हिंदी
साइबर अपराधियों द्वारा लोगों को ठगी का शिकार बनाने के मामलों के बीच चिलुआताल पुलिस ने त्वरित कार्रवाई कर पीड़ित को बड़ी राहत दिलाई है। फर्जी ट्रेडिंग एप के जरिए ठगी का शिकार हुए युवक के खाते से निकले 57,310 रुपये पुलिस ने वापस दिला दिए। पढ़ें पूरी खबर
ऐप से हुई ठगी
गोरखपुर: साइबर अपराधियों द्वारा लोगों को ठगी का शिकार बनाने के मामलों के बीच चिलुआताल पुलिस ने त्वरित कार्रवाई कर पीड़ित को बड़ी राहत दिलाई है। फर्जी ट्रेडिंग एप के जरिए ठगी का शिकार हुए युवक के खाते से निकले 57,310 रुपये पुलिस ने वापस दिला दिए। पुलिस की इस कार्रवाई से पीड़ित और उसके परिवार ने राहत की सांस ली है।
क्या है पूरी खबर?
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गोरखपुर डॉ कौस्तुभ के निर्देशन में चलाए जा रहे साइबर अपराध नियंत्रण अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई। पुलिस अधीक्षक अपराध के निर्देशन, पुलिस अधीक्षक उत्तरी के मार्गदर्शन तथा क्षेत्राधिकारी कैंपियरगंज के पर्यवेक्षण में थाना चिलुआताल की टीम ने त्वरित कदम उठाते हुए पीड़ित की शिकायत पर कार्रवाई की।
मुनाफे का लालच
मिली जानकारी के अनुसार, पीड़ित नितेश यादव ने थाना चिलुआताल में प्रार्थना पत्र देकर बताया कि साइबर अपराधियों ने उसे ट्रेडिंग में मुनाफे का लालच देकर उसके मोबाइल में एक फर्जी एपीके (APK) एप्लीकेशन इंस्टॉल करवा दिया। एप इंस्टॉल होने के बाद उसी के माध्यम से उसके बैंक खाते से कुल 57,310 रुपये निकाल लिए गए।
कुछ समय बाद जब नितेश यादव को अपने खाते से पैसे कटने की जानकारी हुई तो उसे अपने साथ साइबर ठगी होने का एहसास हुआ। इसके बाद वह तुरंत थाना चिलुआताल पहुंचा और पुलिस से शिकायत की।
पोर्टल पर शिकायत दर्ज
शिकायत मिलते ही थाना चिलुआताल की साइबर सेल टीम सक्रिय हो गई। पुलिस ने तत्काल राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराते हुए संबंधित बैंक खातों को ट्रेस किया और धनराशि को होल्ड कराया। इसके बाद न्यायालय के आदेश पर पूरी रकम 57,310 पीड़ित के खाते में वापस करा दी गई।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि साइबर अपराधियों द्वारा लोगों को लालच देकर फर्जी एप इंस्टॉल कराकर बैंक खातों से पैसे निकालने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। ऐसे मामलों में सतर्कता बेहद जरूरी है। किसी भी अनजान लिंक, एप या कॉल पर भरोसा न करें और तुरंत साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी थाने में सूचना दें।
इस सराहनीय कार्रवाई में थानाध्यक्ष सूरज सिंह, वरिष्ठ उपनिरीक्षक शैलेन्द्र कुमार, साइबर नोडल उपनिरीक्षक सच्चिदानन्द पाण्डेय, कंप्यूटर ऑपरेटर ग्रेड-बी अविराम तथा आरक्षी सत्येंद्र की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस टीम की इस त्वरित कार्रवाई की क्षेत्र में सराहना की जा रही है।