अमरोहा मर्डर केस में बड़ा यू-टर्न, उम्रकैद की सजा काट रही महिला को इलाहाबाद हाईकोर्ट से मिली जमानत

अमरोहा के बहुचर्चित किसान हत्याकांड में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा काट रही मुख्य आरोपी महिला को बड़ी राहत देते हुए जमानत याचिका स्वीकार कर ली है। कोर्ट ने उसकी सजा और जुर्माने की वसूली पर फिलहाल रोक लगा दी है।

Post Published By: Priyam Kashyap
Updated : 13 June 2026, 6:04 PM IST
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Amroha : अमरोहा के चर्चित किसान हत्याकांड में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोषी ठहराई गई महिला को बड़ी राहत प्रदान की है। अदालत ने उम्रकैद की सजा काट रही महिला की जमानत याचिका स्वीकार करते हुए उसकी सजा के क्रियान्वयन और जुर्माने की वसूली पर फिलहाल रोक लगा दी है। यह मामला कई वर्षों से चर्चा में रहा है, जिसमें प्रेम संबंधों और आपसी विवाद को हत्या की वजह बताया गया था।

किसान के लापता होने से शुरू हुई थी जांच

मामला वर्ष 2019 का है, जब अमरोहा जिले के एक गांव निवासी किसान अचानक घर से निकलने के बाद वापस नहीं लौटे थे। परिवार की ओर से उनकी गुमशुदगी दर्ज कराई गई थी। बाद में किसान की पत्नी ने एक महिला और उसके सहयोगियों पर संदेह जताते हुए अपहरण और हत्या का आरोप लगाया। पुलिस जांच आगे बढ़ी तो कई ऐसे तथ्य सामने आए, जिनके आधार पर हत्या की साजिश का दावा किया गया।

जांच में सामने आया प्रेम प्रसंग का एंगल

अभियोजन के अनुसार जांच के दौरान कॉल डिटेल और अन्य साक्ष्यों के आधार पर यह बात सामने आई कि मृतक और आरोपी महिला के बीच नजदीकियां थीं। इसी दौरान महिला के संबंध एक पुलिसकर्मी से भी बन गए थे। आरोप था कि किसान इन रिश्तों में बाधा बन रहा था, जिसके चलते उसे रास्ते से हटाने की साजिश रची गई।

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जांच के बाद पुलिस ने महिला, पुलिसकर्मी और अन्य आरोपियों के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया। बाद में ट्रायल कोर्ट ने महिला समेत तीन आरोपियों को हत्या का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जबकि एक अन्य आरोपी को साक्ष्य छिपाने के मामले में कारावास की सजा दी गई थी।

हाईकोर्ट में उठे जांच और साक्ष्यों पर सवाल

सजा के खिलाफ दाखिल अपील में महिला की ओर से कई महत्वपूर्ण तर्क रखे गए। बचाव पक्ष ने कहा कि गुमशुदगी दर्ज कराने और हत्या का मुकदमा दर्ज करने में हुई देरी का संतोषजनक कारण रिकॉर्ड पर नहीं है। साथ ही, जिस व्यक्ति के साथ मृतक को आखिरी बार देखे जाने का दावा किया गया था, उसे अदालत में गवाह के रूप में पेश नहीं किया गया।

यह भी दलील दी गई कि मृतक का शव महिला की निशानदेही पर नहीं, बल्कि अन्य सह-आरोपियों की सूचना के आधार पर बरामद हुआ था।

अपील लंबित रहने तक मिलेगी राहत

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि अपील के अंतिम निस्तारण में समय लग सकता है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने महिला को जमानत पर रिहा करने का आदेश देते हुए उसकी सजा और जुर्माने की वसूली पर अस्थायी रोक लगा दी। अब इस बहुचर्चित मामले में अंतिम फैसला अपील की सुनवाई पूरी होने के बाद होगा।

Location :  Amroha

Published :  13 June 2026, 6:04 PM IST

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