झांसी में किन्नर समाज के बीच इलाके को लेकर घमासान, गांव-गांव पहुंचकर ग्रामीणों से की ये अपील!

झांसी के मोठ में बधाई मांगने के इलाके को लेकर किन्नर समाज के बीच विवाद गहरा गया है। सीमा उर्फ शकीला किन्नर ने आरोप लगाया है कि कोंच, एट और कोटरा से आए कुछ किन्नर उनके क्षेत्र में पहुंचकर अपना अधिकार जता रहे हैं। शकीला का दावा है कि उनके गुरु इमरती देवी करीब 1950 से इस इलाके में बधाई मांगती थीं।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 19 October 2026, 7:10 PM IST
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Jhansi: झांसी के मोठ में बधाई मांगने के इलाके को लेकर किन्नर समाज के बीच विवाद गहराता जा रहा है। वर्षों से एक निश्चित क्षेत्र में बधाई मांगने का दावा करने वाले किन्नरों ने दूसरे इलाकों से आए लोगों पर उनके क्षेत्र में पहुंचकर अपना अधिकार जताने का आरोप लगाया है। मामला इतना बढ़ गया कि क्षेत्रीय किन्नर समाज को गांव-गांव जाकर ग्रामीणों से बातचीत करनी पड़ी। इस दौरान लोगों से दूसरे क्षेत्र से आए किन्नरों को बधाई न देने की अपील भी की गई। अपने दावे के समर्थन में पुराने दस्तावेज दिखाने की बात कही जा रही है। अब इस विवाद ने क्षेत्र में हलचल बढ़ा दी है।

1950 से इलाके में बधाई मांगने का दावा

दरअसल, मोठ कस्बे की रहने वाली सीमा उर्फ शकीला किन्नर का दावा है कि उनके गुरु इमरती देवी करीब 1950 से इस क्षेत्र में बधाई मांगने का काम करती थीं। उनके साथ सीमा उर्फ शकीला और शांति उर्फ गोपाल भी इस परंपरा से जुड़ी हुई थीं। शकीला के मुताबिक, उस समय से ही इस इलाके के गांवों में बधाई मांगने का काम एक तय व्यवस्था के तहत किया जाता रहा है। शकीला का कहना है कि गुरु इमरती देवी के निधन के बाद वर्ष 2003 में उन्होंने और शांति उर्फ गोपाल ने गद्दी संभाली थी। इसके बाद दोनों इस क्षेत्र में बधाई मांगने की परंपरा को आगे बढ़ाते रहे। साल 2015 में शांति उर्फ गोपाल की मृत्यु हो गई। इसके बाद शकीला ने पूरे क्षेत्र की जिम्मेदारी अपने पास होने का दावा किया।

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दूसरे क्षेत्र से आए किन्नरों पर अधिकार जताने का आरोप

शकीला के मुताबिक, अब तक उनकी चेले मुस्कान और कोमल संबंधित गांवों में बधाई मांगने का काम कर रही थीं। सब कुछ पहले की तरह चल रहा था, लेकिन करीब एक सप्ताह पहले कथित तौर पर दूसरे क्षेत्रों से आए कुछ किन्नरों की वजह से विवाद शुरू हो गया। आरोप है कि कोंच की सलमा नायक, एट की मल्लिका नायक और कोटरा की बबली नायक उनके क्षेत्र में पहुंचीं और वहां अपना अधिकार जताने लगीं। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ने लगा। शकीला का कहना है कि जिस इलाके में लंबे समय से उनकी परंपरा चली आ रही है, वहां दूसरे क्षेत्र के लोगों का पहुंचकर अपना दावा करना स्वीकार नहीं किया जा सकता।

इन गांवों को लेकर बढ़ा विवाद

इस विवाद में मोठ क्षेत्र के कई गांवों के नाम सामने आए हैं। इनमें काशीपुरा, खरैला, ईंगोई, सेसा, कनैछा, ढेरी, ढेरा, परैछा और पहाड़गांव सहित आसपास के कई गांव शामिल बताए जा रहे हैं। क्षेत्रीय किन्नर समाज का दावा है कि इन गांवों में लंबे समय से उनके लोग बधाई मांगने का काम करते रहे हैं। इसी वजह से दूसरे क्षेत्रों से आए किन्नरों की मौजूदगी को लेकर आपत्ति जताई जा रही है।

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पुराने दस्तावेज दिखाकर जताया अपना अधिकार

क्षेत्रीय किन्नर समाज ने अपने दावे को मजबूत करने के लिए पुराने दस्तावेज दिखाने की बात कही है। समाज के लोगों का कहना है कि उनके पास ऐसे दस्तावेज हैं, जिनके आधार पर वे लंबे समय से संबंधित गांवों में बधाई मांगने की परंपरा से जुड़े होने का दावा करते हैं। हालांकि, इन दस्तावेजों की वास्तविकता, उनकी कानूनी स्थिति और विवादित क्षेत्र पर अधिकार तय करने में उनकी प्रासंगिकता की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। केवल किसी परंपरा के लंबे समय से चले आने के आधार पर कानूनी अधिकार तय हो जाता है, ऐसा नहीं माना जा सकता।

Location :  Jhansi

Published :  19 October 2026, 7:10 PM IST

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