हिंदी
भनियावाला कोठी अटूरवाला स्थित राजकीय इंटर कॉलेज के मैदान में रविवार को अथरवाला सांस्कृतिक मंच की ओर से महाभारत के अत्यंत मार्मिक और वीर रस से भरपूर प्रसंग “चक्रव्यूह” का भव्य मंचन किया गया।
प्रसंग “चक्रव्यूह” का भव्य मंचन
Doiwala: भनियावाला कोठी अटूरवाला स्थित राजकीय इंटर कॉलेज के मैदान में रविवार को अथरवाला सांस्कृतिक मंच की ओर से महाभारत के अत्यंत मार्मिक और वीर रस से भरपूर प्रसंग “चक्रव्यूह” का भव्य मंचन किया गया। गढ़वाली भाषा में संवाद, लोकशैली का अभिनय और प्रभावशाली मंच सज्जा ने हजारों वर्ष पुराने इस ऐतिहासिक प्रसंग को वर्तमान में जीवंत कर दिया। कार्यक्रम के दौरान दर्शक भावविभोर नजर आए और कई की आंखें नम हो गईं।
मंचन में महाभारत युद्ध के तेरहवें दिन की कथा को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया। बताया गया कि कौरवों ने पांडवों की सेना को रोकने के लिए चक्रव्यूह नामक अभेद्य युद्धरचना की थी। इस जटिल रचना को भेदने की विद्या अर्जुन के पुत्र अभिमन्यु को ज्ञात थी, लेकिन उससे सुरक्षित बाहर निकलने का पूरा रहस्य उसे नहीं पता था। इसके बावजूद, जब पांडव सेना संकट में फंस गई, तब युवा अभिमन्यु ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए चक्रव्यूह में प्रवेश करने का निर्णय लिया।
जैसे ही मंच पर अभिमन्यु ने “चक्रव्यूह के द्वार” तोड़ते हुए प्रवेश किया, पूरा मैदान तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। गढ़वाली भाषा में बोले गए संवादों में आत्मविश्वास, मातृभूमि के प्रति समर्पण और वीरता की भावना स्पष्ट झलक रही थी। कलाकारों ने यह भी दर्शाया कि कैसे अभिमन्यु ने द्रोणाचार्य, कृपाचार्य, कर्ण और अश्वत्थामा जैसे महारथियों की सेनाओं से अकेले मुकाबला कर असाधारण शौर्य का परिचय दिया।
Doiwala: भनियावाला कोठी अटूरवाला के राजकीय इंटर कॉलेज मैदान में अथरवाला सांस्कृतिक मंच द्वारा महाभारत के वीर रस से भरपूर प्रसंग “चक्रव्यूह” का भव्य मंचन किया गया। #Doiwala #Chakravyuh #GarhwaliCulture #Mahabharat #CulturalHeritage pic.twitter.com/Q3Zd6xnlIh
— डाइनामाइट न्यूज़ हिंदी (@DNHindi) January 12, 2026
महाभारत के युद्ध नियमों के अनुसार एक योद्धा पर कई योद्धाओं का एक साथ आक्रमण करना अनुचित माना जाता था। मंचन में यह दृश्य अत्यंत करुण था, जब कौरव पक्ष ने युद्ध की मर्यादाओं को तोड़ते हुए निहत्थे हो चुके अभिमन्यु पर सामूहिक हमला किया। उसका वध केवल एक योद्धा की मृत्यु नहीं, बल्कि धर्म और अधर्म के बीच संघर्ष का प्रतीक बनकर सामने आया।
कार्यक्रम के अंत में मंच संचालकों ने कहा कि अभिमन्यु का बलिदान धर्म के लिए दिए गए महानतम बलिदानों में से एक है। यह प्रसंग सिखाता है कि सत्य और कर्तव्य के मार्ग पर चलने वाला व्यक्ति चाहे अकेला ही क्यों न पड़ जाए, उसका साहस और त्याग इतिहास में अमर हो जाता है।
सड़क हादसे से एटा में हड़कंप, आक्रोशित लोगों ने जाम कर किया प्रदर्शन; पढ़ें पूरी खबर
स्थानीय लोगों और छात्र-छात्राओं की भारी उपस्थिति में यह मंचन केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि नई पीढ़ी को भारतीय महाकाव्य महाभारत के आदर्शों, वीरता और नैतिक मूल्यों से जोड़ने का सशक्त माध्यम भी बना।