उत्तराखण्ड मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता का पैदल मार्च; हाई कोर्ट में ‘नो व्हीकल डे’ पर मजबूत संदेश

उत्तराखंड उच्च न्यायालय में शुक्रवार को ‘नो व्हीकल डे’ मनाते हुए मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता अपने आवास से पैदल न्यायालय पहुंचे। ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने वाले इस अभियान में सभी न्यायाधीश, अधिकारी और अधिवक्ता पैदल यात्रा में शामिल हुए। न्यायालय ने वर्चुअल सुनवाई को बढ़ावा देने और ईंधन खपत कम करने का संदेश भी दिया।

Nainital: उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय में शुक्रवार की सुबह एक अलग ही ऊर्जा के साथ शुरू हुई, जब मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता अपने आवास से न्यायालय तक पैदल पहुंचे।

ईंधन संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए मनाए गए ‘नो व्हीकल डे’ का यह दृश्य न केवल प्रेरक रहा बल्कि न्यायपालिका की संवेदनशीलता का सशक्त उदाहरण भी बन गया।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि मौजूदा राष्ट्रीय परिस्थितियों में ईंधन की बचत सीधे देश को मजबूत बनाने से जुड़ी है। उन्होंने पैदल चलने को केवल फ्यूल से जुड़ी बचत नहीं बल्कि स्वास्थ्य सुधार का महत्वपूर्ण माध्यम बताया और इसे जीवनशैली का हिस्सा बनाने पर जोर दिया। न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल ने तो सभी को प्रतिदिन कुछ दूरी पैदल चलने की आदत डालने की सलाह देते हुए कहा कि यह शरीर और प्रकृति, दोनों के लिए बेहतर विकल्प है।

अन्य न्यायधीश भी रहें शामिल

इस अभियान में वरिष्ठ न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी, न्यायमूर्ति रविन्द्र मैठाणी, न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित, न्यायमूर्ति आलोक मेहरा, न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय, न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह सहित सालसा के सदस्य सचिव प्रदीप मणि त्रिपाठी और उच्च न्यायालय प्रशासन के सभी रजिस्ट्रार, अधिकारी और कर्मचारी पैदल यात्रा में शामिल रहे।

अधिवक्ता भी बड़ी संख्या में पैदल न्यायालय आते-जाते दिखाई दिए, जिससे पूरे परिसर में पर्यावरण अनुकूल पहल की प्रभावी झलक दिखाई दी।

प्रधानमंत्री की अपील

राज्य स्तर पर भी ईंधन बचत मुहिम को तेजी से अपनाया जा रहा है। प्रधानमंत्री की अपील के बाद मुख्यमंत्री, मंत्रियों, अधिकारियों समेत नैनीताल के डीएम, एसएसपी और सीडीओ ने पहले ही नजदीकी मार्ग पैदल तय करने और ‘नो व्हीकल डे’ को व्यवहार में लाने की शुरुआत कर दी है।

इसी क्रम में मुख्य सचिव आर.के. सुधांशु की ओर से सभी विभागों को ईंधन खपत कम करने, साइकिलिंग और कारपूलिंग को बढ़ाने, प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने, स्वदेशी उत्पादों के उपयोग, स्वच्छ ऊर्जा अपनाने तथा सरकारी कार्यप्रणाली में मितव्ययता सुनिश्चित करने संबंधी निर्देश जारी किए गए हैं।

न्यायालय प्रशासन ने अधिवक्ताओं को भी अनावश्यक यात्रा से बचने और यथासंभव वर्चुअल मोड में न्यायिक कार्यवाही में शामिल होने की सलाह देकर इस अभियान को और प्रभावी बनाने की कोशिश की है। मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि यह पहल केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में एक सतत कदम होना चाहिए।

Location :  Nainital

Published :  15 May 2026, 12:54 PM IST

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