इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में फीस बढ़ी और सीटें घटी तो छात्रों ने उठाया बड़ा कदम, खून से राष्ट्रपति को लिखी चिट्ठी

इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय में फीस वृद्धि, सीटों में कटौती और नई लाइब्रेरी खोलने समेत कई मांगों को लेकर छात्र 10 जुलाई से आंदोलन कर रहे हैं। अब छात्रों ने अपने रक्त से राष्ट्रपति को पत्र लिखकर विश्वविद्यालय की समस्याओं और प्रशासन के रवैये से अवगत कराया...

Post Published By: Mayank Tawer
Updated : 16 September 2026, 1:33 AM IST
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Prayagraj News: इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय में फीस वृद्धि, सीटों में कटौती और नई लाइब्रेरी खोलने समेत कई मांगों को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार जारी है। 10 जुलाई से आंदोलन कर रहे छात्रों ने अब अपनी मांगों को राष्ट्रपति तक पहुंचाने के लिए अनोखा तरीका अपनाया। छात्रों ने अपने रक्त से राष्ट्रपति को पत्र लिखकर विश्वविद्यालय में फीस बढ़ोतरी, सीटों में कटौती और अन्य समस्याओं से अवगत कराया। साथ ही छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर आंदोलन को दबाने के लिए निलंबन और मुकदमे दर्ज कराने का आरोप लगाया है। छात्रों का कहना है कि लगातार आंदोलन के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं कर रहा है। इसी के विरोध में छात्रों ने राष्ट्रपति को रक्त से पत्र लिखकर मामले में हस्तक्षेप करने और उचित निर्णय लेने का अनुरोध किया।

फीस वृद्धि और सीटों की कटौती का विरोध

छात्रों के मुताबिक इलाहाबाद विश्वविद्यालय में हर वर्ष फीस में बढ़ोतरी की जा रही है। इसके अलावा सीटों में कटौती किए जाने का भी आरोप है। छात्रों का कहना है कि इन फैसलों का सीधा असर विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले और प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों पर पड़ रहा है। छात्र लंबे समय से फीस वृद्धि और सीटों में कटौती को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। इसके साथ ही विश्वविद्यालय की नई लाइब्रेरी खोलने समेत अन्य छात्र हित से जुड़े मुद्दों को भी आंदोलन में शामिल किया गया है।

प्रशासन पर लगाया दमन का आरोप

आंदोलन कर रहे छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि छात्रों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय प्रशासन आंदोलन को दबाने की कोशिश कर रहा है। छात्रों ने आरोप लगाया कि आंदोलन में शामिल विद्यार्थियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की जा रही है और मुकदमे भी दर्ज करवाए जा रहे हैं। छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन को बातचीत के जरिए समस्याओं का समाधान करना चाहिए, लेकिन उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं की जा रही है। इसी वजह से अब उन्होंने अपनी बात राष्ट्रपति तक पहुंचाने का फैसला किया।

कुलपति को लेकर भी राष्ट्रपति से की मांग

राष्ट्रपति को लिखे पत्र में छात्रों ने विश्वविद्यालय की कुलपति संगीता श्रीवास्तव पर भी आरोप लगाए हैं। छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय में उनके कार्यकाल के दौरान कथित तौर पर छात्रों के साथ तानाशाहीपूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है। छात्रों ने राष्ट्रपति से मामले का संज्ञान लेने और वर्तमान कुलपति को दोबारा कुलपति के पद पर नियुक्त नहीं करने की मांग की है। छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय में छात्र हितों से जुड़े मुद्दों पर उचित निर्णय लिया जाना जरूरी है।

आंदोलन जारी रखने का ऐलान

छात्रनेता आशुतोष मौर्य और अनुराग यादव ने संयुक्त बयान जारी करते हुए कहा कि फीस वृद्धि और सीटों में कटौती को जब तक नहीं रोका जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। दोनों छात्र नेताओं ने राष्ट्रपति से मामले में हस्तक्षेप करने और वर्तमान कुलपति को दोबारा कुलपति नियुक्त नहीं करने का अनुरोध किया। छात्र नेताओं ने कहा कि उनकी लड़ाई छात्र हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर है और मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखा जाएगा।

कई छात्र रहे मौजूद

रक्त पत्र लिखे जाने के दौरान छात्रनेता आशुतोष मौर्य, अनुराग यादव, गौरव गोंड, प्रियांशु, आयुष, दीपांश, अंश यादव, अश्वनी मौर्य, ऋषि बाबा और मंदीप समेत कई छात्र मौजूद रहे। छात्रों के इस कदम के बाद एक बार फिर इलाहाबाद विश्वविद्यालय में फीस वृद्धि, सीटों की कटौती और प्रशासन के रवैये को लेकर चल रहा विवाद चर्चा में आ गया है। अब छात्रों की नजर विश्वविद्यालय प्रशासन की अगली कार्रवाई और उनकी मांगों पर होने वाले फैसले पर है।

Location :  Prayagraj

Published :  16 September 2026, 1:33 AM IST

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