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बनारस का युवक कैसे बना मुंबई अंडरवर्ल्ड का ‘बाबा’ (IMG: Dynamite News)
New Delhi: मुंबई की गलियों में 1990 का दशक सिर्फ गैंगवार का दौर नहीं था, बल्कि वह समय था जब अपराध की दुनिया में एक-दूसरे को चुनौती देने वाले गैंग खुलेआम भिड़ते थे। इस दौर की कई चर्चित आपराधिक घटनाओं में एक नाम बार-बार सामने आया-सुभाष सिंह ठाकुर। बनारस से मुंबई पहुंचे इस शख्स का नाम धीरे-धीरे अंडरवर्ल्ड की दुनिया में चर्चित हुआ। जेजे हॉस्पिटल शूटआउट से लेकर गैंगवार और हत्या के मामलों तक उसका नाम जुड़ता रहा।
सुभाष सिंह ठाकुर का जन्म 1973 में वाराणसी के फूलपुर गांव में एक भूमिहार परिवार में हुआ बताया जाता है। कम उम्र में ही वह मुंबई चला गया। उसके मुंबई पहुंचने के पीछे की कहानी भी अपराध की दुनिया से जुड़ने वाली बताई जाती है। रिपोर्टों के मुताबिक, मुंबई के विरार इलाके में उसके एक दोस्त से कथित तौर पर हफ्ता वसूली को लेकर कुछ स्थानीय मराठी अपराधियों का विवाद हुआ। सुभाष ठाकुर ने इस विवाद में अपने दोस्त का साथ दिया और दोनों पक्षों में मारपीट हुई। घटना के बाद सुभाष को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।
समय के साथ सुभाष सिंह ठाकुर की पहचान सिर्फ उसके नाम से नहीं, बल्कि ‘बाबा’ के तौर पर भी होने लगी। बाद के वर्षों में उसकी तस्वीरों में लंबी दाढ़ी और सिर पर सफेद कपड़ा या बंदाना दिखाई देता रहा। इसी लुक की वजह से अंडरवर्ल्ड की पुरानी कहानियों में उसका नाम ‘बाबा’ के रूप में सामने आता है। बनारस से निकला यह शख्स मुंबई की अपराध की दुनिया में अपनी पहचान बना चुका था।
सुभाष सिंह ठाकुर का नाम दाऊद इब्राहिम से जुड़े मुंबई अंडरवर्ल्ड के इतिहास में भी आता है। कुछ रिपोर्टों और पुराने विवरणों में उसे दाऊद के करीबी लोगों में बताया गया है। इसी वजह से उसे कई जगह दाऊद का ‘गुरु’ तक कहा गया। हालांकि, यह उपाधि मुख्य रूप से मीडिया और अपराध जगत से जुड़े वर्णनों में इस्तेमाल हुई है। इसे किसी आधिकारिक पद या स्थापित संगठनात्मक भूमिका के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
सुभाष ठाकुर पहली बार मुंबई के अपराध जगत में बड़े स्तर पर तब चर्चा में आया, जब उस पर 1989 में गैंगस्टर अरुण गवली के करीबी साथी पॉल न्यूमैन की हत्या में भूमिका का आरोप लगा। इस घटना के बाद उसका नाम मुंबई के गैंगवॉर से जोड़कर देखा जाने लगा। उस दौर में मुंबई में कई छोटे-बड़े गैंग अलग-अलग इलाकों में अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहे थे। हफ्ता वसूली, जमीन, कारोबार और आपसी वर्चस्व को लेकर गैंगों के बीच संघर्ष आम था।
सुभाष ठाकुर के अपराध रिकॉर्ड में सबसे चर्चित मामलों में 1992 का जेजे हॉस्पिटल शूटआउट शामिल है। सितंबर 1992 में मुंबई के सर जेजे हॉस्पिटल में भर्ती एक आरोपी को निशाना बनाने के लिए हथियारबंद लोगों के अस्पताल में घुसने की घटना ने पूरे देश को हिला दिया था। अस्पताल जैसे सुरक्षित माने जाने वाले स्थान पर हुई इस वारदात ने मुंबई के अंडरवर्ल्ड और पुलिस व्यवस्था दोनों पर गंभीर सवाल खड़े किए थे।
ठाकुर के दर्ज बयान के मुताबिक, उसे सुनील सावंत ने मुंबई बुलाया था। वह जुहू के एक फ्लैट में ठहरा हुआ था। बाद में उसे बताया गया कि दाऊद इब्राहिम के जीजा की हत्या के आरोपी को जेजे अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उसे निशाना बनाना है। ठाकुर के मुताबिक, इस ऑपरेशन की तैयारी पहले से की गई थी। अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था की रेकी की गई थी और हमले के लिए हथियारों का इंतजाम किया गया था।
बताए गए विवरण के अनुसार, 12 सितंबर 1992 की सुबह करीब 3:30 बजे ठाकुर और उसके साथी दो कारों में जेजे अस्पताल पहुंचे। उनके पास पिस्तौल, रिवॉल्वर और एके-47 जैसे हथियार होने की बात सामने आई। हमलावर अस्पताल के उस हिस्से की ओर बढ़े जहां उनका निशाना मौजूद था। लेकिन वार्ड के दरवाजे और पुलिस सुरक्षा को देखकर स्थिति उम्मीद के मुताबिक नहीं रही।
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जेजे हॉस्पिटल फायरिंग केस में सुभाष सिंह ठाकुर को दोषी ठहराए जाने के बाद मौत की सजा सुनाई गई थी। बाद में उसकी मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया गया। दिसंबर 2025 में उसे एक बार फिर इस पुराने मामले के सिलसिले में उत्तर प्रदेश से महाराष्ट्र लाया गया। वह उस समय फतेहगढ़ सेंट्रल जेल में बंद था। महाराष्ट्र पुलिस की कार्रवाई के बाद उसे ठाणे सेंट्रल जेल में स्थानांतरित कर दिया गया।
सुभाष ठाकुर का नाम 2022 के जेजे हॉस्पिटल मर्डर केस से भी जोड़ा गया है। इसी मामले की जांच के सिलसिले में मीरा-भायंदर-वसई-विरार पुलिस उसे उत्तर प्रदेश की जेल से महाराष्ट्र लेकर आई थी। इस तरह एक ही अस्पताल का नाम उसके अपराध से जुड़े दो अलग-अलग दौरों में सामने आता है एक 1992 का चर्चित शूटआउट और दूसरा 2022 का हत्या का मामला।
सुभाष सिंह ठाकुर की कहानी को देखें तो इसकी शुरुआत बनारस के एक गांव से होती है और आगे चलकर यह मुंबई के अंडरवर्ल्ड तक पहुंचती है। कम उम्र में मुंबई जाना, वहां विवाद में गिरफ्तारी और फिर अपराध जगत से संपर्क बढ़ना उसकी जिंदगी के अहम मोड़ बताए जाते हैं। इसके बाद हत्या, जबरन वसूली और गैंगवार से जुड़े आरोपों ने उसकी पहचान को मजबूत किया। 1990 के दशक में मुंबई में सक्रिय गैंगों के बीच हिंसक संघर्ष के दौर में उसका नाम लगातार चर्चा में रहा।
Location : New Delhi
Published : 17 September 2026, 1:23 PM IST