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जब फिल्म इंडस्ट्री में बढ़ने लगा अंडरवर्ल्ड का दखल (Source: Pinterest)
Mumbai: बॉलीवुड में पिछले कई दशकों से हिंसा, जबरन वसूली और धमकियों की घटनाएं सामने आती रही हैं। फिल्मी सितारों, निर्माताओं और निर्देशकों को निशाना बनाए जाने के कई मामलों ने फिल्म इंडस्ट्री की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं। अभिनेता टाइगर श्रॉफ से जुड़ी हालिया फायरिंग की घटना ने एक बार फिर बॉलीवुड और मुंबई के अंडरवर्ल्ड के पुराने संबंधों की चर्चा तेज कर दी है।
रविवार शाम मुंबई के जुहू इलाके में पुष्पा नरसी पार्क के पास अज्ञात हमलावरों ने कथित तौर पर फायरिंग की। इस घटना में टाइगर श्रॉफ सुरक्षित बच गए, जबकि उनके ड्राइवर और एक अन्य व्यक्ति के घायल होने की खबर है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। हमलावरों की पहचान के लिए सीसीटीवी फुटेज और अन्य सबूतों की जांच की जा रही है। शुरुआती रिपोर्टों में हमलावरों की पहचान या संगठित अपराध से उनके संबंध की पुष्टि नहीं हुई थी।
मुंबई के अंडरवर्ल्ड और हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के बीच संबंध कई दशकों में विकसित हुए। शुरुआती दौर में कुछ आपराधिक गिरोहों ने फिल्मी हस्तियों से संपर्क बनाए और फिल्म फाइनेंसिंग में भी दखल दिया। 1980 और 1990 के दशक के अंत तक आपराधिक नेटवर्क पर धमकी देने, जबरन वसूली करने और फिल्मों की कास्टिंग तथा वितरण जैसे कारोबारी फैसलों को प्रभावित करने की कोशिशों के आरोप लगने लगे।
1990 के दशक में फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कई लोगों पर हमले हुए। कुछ लोगों की हत्या कर दी गई, जबकि कई निर्माता और निर्देशक गोलीबारी में घायल होने के बावजूद बच निकले। इन मामलों में पुलिस ने गैंगवार और आर्थिक विवादों समेत कई संभावित पहलुओं की जांच की थी।
फिल्म निर्माता जावेद रियाज सिद्दीकी की जून 1994 में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसके करीब तीन साल बाद, 7 मार्च 1997 को निर्माता मुकेश दुग्गल की अंधेरी स्थित उनके कार्यालय में हत्या कर दी गई। इस मामले की जांच के दौरान आपराधिक गिरोहों के बीच प्रतिद्वंद्विता और फिल्म कारोबार से जुड़े विवादों के संभावित संबंधों की पड़ताल की गई।
फिल्म निर्माता और निर्देशक राजीव राय, जो त्रिदेव और गुप्त जैसी फिल्मों के लिए जाने जाते हैं, 31 जुलाई 1997 को टार्देओ स्थित अपने कार्यालय के बाहर हुए हमले में बाल-बाल बच गए थे। समकालीन मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उन्हें पहले भी धमकियां मिली थीं और उन्हें पुलिस सुरक्षा दी गई थी।
इसके कुछ ही दिनों बाद, 12 अगस्त 1997 को टी-सीरीज के संस्थापक गुलशन कुमार की मुंबई में एक मंदिर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह मामला फिल्म इंडस्ट्री की प्रमुख हस्तियों से जबरन वसूली की कोशिशों से जुड़े सबसे चर्चित मामलों में शामिल हो गया।
21 जनवरी 2000 को फिल्म निर्माता राकेश रोशन पर मुंबई के सांताक्रूज पश्चिम इलाके में उनके कार्यालय के बाहर हमला हुआ था। यह घटना उनके बेटे ऋतिक रोशन की फिल्म कहो ना... प्यार है की रिलीज के कुछ समय बाद हुई थी।
रिपोर्टों के मुताबिक, दो अज्ञात हमलावरों ने राकेश रोशन पर गोलियां चलाईं। एक गोली उनके हाथ में लगी, जबकि दूसरी उनके सीने को छूते हुए निकल गई। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी सर्जरी हुई। उस समय जांच में अंडरवर्ल्ड से संभावित संबंध और पहले मिली जबरन वसूली की धमकियों जैसे पहलुओं पर भी विचार किया गया था।
दिसंबर 1999 में फिल्म निर्माता मनमोहन शेट्टी पर भी हमले की कोशिश की खबरें सामने आई थीं। इन घटनाओं के बाद फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कई लोगों ने अपनी सुरक्षा बढ़ाने की मांग की थी।
14 फरवरी 2001 को अभिनेता और निर्माता दिनेश आनंद की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। जुलाई 2002 में फिल्म निर्देशक लॉरेंस डिसूजा अपने ओशिवारा स्थित कार्यालय के बाहर हुई गोलीबारी में बच गए थे। पुलिस ने इस हमले के पीछे कथित जबरन वसूली की धमकियों से जुड़े पहलुओं की जांच की थी।
इन घटनाओं ने यह दिखाया कि ऐसी धमकियां केवल बड़े सितारों तक सीमित नहीं थीं। फिल्म निर्माण और कारोबार से जुड़े अन्य लोगों को भी निशाना बनाए जाने के मामले सामने आए थे।
14 अप्रैल 2024 को मुंबई के बांद्रा इलाके में अभिनेता सलमान खान के आवास के बाहर मोटरसाइकिल सवार दो हमलावरों ने गोलीबारी की थी। सलमान खान इस घटना में सुरक्षित रहे। पुलिस ने मामले की जांच के दौरान आरोपियों के कथित तौर पर लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े होने के पहलू की पड़ताल की थी।
सितंबर 2025 में अभिनेत्री दिशा पाटनी के परिवार के बरेली स्थित आवास के बाहर भी गोलीबारी की घटना सामने आई थी। घटना के बाद सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए कथित तौर पर जिम्मेदारी लेने का दावा किया गया था। पुलिस ने गोलीबारी और उस पोस्ट से जुड़े दावों की जांच की।
इसके बाद 1 फरवरी 2026 को फिल्म निर्माता रोहित शेट्टी के जुहू स्थित आवास के बाहर भी गोलीबारी हुई थी। इस घटना में किसी के घायल होने की खबर नहीं थी। मई 2026 में मुंबई पुलिस ने इस मामले में 17 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। पुलिस के आरोपों के मुताबिक, हमले का मकसद लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े एक समूह का दबदबा स्थापित करना था। हालांकि, पुलिस ने कहा था कि उसे किसी खास मकसद को स्थापित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं मिले थे।
18 अक्टूबर को टाइगर श्रॉफ से जुड़ी फायरिंग की घटना ने बॉलीवुड की सुरक्षा को लेकर पुरानी चिंताओं को फिर सामने ला दिया है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है और हमलावरों की गतिविधियों का पता लगाने की कोशिश कर रही है।
कुछ रिपोर्टों में सोशल मीडिया पर घटना की जिम्मेदारी लेने के कथित दावे का भी जिक्र किया गया है, लेकिन शुरुआती खबरों में उसकी प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं हुई थी।
फिलहाल, पुलिस की जांच से ही स्पष्ट होगा कि फायरिंग किसने की, इसके पीछे क्या वजह थी और क्या इसका संगठित अपराध से कोई संबंध है। अलग-अलग घटनाओं की परिस्थितियां भिन्न रही हैं, इसलिए किसी भी मामले में जांच पूरी होने से पहले निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
Location : Mumbai
Published : 19 October 2026, 11:54 AM IST