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रामनगर में अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर रविवार को बुलाए गए उत्तराखंड बंद का असर नहीं दिखा। प्रगतिशील महिला एकता केंद्र और अन्य संगठनों ने लखनपुर चुंगी पर प्रदर्शन कर वीआईपी आरोपी की पहचान और जेल भेजने की मांग की।
अंकिता भंडारी हत्याकांड पर बंद का असर बेअसर
Ramnagar: चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड के खिलाफ लोगों का आक्रोश लगातार बना हुआ है। रविवार को इस मामले को लेकर उत्तराखंड बंद का आह्वान किया गया है। विभिन्न सामाजिक संगठनों के लोगों ने इस बंद का समर्थन किया, लेकिन रामनगर में बंद का असर पूरी तरह बेअसर साबित हुआ। शहर की गलियों और बाजारों में अधिकांश गतिविधियां सामान्य रूप से जारी रहीं।
इसी दौरान, लखनपुर चुंगी पर प्रगतिशील महिला एकता केंद्र के बैनर तले विभिन्न संगठनों ने सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने अंकिता हत्याकांड में शामिल वीआईपी का नाम उजागर कर उसे जेल भेजने की मांग की। सभा में बोलते हुए इंकलाबी मजदूर केंद्र के रोहित रुहेला ने कहा कि दो दिन पूर्व भारी जन भाव के बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री ने इस मामले की सीबीआई जांच कराने की संस्तुति की है।
रोहित रुहेला ने आगे कहा कि मामले की सीबीआई जांच सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश की निगरानी में होनी चाहिए। क्योंकि केंद्र और राज्य में भाजपा की सरकार है और सीबीआई केंद्र की एजेंसी है, इसलिए सरकार पर भी शिकंजा कसना जरूरी है। यदि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच नहीं हुई तो न्याय अधर में लटकेगा।
उन्होंने कहा कि न्याय मिलने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा और लोगों को इस मामले में दबाव बनाए रखना होगा। सभा में मौजूद अन्य प्रदर्शनकारियों ने भी जोर देकर कहा कि अंकिता को न्याय दिलाए बिना आंदोलन समाप्त नहीं होगा।
लखनपुर चुंगी पर किया जोरदार प्रदर्शन
प्रदर्शनकारियों ने लखनपुर चुंगी पर नारेबाजी करते हुए सरकार से वीआईपी आरोपी की गिरफ्तारी और तत्काल जेल भेजने की मांग की। प्रदर्शनकारियों में विभिन्न सामाजिक और महिला संगठनों के सदस्य शामिल थे। रोहित रुहेला ने कहा कि जनभावना के दबाव के बावजूद सरकार द्वारा न्याय प्रक्रिया में देरी और राजनीतिक प्रभाव चिंता का विषय है।
रामनगर के नागरिकों का कहना है कि बंद का असर नहीं होने का कारण लोगों में न्याय के प्रति बढ़ती उम्मीद और आंदोलन के प्रति जागरूकता है। अधिकांश लोग कार्यशील और व्यस्त रहे, लेकिन उनके दिल में न्याय की आवाज़ गूंजती रही।
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इस मामले में राज्य और केंद्र सरकार दोनों पर दबाव बढ़ता जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि जनता की बढ़ती नाराजगी और प्रदर्शन न्यायिक प्रक्रिया को तेज करने में मदद कर सकती है। सीबीआई की जांच की मांग और सुप्रीम कोर्ट निगरानी की मांग को लेकर प्रदर्शनकारियों ने पूरे क्षेत्र में संदेश दिया कि न्याय की राह लंबी और संघर्षपूर्ण होगी।