हिंदी
उत्तराखंड के किसान सुखवंत सिंह ने फेसबुक लाइव में 4 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप लगाकर आत्महत्या कर ली। CM पुष्कर सिंह धामी ने मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए और परिवार को हर संभव सहायता देने का निर्देश जारी किया।
किसान सुखवंत सिंह
Udham Singh Nagar: उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले के काशीपुर निवासी किसान सुखवंत सिंह ने काठगोदाम के एक होटल में आत्महत्या कर दी। घटना से सोशल मीडिया पर हलचल मची और राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा तेज हो गई। सुखवंत सिंह ने मरने से पहले फेसबुक लाइव वीडियो जारी किया और 4 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप कई लोगों पर लगाया। उन्होंने कहा कि पुलिस शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई।
जानकारी के लिए बता दें कि कांग्रेस ने घटना को राज्य सरकार के कुशासन का परिणाम बताया, जबकि भाजपा और प्रशासन ने निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत को मामले की मजिस्ट्रेटी जांच का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच की जाए और किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई हो।
मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव आनंद बर्धन और पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ से विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी। साथ ही प्रभावित परिवार को हर संभव सहायता देने का निर्देश दिया।
पुलिस ने बताया कि घटना के समय सुखवंत सिंह के साथ उनकी पत्नी प्रदीप कौर और 14 साल का बेटा मौजूद थे। रात करीब तीन बजे पत्नी ने देखा कि पति गुस्से में थे। डर के मारे उन्होंने चिल्लाकर बेटे के साथ रिसेप्शन की तरफ भागा। इसी दौरान सुखवंत सिंह ने कमरे का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया और गोली चली।
सरकार ने जांच के लिए सख्त कदम उठाए
नैनीताल के एसएसपी मंजूनाथ टीसी ने बताया कि शव का पोस्टमार्टम डॉक्टरों के पैनल से वीडियोग्राफी के साथ कराया गया। फोरेंसिक टीम ने मौके से सबूत जुटाए।
सुखवंत सिंह ने लाइव वीडियो में बताया कि बक्सौरा गांव में सात एकड़ जमीन दिखाई गई थी, लेकिन रजिस्ट्री किसी और जगह की कर दी गई। इस धोखाधड़ी में उनसे तीन करोड़ नकद और एक करोड़ बैंक के माध्यम से लिए गए। उन्होंने सभी आरोपियों के नाम भी वीडियो में लिए।
Ankita Bhandari Case: रामनगर में उत्तराखंड बंद का असर फेल, CBI जांच की मांग जारी, जानें पूरा मामला
मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश के साथ ही प्रशासन ने आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी। सरकार ने परिवार को न्याय दिलाने और उन्हें हर प्रकार की सहायता देने का आश्वासन दिया।
यह दुखद घटना न केवल किसान समुदाय में चिंता पैदा कर रही है, बल्कि पूरे समाज को सोचने पर मजबूर कर रही है कि कानूनी प्रक्रिया में हुई लापरवाही कभी-कभी जानलेवा साबित हो सकती है।