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अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर उत्तराखंड में फिर तेज हुआ जनआंदोलन। 13 जिलों में प्रदर्शन, VIP की गिरफ्तारी की मांग। आज CM धामी की प्रेस कॉन्फ्रेंस, CBI जांच के ऐलान की अटकलें।
एक बार फिर सुलगा अंकिता भंडारी मामला
Dehradun: उत्तराखंड में अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर एक बार फिर जनआक्रोश तेज हो गया है। राज्य के 13 जिलों में लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं और लोग एक सुर में कथित 'VIP' का नाम सार्वजनिक करने तथा उसकी गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं। इसी बीच, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा आज प्रेस कॉन्फ्रेंस किए जाने की सूचना ने सियासी हलकों में हलचल बढ़ा दी है।
सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री धामी इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में बहुप्रतीक्षित CBI जांच का ऐलान कर सकते हैं। कांग्रेस समेत विपक्षी दल लंबे समय से इस मामले की केंद्रीय जांच की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि स्थानीय जांच में कई अहम पहलुओं को नजरअंदाज किया गया है और VIP एंगल को दबाने की कोशिश हुई।
अंकिता हत्याकांड पर कांग्रेस का हमला, सरकार पर आरोप: बड़ी मछलियों को बचा रही है भाजपा
कोटद्वार कोर्ट द्वारा अंकिता भंडारी हत्याकांड के तीनों आरोपियों को सजा सुनाए जाने के सात महीने बीत चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद जनता का गुस्सा शांत नहीं हुआ है। लोगों का कहना है कि जब तक इस मामले में कथित VIP की भूमिका की जांच नहीं होती, तब तक न्याय अधूरा रहेगा।
देहरादून से लेकर गढ़वाल और कुमाऊं के कई हिस्सों तक प्रदर्शन जारी हैं। गौरतलब है कि इन आंदोलनों में केवल राजनीतिक दल ही नहीं, बल्कि सामाजिक संगठन, महिला समूह और गैर-राजनीतिक नागरिक मंच भी सक्रिय रूप से शामिल हैं। कहीं नारे लगाए जा रहे हैं, तो कहीं मौन प्रदर्शन के जरिए आक्रोश जताया जा रहा है।
अंकिता भंडारी (Img- Internet)
जहां एक ओर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल सरकार पर VIP को बचाने का आरोप लगा रहे हैं, वहीं सत्ताधारी भाजपा इसे विपक्ष की राजनीतिक सक्रियता बता रही है। सरकार का कहना है कि न्यायिक प्रक्रिया के तहत दोषियों को सजा मिली है और किसी को भी बचाया नहीं गया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी कई बार सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि उनकी सरकार ने किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं है और न ही आगे बख्शा जाएगा। सरकार का दावा है कि वह किसी भी स्तर की जांच से पीछे नहीं हटेगी, बशर्ते कानून और न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान बना रहे।
अब पूरे प्रदेश की निगाहें मुख्यमंत्री की प्रस्तावित प्रेस कॉन्फ्रेंस पर टिकी हैं। यदि CBI जांच का ऐलान होता है, तो यह आंदोलन को नई दिशा दे सकता है। वहीं यदि कोई स्पष्ट घोषणा नहीं होती, तो सड़कों पर चल रहा आक्रोश और तेज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।