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प्रतीकात्मक छवि (फोटो सोर्स- Pinterest)
Bhagalpur: बिहार के भागलपुर जिले से प्रशासनिक गलियारे को हिला देने वाली एक बड़ी खबर सामने आई है। गोपालपुर के तत्कालीन अंचल अधिकारी (CO) राज किशोर शर्मा पर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने बेहद सख्त कार्रवाई की है। विभागीय जांच में राजस्व कार्यों में गंभीर लापरवाही, प्रशासनिक उदासीनता और वित्तीय शिथिलता के आरोप आंशिक रूप से साबित होने के बाद नीतीश सरकार ने उनके खिलाफ कड़ा दंडात्मक कदम उठाया है। सरकार ने उनकी मासिक पेंशन में 10 प्रतिशत कटौती करने का आदेश जारी किया है, जो अगले पांच वर्षों तक प्रभावी रहेगा।
इस संबंध में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा एक आधिकारिक संकल्प जारी कर विभागीय कार्रवाई को समाप्त कर दिया गया है। मामले की पृष्ठभूमि की बात करें तो वर्ष 2022 में भागलपुर के समाहर्ता (कलेक्टर) की ओर से तत्कालीन CO राज किशोर शर्मा के खिलाफ एक विस्तृत आरोप पत्र गठित किया गया था।
इस आरोप पत्र में उन पर बिहार दाखिल-खारिज अधिनियम 2012 के कड़े प्रावधानों का खुला उल्लंघन करने, रैयतों के आवेदनों को बिना किसी ठोस या कानूनी कारण के मनमाने ढंग से खारिज करने और सैकड़ों महत्वपूर्ण फाइलों को लंबे समय तक बेवजह लंबित रखने जैसे गंभीर आरोप मढ़े गए थे।
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इसके अलावा, तत्कालीन अंचल अधिकारी पर लोक शिकायत निवारण के मामलों को गंभीरता से न लेने, जमाबंदी और लगान को अद्यतन (अपडेट) करने में ढिलाई बरतने, अदालती कार्यों के प्रति उदासीन रहने और भूमि मापी व अतिक्रमण हटाओ अभियानों में रुचि नहीं लेने की शिकायतें भी दर्ज थीं।
जांच में सबसे गंभीर और चौंकाने वाला मामला भू-लगान (लैंड रेवेन्यू) की वसूली को लेकर सामने आया। वित्तीय वर्ष 2021-22 में गोपालपुर अंचल को सरकार की तरफ से कुल 84 लाख रुपये की राजस्व वसूली का लक्ष्य दिया गया था। लेकिन, राज किशोर शर्मा के ढीले प्रशासनिक रवैये के कारण विभाग मात्र 19.43 लाख रुपये की ही वसूली कर सका। लक्ष्य के मुकाबले इतनी कम वसूली को विभाग ने सीधे तौर पर सरकारी राजस्व और राज्य के वित्तीय हितों के प्रतिकूल माना।
इन गंभीर आरोपों के आधार पर जून 2022 में अधिकारी से पहला स्पष्टीकरण मांगा गया था। बाद में जिलाधिकारी (DM) की रिपोर्ट में छह में से पांच आरोपों पर अधिकारी की सफाई को पूरी तरह अस्वीकार्य पाया गया। इसके बाद मामले की औपचारिक विभागीय जांच शुरू की गई, जिसमें अपर समाहर्ता (एडिशनल कलेक्टर) को जांच पदाधिकारी नियुक्त किया गया।
जांच अधिकारी ने सितंबर 2025 में अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें छह मुख्य आरोपों में से तीन आरोप आंशिक रूप से पूरी तरह प्रमाणित पाए गए। इसके बाद मार्च 2026 में विभाग द्वारा अधिकारी को द्वितीय कारण पृच्छा (सेकंड शो-कॉज नोटिस) जारी की गई। सेवानिवृत्त हो चुके अधिकारी द्वारा दिए गए अंतिम जवाब को भी विभाग ने संतोषजनक नहीं माना।
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अंततः, तमाम साक्ष्यों और जांच रिपोर्ट के आधार पर बिहार पेंशन नियमावली 1950 के नियम 139 के तहत प्रदत्त शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए राज्य सरकार ने यह बड़ा फैसला सुनाया। राज किशोर शर्मा, जो वर्तमान में सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं, की पेंशन राशि में अगले 5 सालों के लिए 10% की कटौती का अंतिम आदेश पारित कर दिया गया है। भागलपुर और पूरे बिहार के प्रशासनिक हलकों में इस कार्रवाई को ड्यूटी में लापरवाही बरतने वाले और सुस्त अफसरों के लिए एक बेहद सख्त और कड़ा संदेश माना जा रहा है।
Location : Patna
Published : 19 June 2026, 2:40 PM IST