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मैनपुरी पुलिस ने फर्जी जीएसटी कंपनियों के जरिए टैक्स चोरी करने वाले गिरोह का खुलासा किया है। दिल्ली से दो आरोपियों को गिरफ्तार कर अहम डिजिटल सबूत बरामद किए गए हैं। पुलिस के मुताबिक गिरोह 150 से अधिक फर्जी जीएसटी फर्मों का इस्तेमाल कर चुका है।
फर्जी बिलिंग से करोड़ों की टैक्स चोरी
Mainpuri: उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। मैनपुरी पुलिस ने फर्जी जीएसटी कंपनियां रजिस्टर कर उनके जरिए फर्जी बिलिंग और ई-वे बिल बनाकर करोड़ों रुपये की राजस्व हानि करने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस मामले में पुलिस ने दो शातिर अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है, जिनके नेटवर्क की पहुंच कई राज्यों तक बताई जा रही है।
उत्तर प्रदेश शासन द्वारा साइबर अपराध और आर्थिक धोखाधड़ी के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में थाना कोतवाली मैनपुरी पुलिस और साइबर क्राइम सेल ने संयुक्त रूप से फर्जी जीएसटी फर्मों से जुड़े मामलों की जांच शुरू की थी। जांच के दौरान कई संदिग्ध लेन-देन और फर्जी कंपनियों के इनपुट सामने आए, जिसके बाद पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण के आधार पर इस गिरोह तक पहुंच बनाई।
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी गरीब और भोले-भाले लोगों को अपने जाल में फंसाते थे। उनसे लालच देकर या बहला-फुसलाकर उनके आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक और अन्य जरूरी दस्तावेज हासिल किए जाते थे। इन दस्तावेजों का इस्तेमाल कर उनके नाम पर फर्जी जीएसटी फर्में रजिस्टर कराई जाती थीं। कई मामलों में दस्तावेज देने वाले लोगों को यह तक नहीं पता होता था कि उनके नाम पर कोई कंपनी खोली जा रही है।
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इन फर्जी जीएसटी कंपनियों के जरिए आरोपी बड़े पैमाने पर फर्जी बिल और ई-वे बिल जारी करते थे। इसका इस्तेमाल इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) की हेराफेरी और टैक्स चोरी के लिए किया जाता था। पुलिस के अनुसार, इस तरीके से सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान पहुंचाया गया। यह पूरा नेटवर्क बेहद योजनाबद्ध तरीके से काम करता था, ताकि शुरुआती जांच में कोई शक न हो।
तकनीकी साक्ष्यों, मोबाइल लोकेशन और डिजिटल ट्रांजैक्शन के आधार पर पुलिस ने 9 जनवरी 2026 को दिल्ली के स्वरूप नगर इलाके से दो आरोपियों चंदन मिश्रा और संजीत को गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने उनके पास से चार मोबाइल फोन, एक लैपटॉप और 12 फर्जी जीएसटी फर्मों से संबंधित अहम दस्तावेज बरामद किए हैं। इन उपकरणों में बड़ी मात्रा में डिजिटल डाटा और लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड मिले हैं।
पूछताछ के दौरान आरोपियों ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि वे अब तक करीब 150 फर्जी जीएसटी फर्मों का इस्तेमाल कर चुके हैं। इन फर्मों के जरिए अलग-अलग राज्यों में फर्जी बिलिंग की जाती थी। पुलिस का मानना है कि यह आंकड़ा और भी बढ़ सकता है, क्योंकि जांच अभी शुरुआती चरण में है।
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मैनपुरी पुलिस के अनुसार, इस गिरोह का नेटवर्क केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है। आरोपियों के संपर्क दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और अन्य राज्यों में भी बताए जा रहे हैं। पुलिस अब दूसरे राज्यों की पुलिस और संबंधित एजेंसियों से संपर्क कर रही है, ताकि पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके और इस आर्थिक अपराध में शामिल सभी लोगों को कानून के शिकंजे में लाया जा सके।
पुलिस अब आरोपियों से बरामद मोबाइल फोन और लैपटॉप की फॉरेंसिक जांच करवा रही है। माना जा रहा है कि इनमें कई अन्य फर्जी कंपनियों, बैंक खातों और लेन-देन से जुड़े सबूत मिल सकते हैं। जांच पूरी होने के बाद इस घोटाले की कुल राशि और नुकसान का सही आंकड़ा सामने आ सकेगा।