तिहाड़ जेल में हुई मुलाकात, फिर नेपाल से सहारनपुर तक फैला खेल; 10वीं फेल ‘चिल्लर किंग’ की पूरी कहानी

सहारनपुर में पकड़ी गई नकली सिक्कों की फैक्ट्री ने एक बड़े नेटवर्क का खुलासा किया है। पुलिस के मुताबिक फैक्ट्री में रोजाना 10 से 12 हजार नकली सिक्के बनाने की क्षमता थी। 6400 तैयार सिक्के, अधबने सिक्के, छह मशीनें, 59 डाई, आठ मोबाइल और सात रजिस्टर बरामद हुए हैं।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 14 September 2026, 1:45 PM IST
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Saharanpur: सहारनपुर में पकड़ी गई नकली सिक्कों की फैक्ट्री ने पुलिस के सामने एक ऐसे नेटवर्क की कहानी खोल दी है, जिसकी कड़ियां उत्तर प्रदेश से निकलकर नेपाल और थाईलैंड तक जुड़ने का दावा किया जा रहा है। पुलिस की कार्रवाई में सामने आया है कि यह कोई छोटी-मोटी नकली सिक्के बनाने की जगह नहीं थी, बल्कि बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए तैयार किया गया पूरा मैन्यूफैक्चरिंग सेंटर था। फैक्ट्री से हजारों तैयार नकली सिक्के, लाखों रुपये कीमत के अधबने सिक्के, मशीनें और दर्जनों डाई बरामद होने के बाद पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की सप्लाई चेन और पैसों के लेनदेन की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।

रोज 10 से 12 हजार सिक्के बनाने की क्षमता

सहारनपुर में पकड़ी गई फैक्ट्री को देखकर पुलिस भी इसके पैमाने को लेकर हैरान है। पुलिस के मुताबिक यहां छह मशीनों की मदद से रोजाना करीब 10 से 12 हजार नकली सिक्के तैयार करने की क्षमता विकसित कर ली गई थी। छापेमारी के दौरान फैक्ट्री से करीब 6400 तैयार नकली सिक्के बरामद हुए। इसके अलावा करीब पांच लाख रुपये कीमत के अधबने सिक्के भी मिले। पुलिस को 59 डाई मिलीं, जिनमें 39 बिना मुहर वाली और 20 मुहर वाली डाई बताई गई हैं।

आठ मोबाइल और सात रजिस्टर खोलेंगे राज

पुलिस के हाथ सिर्फ मशीनें और नकली सिक्के ही नहीं लगे हैं। फैक्ट्री से आठ मोबाइल फोन और सात हिसाब-किताब के रजिस्टर भी बरामद किए गए हैं। अब जांच टीम के लिए ये मोबाइल और रजिस्टर बेहद अहम सबूत माने जा रहे हैं। पुलिस इनके जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि फैक्ट्री से तैयार नकली सिक्के किन लोगों तक पहुंचाए जाते थे, कौन-कौन एजेंट इस नेटवर्क से जुड़े थे और लेनदेन किस तरह किया जाता था।

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कौन है उपकार लूथरा?

इस पूरे नेटवर्क में उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह को पुलिस अहम कड़ी मान रही है। पुलिस के मुताबिक उपकार साल 2001 से नकली सिक्कों के धंधे से जुड़ा हुआ है। बताया जाता है कि उपकार ने दसवीं तक पढ़ाई की है। शुरुआत में उसका नाम उत्तम नगर की एक ज्वैलरी शॉप में चोरी के मामले में सामने आया। इसके बाद उसने कपड़ों की दुकान चलाने की कोशिश की, लेकिन कारोबार नहीं चला।

2017 में दिल्ली पुलिस ने किया था गिरफ्तार

उपकार लूथरा पहले भी पुलिस के निशाने पर आ चुका है। साल 2017 में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने उसे हरियाणा के कोंडली से गिरफ्तार किया था। उस समय उस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित होने की बात सामने आई थी। पुलिस के मुताबिक गिरफ्तारी से बचने के दौरान वह नेपाल में छिपा रहा। वहां भी उसने कथित तौर पर नकली सिक्के बनाने का ठिकाना खड़ा करने की कोशिश की थी।

तिहाड़ जेल में हुई मुलाकात से जुड़ी कहानी

इस पूरे मामले की सबसे अहम कड़ी तिहाड़ जेल तक जाती है। पुलिस के मुताबिक उपकार लूथरा की मुलाकात जेल में सहारनपुर निवासी हिमांशु उर्फ गुल्लू से हुई थी। जेल की चारदीवारी के भीतर हुई यह मुलाकात बाद में कथित तौर पर एक बड़े नेटवर्क में बदल गई। दोनों के बीच बनी जान-पहचान बाहर आने के बाद भी जारी रही और इसी नेटवर्क का उत्पादन केंद्र सहारनपुर में तैयार होने की बात सामने आई है।

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20 रुपये के सिक्के में 5-6 रुपये की लागत

पुलिस जांच में नकली सिक्कों के इस कारोबार का कथित आर्थिक मॉडल भी सामने आया है। जानकारी के मुताबिक 20 रुपये का एक नकली सिक्का तैयार करने में करीब पांच से छह रुपये की लागत आती थी। इसके बाद यही सिक्का एजेंटों को करीब 12 से 15 रुपये में दिया जाता था। एजेंट आगे इन सिक्कों को बाजार में असली मुद्रा के तौर पर चलाने का काम करते थे।

करीब आठ लोगों की अलग-अलग जिम्मेदारी

पुलिस के मुताबिक इस नेटवर्क में करीब आठ लोग अलग-अलग जिम्मेदारियां संभाल रहे थे। किसी के जिम्मे मशीन और डाई के जरिए सिक्कों का उत्पादन था, तो कोई तैयार माल को एजेंटों तक पहुंचाने का काम करता था। कुछ लोग बाजार में नकली सिक्कों को खपाने की जिम्मेदारी संभालते थे। नेटवर्क में काम को अलग-अलग हिस्सों में बांटने का मकसद भी यही बताया जा रहा है कि अगर कोई एक सदस्य पुलिस के हाथ लग जाए तो पूरा नेटवर्क तुरंत सामने न आए।

Location :  Saharanpur

Published :  14 September 2026, 1:45 PM IST

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