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पटना की गलियों से निकलकर वैश्विक कारोबारी साम्राज्य खड़ा करने वाले वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के परिवार पर दुखों का गहरा साया छा गया है। उनके बेटे अग्निवेश अग्रवाल का अमेरिका में कार्डियक अरेस्ट से निधन हो गया।
अनिल अग्रवाल के बेटे अग्निवेश का निधन
Patna: पटना की गलियों से निकलकर वैश्विक कारोबारी साम्राज्य खड़ा करने वाले वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के परिवार पर दुखों का गहरा साया छा गया है। उनके बेटे अग्निवेश अग्रवाल का अमेरिका में कार्डियक अरेस्ट से निधन हो गया। इस अचानक हुई घटना से उद्योग जगत और सामाजिक हलकों में शोक की लहर है।
बेटे के निधन के बाद अनिल अग्रवाल ने एक भावुक बयान में कहा कि वह अपनी कुल कमाई का 75 प्रतिशत से अधिक हिस्सा दान करेंगे। उन्होंने बताया कि यह धन सामाजिक कार्यों, शिक्षा, स्वास्थ्य और जनकल्याण के लिए समर्पित किया जाएगा। साथ ही उन्होंने आगे की जिंदगी और भी सादगी से जीने का संकल्प लिया है। फोर्ब्स के अनुसार अनिल अग्रवाल की कुल नेटवर्थ करीब 4.2 अरब डॉलर, यानी लगभग 35,000 करोड़ रुपये है।
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अग्निवेश अग्रवाल का जन्म 3 जून 1976 को पटना में हुआ था। उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा मेयो कॉलेज, अजमेर से प्राप्त की। बाद में उन्होंने व्यवसाय और नेतृत्व के क्षेत्र में कदम रखा। अग्निवेश फुजैराह गोल्ड जैसी कंपनियों की स्थापना से जुड़े रहे और हिंदुस्तान जिंक के चेयरमैन के रूप में भी अहम भूमिका निभाई। उन्हें एक सरल, संवेदनशील और दूरदर्शी कारोबारी के तौर पर जाना जाता था।
अग्निवेश अग्रवाल की पत्नी पूजा बांगुर हैं, जो सीमेंट के प्रबंध निदेशक हरि मोहन बांगुर की बेटी हैं। यह विवाह देश की चर्चित और भव्य शादियों में गिना जाता है। हालांकि पूजा बांगुर हमेशा लाइमलाइट से दूर रहीं। उनके और अग्निवेश के बच्चों को लेकर भी परिवार ने कभी सार्वजनिक जानकारी साझा नहीं की है।
अग्निवेश अग्रवाल की व्यक्तिगत संपत्ति के आंकड़े सार्वजनिक नहीं हैं, लेकिन उनके पिता अनिल अग्रवाल भारत के सबसे अमीर उद्योगपतियों में शामिल हैं। हुरुन इंडिया रिच लिस्ट 2025 में अनिल अग्रवाल 16वें स्थान पर और एनआरआई वेल्थ क्रिएटर्स की सूची में चौथे स्थान पर रहे। बेटे के निधन के बाद वेदांता समूह की विरासत और भविष्य की जिम्मेदारियों पर सबकी नजरें टिकी हैं।
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वेदांता ग्रुप जिंक, एल्युमिनियम, कॉपर, आयरन, स्टील, पावर और ऑयल-गैस जैसे क्षेत्रों में सक्रिय है। अब कंपनी सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले ग्लास जैसे हाई-टेक सेक्टर में निवेश की तैयारी कर रही है, जिसे ‘मेक इन इंडिया’ के लिहाज से अहम माना जा रहा है। यह घटना न सिर्फ एक परिवार के लिए, बल्कि भारतीय उद्योग जगत के लिए भी एक भावनात्मक और निर्णायक मोड़ बनकर सामने आई है।