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खावड़ा से ग्रीन एनर्जी का नया युग (फोटो सोर्स- इंटरनेट)
New Delhi: आधुनिक दौर में किसी देश की ताकत सिर्फ उसकी सेना या हथियारों से नहीं मापी जाती, बल्कि उसकी ऊर्जा सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो गई है। भारत ने 2012 के ऐतिहासिक ब्लैकआउट और 2022 में जर्मनी के ऊर्जा संकट से बड़ा सबक लिया है। यही वजह है कि अब गुजरात के कच्छ स्थित खावड़ा में दुनिया के सबसे बड़े रिन्यूएबल एनर्जी पार्क का निर्माण किया जा रहा है, जो भारत को ग्रीन एनर्जी की महाशक्ति बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
30 जुलाई 2012 को भारत के नॉर्दर्न ग्रिड पर अचानक दबाव बढ़ा और देखते ही देखते नॉर्दर्न, ईस्टर्न और नॉर्थ-ईस्टर्न ग्रिड ध्वस्त हो गए। देश के 22 राज्यों में बिजली गुल हो गई। अस्पतालों से लेकर उद्योगों तक सब कुछ प्रभावित हुआ। पश्चिम बंगाल और झारखंड की कोयला खदानों में 200 से अधिक मजदूर जमीन के नीचे फंस गए थे, जिन्हें निकालने में करीब 8 घंटे लगे। एक दिन के भीतर देश को लगभग 1000 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
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साल 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान जर्मनी की गैस और ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई तो यूरोप की सबसे मजबूत अर्थव्यवस्था भी लड़खड़ा गई। हजारों कंपनियां दिवालिया होने की कगार पर पहुंच गईं और जर्मनी जी-7 का ऐसा देश बन गया जिसने लगातार दो बार मंदी का सामना किया। इस संकट ने साफ कर दिया कि असली ताकत सिर्फ पैसा नहीं, बल्कि ऊर्जा है।
इन्हीं अनुभवों के बाद भारत ने ऊर्जा आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता दी है। गुजरात के कच्छ के विशाल रण में करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये की लागत से खावड़ा रिन्यूएबल एनर्जी पार्क विकसित किया जा रहा है। 72,600 हेक्टेयर में फैला यह प्रोजेक्ट आकार में पेरिस शहर से भी बड़ा है।
साल 2030 तक इसकी उत्पादन क्षमता 30 गीगावाट से अधिक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। पूरी क्षमता पर काम करने के बाद यह हर साल करीब 81 बिलियन यूनिट स्वच्छ बिजली का उत्पादन करेगा, जिससे करोड़ों भारतीय घरों को बिजली उपलब्ध कराई जा सकेगी।
खावड़ा प्रोजेक्ट की सबसे खास बात सिर्फ इसकी बिजली उत्पादन क्षमता नहीं है, बल्कि वह मानवीय और औद्योगिक ढांचा भी है जो यहां विकसित किया गया है।
जिस इलाके को कभी बंजर, खारा और इंसानी बसावट के लिए अनुपयुक्त माना जाता था, वहां आज 500 से अधिक मजदूरों के लिए एयर कंडिशन कॉलोनियां बनाई गई हैं। मजदूरों के रहने, खाने और स्वास्थ्य की आधुनिक सुविधाएं विकसित की गई हैं। एक हाईटेक क्लाउड किचन प्रतिदिन करीब एक लाख पौष्टिक भोजन तैयार कर रहा है। यह क्षेत्र अब केवल ऊर्जा उत्पादन केंद्र नहीं, बल्कि एक नई आर्थिक गतिविधि का केंद्र बनता जा रहा है।
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खावड़ा प्रोजेक्ट ने स्थानीय स्तर पर भी बड़ा बदलाव लाया है। यहां 15,200 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार सृजित हुए हैं। जिस क्षेत्र में कभी जीवन की कल्पना भी मुश्किल थी, वहां आज हजारों लोग काम कर रहे हैं और आधुनिक सुविधाओं के साथ रह रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा उत्पादन जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी उसका सुरक्षित वितरण भी है। इसी कारण खावड़ा में विशाल सब-स्टेशन बनाए जा रहे हैं, जो एक बार में 4500 एमवीए तक ऊर्जा को नियंत्रित कर सकते हैं। यहां से निकलने वाली ट्रांसमिशन लाइनें इस बिजली को देश के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाएंगी। पहले चरण में ही एक लाइन के जरिए 3 गीगावाट बिजली का संचार किया जा रहा है।
भारत का यह मेगा प्रोजेक्ट केवल एक ऊर्जा पार्क नहीं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और हरित विकास का ऐसा मॉडल बनकर उभर रहा है, जो आने वाले वर्षों में देश को ग्रीन रिन्यूएबल एनर्जी का वैश्विक बादशाह बना सकता है।
Location : New Delhi
Published : 20 June 2026, 9:57 AM IST
Topics : Adani Green Energy Gujarat Renewable Project India Renewable Energy Renewable Energy Park Wind Energy Project
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