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Gorakhpur: गोरखपुर जनपद के शहर से सटे ग्रामीण इलाकों में इन दिनों भीषण गर्मी और पानी की कमी ने किसानों की कमर तोड़ दी है। खासकर राप्ती नदी के किनारे बसे गांवों में एक फसली भूमि पर निर्भर सब्जी उत्पादक किसान सिंचाई के अभाव में भारी संकट झेल रहे हैं। अप्रैल-मई का समय, जब किसान सालभर के खर्च के लिए सब्जी की खेती करते हैं, वही समय अब उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।
ग्रामीण क्षेत्रों में जलस्तर तेजी से नीचे खिसक रहा है। खेतों में पानी की कमी के कारण हरी-भरी सब्जियां सूखने लगी हैं। किसान किसी तरह डीजल पंप के सहारे फसल बचाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन डीजल की किल्लत और महंगाई ने उनकी परेशानी को और बढ़ा दिया है। कई बार किसानों को पंप चलाने के लिए घंटों भटकना पड़ता है।
समय से सिंचाई नहीं हो पाने के कारण सब्जियों का उत्पादन कम हो रहा है जिससे सब्जी की खेती करने वाले किसानों की आमदनी भी कम हो गई है। उससे उनके सामने यह संकट आ रहा है कि कैसे अपनी बिटिया के हाथ पीले करेगें और न्यौता हकारी।आलम ये है कि जिस खेत में अप्रैल के शुरूआत में 80 किग्रा भिंडी का उत्पादन होता था अब वह घटकर करीब 45 किग्रा हो गया है।
शहर से सटे अजवनियां गांव के निवासी प्रकाश मौर्य बताते हैं कि उनके परिवार समेत करीब दस परिवारों की आजीविका पूरी तरह सब्जी की खेती पर निर्भर है। लेकिन इस समय पानी की भारी कमी के चलते फसल सूखने के कगार पर है। उन्होंने कहा कि “कभी पानी नहीं मिलता, तो कभी डीजल के लिए पंपों पर चक्कर लगाना पड़ता है। ऐसे में खेती करना बेहद मुश्किल हो गया है।”किसानों का कहना है कि अगर जल्द ही सिंचाई की व्यवस्था नहीं हुई तो उनकी पूरी फसल बर्बाद हो सकती है, जिससे आर्थिक संकट और गहरा जाएगा। ग्रामीण इलाकों में नहरों और ट्यूबवेल की पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण किसान प्राकृतिक संसाधनों पर ही निर्भर हैं, जो इस समय साथ नहीं दे रहे।
स्थानीय किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि डीजल की उपलब्धता सुनिश्चित कराई जाए और वैकल्पिक सिंचाई के साधन उपलब्ध कराए जाएं, ताकि उनकी फसल बचाई जा सके। फिलहाल, तपती धूप और सूखे खेतों के बीच किसान अपनी मेहनत को बचाने की जंग लड़ रहे हैं।
Location : Gorakhpur
Published : 25 April 2026, 5:18 PM IST
Topics : farmers Gorakhpur Rapti River UP News