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कैंची धाम, नैनीताल में नीम करोली बाबा के दरबार के कारण जमीन की कीमतें तेजी से बढ़ीं। पर्यटन और व्यवसायिक गतिविधियों के चलते जमीन 80 लाख से 1 करोड़ प्रति नाली तक बिक रही है। कानूनी जांच के बिना निवेश जोखिम भरा है।
नैनीताल का कैंची धाम बना हाई वैल्यू एरिया (Img- Internet)
Nainital: नैनीताल जिले के कुमाऊं क्षेत्र का प्रसिद्ध धार्मिक स्थल कैंची धाम अब केवल श्रद्धा का केंद्र नहीं रहा, बल्कि यह इलाका रियल एस्टेट के लिहाज से भी सबसे महंगी जमीनों में शामिल हो गया है। नीम करोली बाबा के दरबार में देश और विदेश से लगातार बढ़ती भक्तों की संख्या ने इस क्षेत्र की तस्वीर बदल दी है। पहले शांत तीर्थ माना जाने वाला यह क्षेत्र अब धार्मिक पर्यटन का बड़ा केंद्र बन चुका है, और इसकी वजह से आसपास की जमीनों के दाम रुकने का नाम नहीं ले रहे।
कैंची धाम में नीम करोली बाबा के भक्तों का आकर्षण लगातार बढ़ रहा है। सामान्य दिनों में भी देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु यहां आते हैं, और त्योहार, छुट्टियां या बाबा की स्थापना दिवस पर यह संख्या लाखों तक पहुंच जाती है। लगातार बढ़ती भीड़ ने इस इलाके में होटल, होमस्टे, रेस्टोरेंट, पार्किंग और अन्य सुविधाओं में विस्तार ला दिया है। यही कारण है कि स्थानीय रियल एस्टेट बाजार में तेजी देखने को मिली है।
सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, कैंची धाम के आसपास राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़ी जमीनों का सर्किल रेट लगभग 6,000 रुपये प्रति वर्ग मीटर है, जो नाली के हिसाब से लगभग 12 लाख रुपये बनता है। वहीं, सड़क से कुछ दूरी पर स्थित जमीन का रेट 4,400 रुपये प्रति वर्ग मीटर है। हालांकि स्थानीय लोग बताते हैं कि असल बाजार भाव सरकारी रेट से कहीं अधिक है। वर्तमान में यहां जमीन 80 लाख से 1 करोड़ रुपये प्रति नाली तक बिक रही है। व्यावसायिक क्षेत्रों में यह कीमत और अधिक है।
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कैंची धाम में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। इससे होटल, होमस्टे, पार्किंग स्थल और अन्य व्यवसायिक निर्माणों की मांग में वृद्धि हुई है। सड़क चौड़ीकरण और बेहतर आवागमन ने निवेशकों के लिए इसे और आकर्षक बना दिया है। स्थानीय और बाहरी निवेशक दोनों इस क्षेत्र में जमीन खरीदने में रुचि ले रहे हैं।
नैनीताल सिविल कोर्ट के अधिवक्ता गौरव भट्ट का कहना है कि श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या ने जमीनों को हाई डिमांड में ला दिया है। उन्होंने सलाह दी कि पहाड़ी क्षेत्रों में जमीन खरीदने से पहले कानूनी पहलुओं की पूरी जांच अनिवार्य है।
भट्ट ने बताया कि तहसील कार्यालय में दस्तावेजों की पुष्टि, जमीन की पैमाइश, भूमि उपयोग की स्थिति और स्वामित्व की जांच भविष्य में विवादों से बचने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। थोड़ी सी चूक भी आगे चलकर बड़ी परेशानियां पैदा कर सकती है।
कैंची धाम अब केवल धार्मिक केंद्र नहीं, बल्कि आर्थिक और व्यावसायिक गतिविधियों का भी प्रमुख केंद्र बन गया है। भक्तों की लगातार बढ़ती संख्या और पर्यटन के बढ़ते अवसरों ने इस क्षेत्र की भूमि को बेहद मूल्यवान बना दिया है। निवेशक और स्थानीय लोग इसे विकास और अवसर के नजरिए से देख रहे हैं।
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भट्ट ने आगाह किया कि उच्च कीमतों और निवेश की बढ़ती दौड़ के बीच सावधानी से कदम रखना आवश्यक है। कानूनी जांच, भूमि रिकॉर्ड की पुष्टि और जमीन के वास्तविक मालिक की पहचान के बिना निवेश करना जोखिम भरा साबित हो सकता है।