नदी के बीच बसा ऐसा मंदिर, जहां 90 सीढ़ियां तय करते ही बदल जाती है श्रद्धालुओं की किस्मत

नैनीताल जिले के रामनगर के पास कोसी नदी के बीच स्थित गर्जिया देवी मंदिर में श्रद्धालु आते हैं। यहां 90 सीढ़ियों के रास्ते, भैरव बाबा, प्राचीन मूर्तियां और प्राकृतिक सुंदरता मिलती है, जहां हर मनोकामना पूरी होने की मान्यता है।

Nainital: उत्तराखंड की धरती का जादू कुछ अलग ही है। हिमालय की ठंडक और नदियों की कल-कल में भक्ति की मिठास घुली हुई है। इसी आंचल में नैनीताल जिले के रामनगर से लगभग 15 किलोमीटर दूर सुंदरखाल गांव के पास गर्जिया देवी मंदिर स्थित है, जिसे लोग प्यार से गिरिजा माता कहते हैं।

मंदिर का दृश्य और पहुंच

मंदिर कोसी नदी के बीचों-बीच स्थित ऊंचे टीले पर है। नीले आसमान और बहती नदी की पृष्ठभूमि में मंदिर इतना सुंदर लगता है कि मानो कोई चित्रकार इसे सजाने आया हो। मंदिर तक पहुंचने के लिए लगभग 90 सीढ़ियां चढ़नी होती हैं। हर कदम के साथ श्रद्धालु महसूस करते हैं कि मन हल्का हो रहा है।

मंदिर की प्रतिमाएं और इतिहास

मंदिर में गर्जिया माता की लगभग साढ़े चार फीट ऊंची, शांत और आशीर्वाद देती मूर्ति विराजमान है। साथ ही सरस्वती, गणेश और बटुक भैरव की प्रतिमाएं भी मौजूद हैं। गर्भगृह के कोने में लक्ष्मीनारायण की प्राचीन मूर्ति है, जिसे इतिहासकार दसवीं सदी का बताते हैं।

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जंगलों से जन्मा विश्वास

करीब अस्सी साल पहले यह इलाका घने जंगलों से भरा था। वन विभाग के कर्मचारी जब टीले के पास आए, तो उन्होंने पत्थरों के बीच से एक दिव्य मूर्ति झलकती देखी। तभी से यह टीला पवित्र स्थान बन गया। एक और मान्यता है कि यह टीला किसी पर्वत का हिस्सा था, जो नदी में बहता हुआ रुका और माता ने इसे अपना निवास बना लिया। मंदिर के ठीक नीचे भैरव बाबा का मंदिर भी मौजूद है।

जंगलों में गूंजती गर्जना

स्थानीय बुज़ुर्ग बताते हैं कि जंगलों में पहले शेरों की संख्या अधिक थी। रात ढलते ही शेरों की गर्जना सुनाई देती थी। गिरी महाराज नामक साधु ने इसे माता का संकेत माना और तभी से यह धाम गर्जिया देवी मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

Garjia Devi Temple

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मनोकामनाओं की पूर्ति

स्थानीय मान्यता है कि यहां पहुंचकर मन की उलझनें सुलझती हैं और पुराने रोग कम होने लगते हैं। रोजाना लगभग पांच हजार श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए आते हैं। युवा जोड़े विवाह में बाधाओं को दूर करने के लिए चुनरी चढ़ाते हैं। भैरव बाबा के दर्शन किए बिना माता की कृपा अधूरी मानी जाती है। मंदिर में नारियल, लाल वस्त्र, सिंदूर और दीप चढ़ाने की परंपरा सालों से चली आ रही है।

विशेष पर्व और उत्सव

कार्तिक पूर्णिमा इस मंदिर के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। इस दिन कोसी नदी का तट श्रद्धालुओं से भर जाता है। लोग नदी में स्नान कर मनोकामना मांगते हैं। इसके अलावा गंगा दशहरा, नवदुर्गा, महाशिवरात्रि, उत्तरायणी और वसंत पंचमी पर भी भारी भीड़ उमड़ती है।

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कैसे पहुंचें?

गर्जिया देवी मंदिर सुबह 7 बजे खुलता है और शाम 6 बजे तक खुला रहता है। नज़दीकी एयरपोर्ट पंतनगर है, जो 92 किलोमीटर दूर है। रामनगर रेलवे स्टेशन लगभग 15 किलोमीटर की दूरी पर है। दिल्ली से रामनगर सड़क मार्ग सुगम है और मंदिर आसानी से पहुंचा जा सकता है।

Location : 
  • Nainital

Published : 
  • 20 January 2026, 6:44 PM IST

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