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डोईवाला नगर पालिका में अस्वीकृत प्रस्तावों पर सभासदों ने धरना प्रदर्शन किया। कांग्रेस सभासदों ने समर्थन किया। विकास कार्यों और पारदर्शिता को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच चर्चा तेज़।
सभासदों ने किया मुख्य द्वार पर धरना
Dehradun: देहरादून के डोईवाला नगर पालिका में सोमवार को अस्वीकृत प्रस्तावों को लेकर कुछ नगर पालिका सभासदों ने पालिका परिषद में धरना प्रदर्शन किया। धरना प्रदर्शन में मुख्य रूप से सभासद संदीप नेगी, प्रदीप नेगी जेटली, हिमांशु राणा और विनीत मनवाल शामिल थे। उन्होंने मुख्य द्वार पर बैठकर अपना विरोध दर्ज कराया और प्रस्तावों को प्राथमिकता देने की मांग की।
सभासद संदीप नेगी ने कहा कि जो प्रस्ताव बोर्ड में स्वीकृत हो चुके हैं, उन्हें अमल में लाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इन प्रस्तावों की अनदेखी की गई तो सभासद आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। इसी तरह, सभासद प्रदीप नेगी ने कहा कि बोर्ड बैठक की उपेक्षा से उनका आक्रोश बढ़ रहा है और अगर जल्द समाधान नहीं हुआ, तो आमरण अनशन जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं।
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वहीं कांग्रेस के नगर पालिका सभासद गौरव मल्होत्रा ने बैठक की प्रोसिडिंग को पारदर्शी बताया। उन्होंने कहा कि जो प्रस्ताव पारित हुए हैं, उन्हें अमल में लाने की प्रक्रिया नगर पालिका को जल्द पूरी करनी चाहिए। गौरव मल्होत्रा ने भाजपा से जुड़े कुछ लोगों पर आरोप लगाया कि वे विकास कार्यों में बाधा डाल रहे हैं और इससे नगर के विकास में रुकावट पैदा हो रही है।
सभासदों का बयान
विशेषज्ञों और नागरिकों का कहना है कि यदि अस्वीकृत प्रस्तावों को समय पर लागू नहीं किया गया, तो इससे डोईवाला नगर की विकास योजनाओं में बाधा आएगी। नागरिकों की अपेक्षा है कि नगर पालिका प्रशासन और सभासद मिलकर पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से प्रस्तावों को लागू करें।
धरना प्रदर्शन के दौरान सभासदों ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य केवल विरोध करना नहीं है, बल्कि नगर पालिका की प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और विकास कार्यों की प्राथमिकता सुनिश्चित करना है। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि उन्हें नियमित रूप से बैठक और प्रस्तावों की जानकारी दी जाए, ताकि भविष्य में ऐसे विवाद टले जा सकें।
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नगर पालिका प्रशासन ने अभी तक इस धरना प्रदर्शन पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि सभी प्रस्तावों पर विचार किया जा रहा है और जल्द ही उन्हें लागू करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
विश्लेषकों के अनुसार, नगर पालिका में इस तरह की असहमति भविष्य में विकास कार्यों में बाधा डाल सकती है। इसके लिए सभासदों और प्रशासन के बीच संवाद और सामंजस्य स्थापित करना आवश्यक है।