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नगर पालिका द्वारा बाहरी वाहनों पर लगाए गए बढ़े हुए शुल्क को लेकर सैलानियों में नाराज़गी बढ़ती जा रही है। हाल ही में एक युवक ने अपने अनुभव को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिये सीधे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तक पहुंचाया।
Uttarakhand: उत्तराखंड की पहाड़ियों में छुट्टियां बिताने पहुंचे पर्यटकों के लिए इस बार नैनीताल की यात्रा कुछ ज्यादा ही महंगी साबित हो रही है। नगर पालिका द्वारा बाहरी वाहनों पर लगाए गए बढ़े हुए शुल्क को लेकर सैलानियों में नाराज़गी बढ़ती जा रही है। हाल ही में एक युवक ने अपने अनुभव को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिये सीधे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तक पहुंचाया, जिसके बाद मामला तेजी से सुर्खियों में आ गया।
युवक का कहना है कि नैनीताल पहुंचते ही उससे माल रोड से गुजरने के लिए 300 रुपये प्रति कार वसूले गए। इतना ही नहीं, अगर पर्यटकों को दोबारा भीमताल की ओर लौटना हो तो समान शुल्क फिर चुकाना पड़ता है। युवक दो कारों के साथ आया था और सिर्फ एक चक्कर में ही उसने 600 रुपये खर्च होने का दावा किया।
इसके अलावा, 500 रुपये प्रति वाहन पार्किंग शुल्क ने खर्चे को और बढ़ा दिया। युवक ने सवाल उठाया कि आखिर ऐसी शुल्क नीति किसके हित में है, क्योंकि इससे पर्यटकों की जेब पर अनावश्यक बोझ पड़ रहा है और लोग धीरे-धीरे नैनीताल आना बंद कर देंगे।
पर्यटकों में मशहूर है नैनी झील
जैसे ही यह पोस्ट वायरल हुई, सोशल मीडिया पर लोगों ने अपनी-अपनी राय रखनी शुरू कर दी। कुछ यूजर्स ने स्थानीय प्रशासन के इस कदम को उचित बताते हुए कहा कि नैनीताल की सीमित क्षमता और बढ़ती भीड़ को देखते हुए वाहनों पर नियंत्रण आवश्यक है। उनका तर्क था कि भारी शुल्क के माध्यम से अनावश्यक वाहन दबाव कम होगा और शहर लगातार लगने वाले जाम से राहत पा सकेगा।
वहीं, कई लोगों ने इसे ‘टूरिस्ट डिस्करेजिंग’ मॉडल बताया और कहा कि परिवार के साथ सफर करने वाले मध्यमवर्गीय लोगों के लिए यह व्यवस्था असहनीय होती जा रही है।
उधर नगर पालिका प्रशासन का कहना है कि नई शुल्क दरें तीन प्रमुख एंट्री पॉइंट्स पर लागू की गई हैं। पहले बाहरी वाहनों से 110 रुपये का प्रवेश शुल्क लिया जाता था, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 300 रुपये कर दिया गया है। जिले में पंजीकृत निजी और व्यावसायिक वाहनों के लिए भी शुल्क 110 रुपये से बढ़ाकर 200 रुपये कर दिया गया है।
नगर पालिका ने कुछ महीने पहले शुल्क संरचना में बदलाव का प्रस्ताव भेजा था, जिसे अब मंज़ूरी के बाद लागू कर दिया गया है। पर्यटकों की बढ़ती शिकायतों के बीच अब सबकी निगाहें मुख्यमंत्री धामी और प्रशासन की ओर टिकी हैं कि क्या आने वाले दिनों में शुल्क व्यवस्था पर कोई राहत देने वाला निर्णय लिया जाएगा।