सरेंडर, गोलियां और मौत… भरत तिवारी एनकाउंटर की कहानी में आया नया ट्विस्ट, आखिर SC ने सुनवाई से क्यों किया इनकार?

भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में सुप्रीम कोर्ट की एक टिप्पणी ने पूरे केस मे नया मोड़ ला दिया है। आखिर सुनवाई को लेकर क्या हुआ और यह मामला क्यों लगातार गंभीर होता जा रहा है? जानिए पूरी कहानी।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 22 June 2026, 2:26 PM IST
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New Delhi: भोजपुर के चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में दायर जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट से तत्काल सुनवाई की उम्मीद लगाए बैठे पक्षकारों को सोमवार को झटका लगा, जब शीर्ष अदालत ने फौरन सुनवाई करने से इनकार कर दिया। हालांकि कोर्ट ने याचिका को खारिज नहीं किया है, लेकिन याचिकाकर्ता को निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए पहले रजिस्ट्रार के समक्ष मामला रखने का निर्देश दिया गया है। इसके बाद यह तय होगा कि याचिका पर आगे कब और कैसे सुनवाई होगी।

फर्जी एनकाउंटर का आरोप

इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई थी। याचिकाकर्ता का आरोप है कि भरत भूषण तिवारी की मौत एक संदिग्ध पुलिस कार्रवाई का परिणाम है और पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच जरूरी है। याचिका में मांग की गई है कि मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपी जाए। साथ ही घटना में शामिल पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की भी मांग उठाई गई है।

इसके अलावा एक स्वतंत्र जांच समिति गठित करने की अपील की गई है, जिसकी निगरानी सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश द्वारा की जाए ताकि जांच की निष्पक्षता पर कोई सवाल न उठे।

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सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सोमवार को जस्टिस बी. वी. नागरत्ना और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष मामले का उल्लेख किया गया। याचिकाकर्ता ने तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया, लेकिन अदालत ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया। बेंच ने स्पष्ट किया कि मामले को पहले सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार के समक्ष मेंशन किया जाए। इसके बाद ही आगे की प्रक्रिया तय होगी।

आखिर क्या है पूरा मामला?

भरत भूषण तिवारी का नाम पिछले कुछ दिनों से लगातार चर्चा में बना हुआ है। आरोप है कि 17 जून को पुलिस कार्रवाई के दौरान उन्हें गोली लगी थी। बाद में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। घटना के बाद यह दावा भी सामने आया कि तिवारी ने आत्मसमर्पण करने की कोशिश की थी, लेकिन इसके बावजूद उन पर गोली चलाई गई। इसी दावे के आधार पर फर्जी एनकाउंटर के आरोप लगाए जा रहे हैं।

हालांकि पुलिस का पक्ष अलग बताया जा रहा है और इसी वजह से पूरे मामले की सच्चाई जानने की मांग लगातार तेज होती जा रही है।

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सरकार ने दिए न्यायिक जांच के आदेश

मामले ने तूल पकड़ने के बाद बिहार सरकार भी सक्रिय हो गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घोषणा की है कि इस पूरे घटनाक्रम की जांच पटना हाईकोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में कराई जाएगी। सरकार का कहना है कि जांच पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ होगी ताकि घटना से जुड़े सभी तथ्यों को सामने लाया जा सके।

चार पुलिसकर्मियों पर गिरी गाज

एनकाउंटर को लेकर उठे सवालों के बीच प्रशासनिक कार्रवाई भी शुरू हो चुकी है। बिहार पुलिस ने एक थाना प्रभारी समेत चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है। बताया जा रहा है कि एक वीडियो सामने आने के बाद यह कार्रवाई की गई। वीडियो में कथित तौर पर एक हथियारबंद व्यक्ति दिखाई देता है और पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि वीडियो की सत्यता और पूरे घटनाक्रम की जांच अभी जारी है।

Location :  New Delhi

Published :  22 June 2026, 2:26 PM IST

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