 वर्षीय ASI सत्येंद्र वर्मा ने आत्महत्या कर ली थी। उनका शव लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी क्षेत्र स्थित किराए के कमरे में मिला था। परिजनों ने उनकी मंगेतर को लेकर आरोप लगाए थे। इस मामले में भी मौत की परिस्थितियों की जांच की गई।
अगस्त की शुरुआत में बाराबंकी स्थित 10वीं वाहिनी PAC परिसर में 28 वर्षीय कांस्टेबल का शव बैरक में मिला। रिपोर्टों के अनुसार पुलिस जांच में ऑनलाइन गेमिंग और कर्ज से जुड़े पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही थी। यानी हर मामले में कारण एक जैसा नहीं था और कई मामलों में निजी परिस्थितियां भी सामने आईं।
इन घटनाओं को एक साथ देखने पर सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पुलिसकर्मियों पर लगातार बढ़ता काम का दबाव उनकी मानसिक स्थिति को प्रभावित कर रहा है? या फिर पारिवारिक विवाद, आर्थिक परेशानी, व्यक्तिगत रिश्ते और विभागीय तनाव जैसी अलग-अलग परिस्थितियां इन घटनाओं के पीछे भूमिका निभा रही हैं?
फिलहाल उपलब्ध मामलों में किसी एक कारण को सभी घटनाओं की वजह बताना सही नहीं होगा। बस्ती के सूर्य प्रकाश सिंह की मौत में भी पुलिस ने अभी कारण स्पष्ट नहीं किया है। मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला और जांच जारी है।
लेकिन एक बात जरूर सामने आती है कानून-व्यवस्था संभालने वाले पुलिसकर्मियों की अपनी मानसिक और भावनात्मक स्थिति पर भी उतना ही ध्यान देने की जरूरत है। लंबी ड्यूटी, लगातार तनाव, पारिवारिक जीवन से दूरी और विभागीय दबाव जैसी परिस्थितियों पर समय रहते ध्यान दिया जाए तो कई गंभीर स्थितियों को संभालने की संभावना बढ़ सकती है।
बस्ती की ताजा घटना ने एक बार फिर यह सवाल सामने ला दिया है कि आखिर खाकी पहनकर लोगों की सुरक्षा करने वाले पुलिसकर्मियों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य के लिए व्यवस्था कितनी मजबूत है। 2026 में सामने आए अलग-अलग मामलों की परिस्थितियां भले ही अलग हों, लेकिन इन घटनाओं ने पुलिस महकमे के भीतर तनाव और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चर्चा की जरूरत जरूर पैदा कर दी है।
Location : Lucknow
Published : 30 August 2026, 4:20 PM IST
Topics : basti news Police news UP Police Uttar Pradesh News