
श्रावणी मेला 2026 की आहट (सोर्स- डाइनामाइट न्यूज़)
Deoghar: झारखंड के देवघर स्थित बाबा वैद्यनाथ धाम एक बार फिर श्रावणी मेला 2026 की तैयारियों के साथ चर्चा में है। संभावित रूप से अगस्त के पहले सप्ताह से शुरू होने वाले इस मेले को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह बढ़ता जा रहा है। हर साल लाखों कांवरिये सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर करीब 105 किलोमीटर की कठिन यात्रा तय कर बाबा धाम पहुंचते हैं।
श्रद्धा और भक्ति के इस महापर्व के बीच एक सवाल भी सामने आ रहा है क्या बदलते समय और नए रास्तों ने हमारी पुरानी धार्मिक परंपराओं को पीछे छोड़ दिया है? यात्रा का स्वरूप भले आधुनिक हुआ हो, लेकिन उससे जुड़े कई ऐतिहासिक पड़ाव धीरे-धीरे उपेक्षा का शिकार होते जा रहे हैं।
देवघर के बिलासी क्षेत्र में स्थित दर्शनीय मंदिर कभी कांवर यात्रा का महत्वपूर्ण प्रारंभिक केंद्र हुआ करता था। परंपरा के अनुसार, श्रद्धालु यहां सबसे पहले रुकते, गंगाजल सुरक्षित रखते और *पंचशूल* का दर्शन कर बाबा मंदिर की ओर आगे बढ़ते थे। यह केवल एक धार्मिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि आत्मिक तैयारी का अहम हिस्सा माना जाता था।
सावन का महीना आते ही यह मंदिर आस्था का विशाल केंद्र बन जाता था। हजारों-लाखों श्रद्धालु यहां जुटते और पूरा वातावरण “बोल बम” के जयघोष से गूंज उठता था। हर दिशा में भक्ति का उत्साह और बाबा के दर्शन की प्रतीक्षा यह दृश्य किसी आध्यात्मिक मेले से कम नहीं होता था।
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समय के साथ सड़कें चौड़ी हुईं और यात्रा मार्गों में बदलाव हुआ। इस रूट डायवर्जन के कारण श्रद्धालु अब सीधे बाबा धाम पहुंचने लगे। नतीजतन, बिलासी का यह दर्शनीय मंदिर मुख्य यात्रा मार्ग से कट गया और यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भारी कमी आ गई।
श्रावणी मेला 2026 से पहले देवघर का बिलासी दर्शनीय मंदिर चर्चा में है, जहां कभी कांवरियों की भारी भीड़ उमड़ती थी, लेकिन रूट बदलने से अब यह स्थल उपेक्षित हो गया।#ShravaniMela2026 #Deoghar #BabaDham #KanwarYatra pic.twitter.com/94UWoExDMG
— डाइनामाइट न्यूज़ हिंदी (@DNHindi) April 28, 2026
हालांकि मंदिर की धार्मिक महत्ता आज भी बरकरार है। यहां महाकाल, भगवान हनुमान और मां काली के मंदिर श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं। लेकिन जो भीड़ कभी इस स्थल की पहचान थी, वह अब सीमित होकर रह गई है।
मंदिर से जुड़े पुजारियों का कहना है कि एक समय हर कांवरिया यहां रुकता था, लेकिन अब यह परंपरा लगभग समाप्त हो चुकी है। वहीं, मंदिर से जुड़ी पुजारिन ने प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि श्रावणी मेले के दौरान भी यहां सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण की उचित व्यवस्था नहीं होती।
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स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस ऐतिहासिक स्थल को फिर से मुख्य धारा में लाया जाए। यदि यहां सुरक्षा, यातायात और बुनियादी सुविधाएं बेहतर की जाएं, तो यह मंदिर फिर से आस्था का प्रमुख केंद्र बन सकता है।
बाबा वैद्यनाथ धाम आज भी आस्था का शिखर है, लेकिन उससे जुड़े ऐसे पड़ाव, जिन्होंने इस यात्रा को पूर्णता दी, उन्हें सहेजना बेहद जरूरी है। आस्था केवल मंजिल तक पहुंचने का नाम नहीं, बल्कि उन परंपराओं को जीवित रखने का संकल्प भी है, जो हमारी सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा हैं।
Location : Deoghar
Published : 28 April 2026, 9:18 AM IST