नोएडा में मजदूरों की हड़ताल के पीछे किसकी साजिश? बाहर वालों ने व्हाट्सऐप से भड़काई भीड़! नोएडा पुलिस का बड़ा खुलासा

नोएडा हिंसा की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है कि प्रदर्शन के दौरान बाहरी तत्वों ने माहौल बिगाड़ा। व्हाट्सऐप ग्रुप और संगठित साजिश के जरिए भीड़ को उकसाया गया। पुलिस जांच जारी है और सरकार सख्त एक्शन के मूड में है।

Post Published By: Mayank Tawer
Updated : 14 April 2026, 8:35 AM IST
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Noida News: नोएडा और ग्रेटर नोएडा में सोमवार को भड़की हिंसा अब सिर्फ मजदूरों के गुस्से की कहानी नहीं रह गई है, बल्कि इसके पीछे एक सुनियोजित साजिश की आशंका जताई जा रही है। पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि आगजनी और तोड़फोड़ करने वाले कई लोग असली कर्मचारी नहीं थे, बल्कि भीड़ में शामिल बाहरी उपद्रवी थे, जिन्होंने हालात को जानबूझकर बिगाड़ा।

पुलिस का बड़ा खुलासा: कर्मचारी नहीं, बाहरी उपद्रवी थे शामिल

गौतमबुद्धनगर की पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने बताया कि पूरा मामला एक गहरी साजिश की ओर इशारा करता है। उनके मुताबिक, जब प्रशासन और कर्मचारियों के बीच बातचीत के बाद हालात शांत हो चुके थे, तभी अचानक कुछ समूह सामने आए और उन्होंने हिंसा शुरू कर दी। ये लोग आसपास के गांवों से आए थे और इनका मकसद माहौल को बिगाड़ना था।

व्हाट्सऐप ग्रुप और QR कोड से भड़काई गई भीड़

जांच में यह भी सामने आया है कि प्रदर्शन को उग्र बनाने के लिए रातों-रात कई व्हाट्सऐप ग्रुप बनाए गए। QR कोड के जरिए कर्मचारियों को इन ग्रुप्स से जोड़ा गया और उन्हें हिंसा के लिए उकसाया गया। पुलिस का मानना है कि यह पूरी कार्रवाई बेहद संगठित तरीके से की गई थी, ताकि आंदोलन को भटका कर हिंसक बनाया जा सके।

200 से ज्यादा हिरासत में, जांच जारी

पुलिस ने अब तक 200 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया है और उनसे पूछताछ की जा रही है। यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि इनमें असली कर्मचारी कितने हैं और बाहरी लोग कितने। साथ ही यह भी जांच हो रही है कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे कौन से संगठन या समूह सक्रिय थे।

बिना लीडर के आंदोलन, अचानक बढ़ती भीड़ बनी वजह

सूत्रों के मुताबिक, पिछले चार दिनों से चल रहे इस प्रदर्शन का कोई स्पष्ट नेता नहीं था। अलग-अलग कंपनियों के कर्मचारी इकट्ठा होते और भीड़ बढ़ती जाती। यही स्थिति धीरे-धीरे नियंत्रण से बाहर हो गई। बातचीत के दौरान भी कई कर्मचारियों ने खुद को नेता मानने से इनकार कर दिया था।

सरकार का दावा: पहले ही बन चुकी थी सहमति

राज्य सरकार का कहना है कि कर्मचारियों की मांगों पर पहले ही सहमति बन गई थी। हालांकि कुछ कर्मचारियों का आरोप है कि इस सहमति में उद्योग मालिकों की भागीदारी नहीं थी, इसलिए यह अधूरी थी। मजदूरों का कहना है कि जब तक न्यूनतम वेतन, ओवरटाइम और कार्य घंटों जैसे मुद्दों पर ठोस फैसला नहीं होगा, आंदोलन जारी रहेगा।

कर्मचारियों की नाराजगी: कम वेतन, ज्यादा काम

कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें 10 से 12 हजार रुपए महीने में 12 घंटे तक काम कराया जाता है। ओवरटाइम का भुगतान नहीं किया जाता और काम का दबाव अलग रहता है। महंगाई के दौर में इतनी कम सैलरी में गुजारा मुश्किल हो रहा है, जिससे उनका गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है।

सरकार और प्रशासन एक्शन मोड में

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि श्रमिकों को सम्मानजनक वेतन मिले और औद्योगिक क्षेत्रों में शांति बनाए रखने के लिए हर जरूरी कदम उठाया जाए। हाई लेवल कमेटी जांच में जुटी है और जल्द रिपोर्ट आने की उम्मीद है।

Location :  Noida

Published :  14 April 2026, 8:35 AM IST

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