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प्रतीकात्मक छवि (Source: Pinterest)
Lucknow: उत्तर प्रदेश में मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए वन विभाग एक नई पहल की तैयारी कर रहा है। इसके तहत पहली बार तेंदुओं (गुलदारों) का बधियाकरण किया जाएगा। पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत बिजनौर से प्रस्तावित है। वन विभाग ने इसके लिए 601 करोड़ रुपये का मास्टर प्लान तैयार किया है। योजना को लागू करने के लिए केंद्र सरकार से अनुमति लेने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
वन विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, बिजनौर में करीब 444 तेंदुए हैं। अनुमान है कि बधियाकरण नहीं होने पर अगले पांच वर्षों में इनकी संख्या बढ़कर 1,336 तक पहुंच सकती है। प्रस्ताव के अनुसार, बधियाकरण के जरिए इसे करीब 755 तक सीमित रखने का लक्ष्य है। बिजनौर के गन्ने के खेत तेंदुओं के लिए छिपने और रहने का अनुकूल ठिकाना बन रहे हैं। इसी वजह से जिले को पायलट प्रोजेक्ट के लिए चुना गया है।
प्रस्तावित योजना के तहत पांच वर्षों में तेंदुओं की करीब 75 फीसदी आबादी का बधियाकरण करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए हर साल लगभग 15 फीसदी तेंदुओं को अभियान में शामिल करने की योजना है। हालांकि, यह कार्यक्रम अभी प्रस्ताव और अनुमति की प्रक्रिया में है। पायलट प्रोजेक्ट के नतीजों के आधार पर आगे की रणनीति तय की जा सकती है।
मास्टर प्लान में केवल बधियाकरण ही नहीं, बल्कि तेंदुओं की आवाजाही पर निगरानी और जंगल की सीमाओं को सुरक्षित बनाने के उपाय भी शामिल हैं। इसके तहत करीब 310 किलोमीटर लंबी चेन-लिंक फेंसिंग प्रस्तावित है। नदियों और रास्तों के आसपास थर्मल नाइट विजन कैमरे लगाए जाने की योजना है। इन कैमरों से मिलने वाली जानकारी कमांड सेंटर तक पहुंचेगी, जहां से निगरानी की जाएगी।
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योजना के तहत बिजनौर में 2.73 करोड़ रुपये की लागत से वन्यजीव पशु चिकित्सा इकाई स्थापित करने का प्रस्ताव है। इसमें ऑपरेशन थिएटर, विशेष सर्जिकल उपकरण, एनेस्थीसिया मशीन और ऑपरेशन से पहले व बाद में देखभाल के लिए वार्ड बनाया जाएगा। विशेषज्ञ चिकित्सकों और प्रशिक्षित कर्मचारियों की मदद से तेंदुओं का उपचार किया जाएगा।
वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, रुहेलखंड क्षेत्र में 900 से अधिक तेंदुए हैं। बिजनौर के अलावा मुरादाबाद, बरेली, पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, बहराइच और श्रावस्ती समेत कई जिलों में उनकी मौजूदगी दर्ज की गई है। योजना का उद्देश्य मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते टकराव को कम करना है।
प्रस्ताव के मुताबिक, संवेदनशील क्षेत्रों में कैमरा ट्रैप के जरिए तेंदुओं की पहचान की जाएगी। इसके बाद विशेष पिंजरों से उन्हें पकड़कर चिकित्सकीय जांच और बधियाकरण किया जाएगा। ऑपरेशन के बाद निगरानी में रखने और स्वस्थ होने पर आरक्षित वन क्षेत्र में छोड़ने की व्यवस्था प्रस्तावित है।
Location : Lucknow
Published : 24 September 2026, 12:43 PM IST