यमुना एक्सप्रेसवे हादसे ने उजाड़ा परिवार! पिता-पुत्र की मौत, सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता का शव गांव पहुंचा तो मचा कोहराम

यमुना एक्सप्रेसवे पर हुए भीषण सड़क हादसे में महराजगंज के सवरेजी गांव निवासी सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता रितेश पांडेय और उनके बेटे की मौत हो गई। मंगलवार को शव गांव पहुंचते ही परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों के मुताबिक रितेश ने पत्नी की मौत के बाद अकेले दोनों बेटों की परवरिश की थी।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 1 September 2026, 3:48 PM IST
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Maharajganj: रविवार देर रात यमुना एक्सप्रेसवे पर हुआ एक भीषण सड़क हादसा महराजगंज के सवरेजी गांव के एक परिवार के लिए जिंदगी भर का दर्द छोड़ गया। हादसे में पिता-पुत्र की मौत की खबर जैसे ही गांव पहुंची, हर तरफ सन्नाटा पसर गया। मंगलवार को जब सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता रितेश पांडेय का शव एंबुलेंस से उनके पैतृक गांव पहुंचा तो माहौल अचानक चीख-पुकार में बदल गया। जिस घर में अपनों के लौटने का इंतजार था, वहां एक पिता का शव पहुंचा तो परिवार का कलेजा फट पड़ा।

पोस्टमार्टम के बाद करीब दो बजे रितेश पांडेय का शव सवरेजी गांव पहुंचा। शव देखते ही परिजन बेसुध हो गए। रिश्तेदारों और गांव के लोगों की भीड़ जुटने लगी और हर तरफ मातम का माहौल बन गया। हादसे ने परिवार को ऐसा सदमा दिया है कि किसी को समझ नहीं आ रहा कि अचानक सब कुछ इतना बदल कैसे गया।

सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता थे रितेश पांडेय

रितेश पांडेय की उम्र करीब 50 वर्ष बताई जा रही है। वह पेशे से सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता थे। लंबे समय से दिल्ली में रहकर वकालत कर रहे रितेश ने अपनी जिंदगी का बड़ा हिस्सा परिवार और बच्चों के भविष्य को संवारने में लगा दिया था। परिजनों के मुताबिक वर्ष 2004 के आसपास वह अपने दोनों बेटों के साथ दिल्ली चले गए थे। इसके बाद दिल्ली में रहकर उन्होंने वकालत शुरू की और धीरे-धीरे अपनी पहचान बनाई। शुरुआत में परिवार किराए के मकान में रहा, लेकिन करीब डेढ़ वर्ष पहले रितेश ने अपना निजी मकान भी बनवाया था।

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पत्नी की मौत के बाद अकेले बच्चों को पाला

रितेश पांडेय की जिंदगी में पहले भी एक बड़ा दुख आया था। उनकी पत्नी का वर्ष 2002 में हार्ट अटैक के चलते निधन हो गया था। उस समय परिवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती दोनों बच्चों की परवरिश थी। पत्नी के निधन के बाद रितेश ने दोनों बेटों की जिम्मेदारी अकेले संभाली। उन्होंने बच्चों को पढ़ाया-लिखाया और उनके भविष्य को बेहतर बनाने के लिए लगातार मेहनत की। करीब चार वर्ष बाद वह दोनों बेटों के साथ दिल्ली चले गए और वहीं रहकर परिवार की जिंदगी को आगे बढ़ाया।

एक बेटा अमेरिका में इंजीनियर, दूसरा हादसे के बाद सदमे में

रितेश पांडेय के बड़े बेटे अभिसार पांडेय अमेरिका में इंजीनियर की नौकरी करते हैं। परिवार के मुताबिक करीब डेढ़ वर्ष पहले ही उन्होंने अमेरिका में इंजीनियर के तौर पर काम शुरू किया था। वहीं छोटे बेटे आयुष पांडेय हादसे के बाद गहरे सदमे में हैं। परिजनों के मुताबिक उनकी मानसिक स्थिति ऐसी है कि वह किसी को पहचान तक नहीं पा रहे हैं। अचानक पिता को खोने का सदमा उनके लिए बेहद भारी साबित हुआ है। बहन पुष्पांजलि पांडेय का भी रो-रोकर बुरा हाल है। मंगलवार को जैसे ही रितेश का शव घर पहुंचा, परिवार के लोगों का धैर्य जवाब दे गया।

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पहले छह महीने में गांव आते थे

रितेश पांडेय का अपने पैतृक गांव सवरेजी से लगाव बना हुआ था। उनके मामा के बेटे बृहस्पति मिश्रा, निवासी लक्ष्मीगंज, बड़हरा बाबू, मौनही, कुशीनगर ने बताया कि रितेश पहले करीब छह महीने में एक बार गांव आते थे। हालांकि पिछले करीब एक वर्ष में उनका गांव आना-जाना काफी बढ़ गया था। वह लगभग हर दो महीने में सवरेजी पहुंचने लगे थे। गांव के लोगों और रिश्तेदारों से उनका लगातार संपर्क बना हुआ था।

हादसे की खबर ने मचा दी थी खलबली

रविवार देर रात यमुना एक्सप्रेसवे के जेवर थाना क्षेत्र में हुए हादसे की खबर सामने आने के बाद महराजगंज में उनके परिवार और रिश्तेदारों के बीच खलबली मच गई। जैसे-जैसे हादसे में पिता-पुत्र की मौत की जानकारी स्पष्ट हुई, परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। रिश्तेदारों और गांव के लोगों ने परिवार को संभालने की कोशिश की, लेकिन अपनों को खोने का दर्द इतना बड़ा था कि किसी के पास कहने के लिए शब्द नहीं थे। मंगलवार को पोस्टमार्टम के बाद जब रितेश पांडेय का शव गांव पहुंचा तो बड़ी संख्या में लोग अंतिम दर्शन के लिए जुट गए।

Location :  Maharajganj

Published :  1 September 2026, 3:48 PM IST

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