पैसा भी हमारा, मीटर भी हमारा… फिर हम ही चोर कैसे? विद्युत विभाग के वसूली तंत्र के खिलाफ सेमरी में छिड़ी खुली बगावत

मीटर लगवाने के लिए रुपये देने और आवेदन ऑनलाइन होने का दावा करने वाले ग्रामीणों पर आखिर बिजली चोरी की कार्रवाई क्यों हो गई? विभाग और ग्रामीणों के दावों के बीच असली गलती किसकी है?

Post Published By: Pratibha Yadav
Updated : 26 August 2026, 6:11 PM IST
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Jhansi: उत्तर प्रदेश के झांसी जिले के मोठ तहसील क्षेत्र के ग्राम सेमरी से विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। दर्जनों ग्रामीण शिकायत लेकर मोठ एसडीएम कार्यालय पहुंचे और विभाग के कुछ कर्मचारियों पर मीटर लगवाने के नाम पर रुपये लेने का आरोप लगाया। ग्रामीणों का दावा है कि उनसे 500 से 2,000 रुपये तक लिए गए और आवेदन ऑनलाइन होने के साथ ओटीपी आने की जानकारी देकर जल्द मीटर लगाने का भरोसा दिया गया था। हालांकि, मीटर लगने से पहले ही बिजली विभाग की चेकिंग टीम गांव पहुंच गई और बिजली चोरी की कार्रवाई करते हुए नोटिस जारी कर दिए गए।

मीटर लगाने के नाम पर रुपये लेने का आरोप

ग्राम सेमरी के मनमोहन, अरुण, जगमोहन समेत कई ग्रामीण मोठ तहसील पहुंचे। ग्रामीणों ने एसडीएम को शिकायती पत्र देकर विद्युत विभाग के कुछ कर्मचारियों पर आरोप लगाए। उनका कहना है कि गांव में शिविर लगाकर मीटर कनेक्शन के नाम पर उनसे 500 से 2,000 रुपये तक लिए गए थे।

ग्रामीणों के मुताबिक, उन्हें बताया गया था कि उनके फार्म ऑनलाइन हो चुके हैं और मोबाइल पर ओटीपी भी आ गया है। मीटर उपलब्ध होते ही उनके घरों पर कनेक्शन लगाने का आश्वासन दिया गया था।

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मीटर लगने से पहले पहुंची चेकिंग टीम

ग्रामीणों का आरोप है कि वे मीटर लगने का इंतजार ही कर रहे थे कि 8 जून को विद्युत विभाग की चेकिंग टीम गांव पहुंच गई। इसके बाद कुछ ग्रामीणों के खिलाफ बिजली चोरी की कार्रवाई की गई और उन्हें नोटिस थमा दिए गए।

ग्रामीणों का कहना है कि जब उन्होंने विभागीय प्रक्रिया के तहत मीटर के लिए आवेदन किया था और उन्हें कनेक्शन दिए जाने का भरोसा मिला था, तो मीटर लगने से पहले ही बिजली चोरी की कार्रवाई क्यों की गई।

ग्रामीणों ने उठाए कई सवाल

इस मामले को लेकर ग्रामीणों ने विद्युत विभाग से कई सवाल पूछे हैं। उनका कहना है कि यदि आवेदन विभागीय स्तर पर ऑनलाइन हो चुके थे तो मीटर लगाने में देरी की जिम्मेदारी किसकी थी? वहीं, अगर मीटर लगाने के नाम पर रुपये लिए गए थे तो उन पैसों का हिसाब-किताब कहां है? ग्रामीणों ने पूरे मामले की जांच कराने और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

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विभाग ने क्या कहा?

वहीं, विद्युत उपखंड अधिकारी सौरभ राय ने ग्रामीणों के आरोपों पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि ग्रामीणों के फार्म ऑनलाइन कराए गए थे, लेकिन मीटर लगवाने के लिए आवश्यक धनराशि जमा नहीं की गई थी। इसी वजह से विभाग की ओर से कार्रवाई की गई।

जांच के बाद साफ होगी तस्वीर

अब इस मामले में ग्रामीणों के आरोप और विद्युत विभाग के जवाब अलग-अलग हैं। ग्रामीण जहां मीटर के नाम पर रुपये लिए जाने का आरोप लगा रहे हैं, वहीं विभाग का कहना है कि आवश्यक धनराशि जमा नहीं होने के कारण मीटर नहीं लगाए जा सके।

फिलहाल ग्रामीणों ने एसडीएम से मामले की जांच की मांग की है। एसडीएम ने जांच कर उचित कार्रवाई और जल्द निस्तारण का भरोसा दिया है। अब जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि ग्रामीणों के आरोपों में कितनी सच्चाई है और बिजली चोरी की कार्रवाई के पीछे वास्तविक वजह क्या थी।

Location :  Jhansi

Published :  26 August 2026, 6:11 PM IST

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