सोने की कीमतों में उछाल: ग्लोबल टेंशन और अमेरिकी टैरिफ सिस्टम का असर, ग्लोबल इकोनॉमी की बढ़ी चिंताएं

सोने की कीमतों में हालिया वृद्धि के पीछे ग्लोबल जियो-पॉलिटिकल अनिश्चितता, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीति, और सेंट्रल बैंकों का डॉलर रिजर्व से दूरी बनाना है। इस साल सोना 32% तक महंगा हुआ है। हालांकि, यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या सोना भविष्य में मुख्य रिजर्व असेट बन सकता है।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 13 September 2025, 10:58 AM IST
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New Delhi: सोना हमेशा से एक सुरक्षित निवेश माना जाता रहा है, खासकर भारत में, जहां सोने के गहनों का क्रेज़ बहुत ज्यादा है। भारतीय महिलाओं के पास इतना सोना है कि यह कई बड़े डेवलप्ड देशों के गोल्ड रिजर्व से भी ज्यादा हो सकता है। हालांकि, हाल ही में सोने की कीमतों में एक तेज़ वृद्धि हुई है, जो कुछ खास कारणों से हो रही है।

ग्लोबल टेंशन और जियो-पॉलिटिकल अनिश्चितता

डोनाल्ड ट्रंप के फिर से सत्ता में आने और उनके द्वारा अमेरिकी टैरिफ सिस्टम की घोषणा करने के बाद से, दुनिया भर में जियो-पॉलिटिकल अनिश्चितता बढ़ी है। इसका असर सीधे ग्लोबल इकोनॉमी पर पड़ा है। खासतौर पर टैरिफ की घोषणा के बाद, सोने की कीमतों में एक उछाल देखा गया है। डॉलर में गिरावट और ब्याज दरों में कमी की उम्मीदों ने सोने को एक आकर्षक निवेश विकल्प बना दिया है। इस साल के शुरुआत में ही डॉलर में 11% की गिरावट आई है। जिससे सेंट्रल बैंकों ने डॉलर रिजर्व से दूरी बनानी शुरू कर दी है। इसके साथ ही यूरोप और जापान में बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी भी हो रही है, जो गवर्नमेंट बॉन्ड की डिमांड में कमी का संकेत देता है।

सोने की कीमतों में उछाल

सोने को मिल रहा है समर्थन

सेंट्रल बैंकों का अमेरिकी डॉलर रिजर्व से दूरी बनाना भी सोने के पक्ष में एक बड़ा कारक है। अब सोना धीरे-धीरे दूसरी करेंसीज़ की जगह ले रहा है। इस साल के शुरुआत से ही गोल्ड की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है, और ऐसा लगता है कि यह केवल एक अस्थायी बदलाव नहीं है, बल्कि लंबे समय तक चलने वाला ट्रेंड हो सकता है। हालांकि, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि सोना मुख्य रिजर्व असेट बन जाएगा, क्योंकि इसके लिए ग्लोबल इकोनॉमी की स्थिति और खराब होनी पड़ेगी।

शेयर बाजार की स्थिति और सोने का प्रभाव

शेयर मार्केट लगातार पॉजिटिव सिग्नल दे रहा है। इस साल निफ्टी इंडेक्स 5% और S&P 500 इंडेक्स 9% ऊपर है। अमेरिकी शेयर मार्केट रिकॉर्ड हाई पर है और भारतीय शेयर मार्केट भी अपने रिकॉर्ड हाई के करीब है। हालांकि, सोने और शेयर मार्केट के बीच एक स्पष्ट मिसमैच देखा जा रहा है। जबकि शेयर मार्केट अपने उच्चतम स्तर पर है, सोना, करेंसी और बॉन्ड मार्केट बुरी खबरों का संकेत दे रहे हैं। यह स्थिति एक संभावित करेक्शन का संकेत देती है।

Location : 
  • New Delhi

Published : 
  • 13 September 2025, 10:58 AM IST

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