नैनीताल में एक ऐसा मंदिर जहां हर मुराद होती है पूरी, जानें पूरी कहानी

नैनीताल जिले में स्थित भीमेश्वर महादेव मंदिर अपनी प्राचीनता और गहरे आध्यात्मिक महत्व के लिए जाना जाता है। कहा जाता है कि इस मंदिर की शुरुआत द्वापर युग में हुई थी और यहां आने वाले भक्त मन की इच्छाएं लेकर पहुंचते हैं।भीमताल झील के पास बसे इस मंदिर की पौराणिक कथाएं आज भी लोगों को आकर्षित करती हैं।

Updated : 16 February 2026, 5:00 PM IST

Nainital:  नैनीताल जिले के भीमताल की ओर बढ़ते हुए जैसे ही पहाड़ों की खामोशी गूंजने लगती है, उसी के बीच एक ऐसा स्थल दिखाई देता है जिसने समय के हर उतार-चढ़ाव को शांत मन से देखा है। इसी शांत माहौल में स्थित है भीमेश्वर महादेव मंदिर, जिसे लेकर मान्यता है कि इसकी शुरुआत द्वापर युग में हुई थी। स्थानीय लोगों का विश्वास है कि इस स्थान का संबंध सीधे तौर पर महाभारत काल से जुड़ा है और पांडवों ने ही यहां शिवलिंग स्थापित किया था।

शिवलिंग की स्थापना

भीमताल झील के बिल्कुल पास बने इस मंदिर को लेकर पीढ़ियों से यह कथन प्रचलित है कि वनवास के दौरान भीम ने भगवान शिव की उपासना के लिए यहां शिवलिंग की स्थापना की थी। माना जाता है कि भगवान शिव के अभिषेक के लिए जल की आवश्यकता होने पर भीम ने भूमि पर अपनी गदा जोर से मारी थी। इस प्रहार से धरती फटी और पानी का स्रोत निकल आया। इसी जल से भगवान शिव का अभिषेक किया गया और समय के साथ यही प्रवाह झील का रूप लेते-लेते भीमताल झील के नाम से प्रसिद्ध हो गया।

मंदिर में सच्चे मन से की गई प्रार्थनाएं

श्रद्धालु आज भी यही मानते हैं कि इस मंदिर में सच्चे मन से की गई प्रार्थनाएं भगवान शिव अवश्य स्वीकार करते हैं। इसलिए पूरे वर्ष देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग यहां दर्शन के लिए आते हैं। सोमवार और शिवरात्रि पर तो मंदिर परिसर में भारी भीड़ उमड़ती है और पूरा वातावरण शिव भक्ति में डूब जाता है।

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शिव मंदिर बनाने का संकल्प

इतिहास में यह भी दर्ज है कि लगभग 17वीं शताब्दी के समय चंद वंश के राजा बाज बहादुर ने इस प्राचीन मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था। उनके द्वारा कराए गए पुनर्निर्माण के बाद मंदिर की संरचना और अधिक सुदृढ़ दिखाई देने लगी और यही स्वरूप आज तक कायम है। किंवदंतियों में यह भी सुनने को मिलता है कि हिमालय क्षेत्र में यात्रा के दौरान भीम को दिव्य संकेत मिला था, जिसके बाद उन्होंने इस पर्वतीय स्थान पर शिव मंदिर बनाने का संकल्प लिया। वही संकल्प आगे चलकर ऐसी आस्था में बदल गया जिसने सदियों से इस स्थान को लोगों की भावनाओं और विश्वास से जोड़े रखा है।

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नियमित अंतराल पर टैक्सियाँ और बसें

बता दे कि यह मंदिर नैनीताल से 22 किमी और हल्द्वानी से 23 किमी की दूरी पर स्थित है। इन शहरों से नियमित अंतराल पर टैक्सियाँ और बसें चलती हैं। वहीं भीमताल शहर के मुख्य केंद्र से मंदिर लगभग 2.5 किमी की दूरी पर है।

Location : 
  • नैनीताल

Published : 
  • 16 February 2026, 5:00 PM IST