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रात करीब 12:30 बजे घर लौट रहे थे विवेक (Source: Pinterest)
Lucknow: आठ साल पुराने एप्पल कंपनी के एरिया सेल्स मैनेजर विवेक तिवारी हत्याकांड में अदालत के फैसले के बाद एक बार फिर उस रात की कहानी चर्चा में है। कोर्ट ने बर्खास्त सिपाही प्रशांत चौधरी को गैर इरादतन हत्या का दोषी करार दिया, जबकि साथ मौजूद सिपाही संदीप कुमार को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। अब विवेक की पत्नी कल्पना ने फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत जाने की बात कही है।
29 सितंबर 2018 की रात विवेक तिवारी अपनी सहकर्मी सना के साथ SUV से घर लौट रहे थे। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, इसी दौरान दो पुलिसकर्मियों ने उनकी गाड़ी को रोकने की कोशिश की।
सना के बयान के अनुसार, पुलिसकर्मियों ने अपनी बाइक SUV के सामने लगा दी थी। एक पुलिसकर्मी ने गाड़ी पर डंडा भी मारा। इससे वह घबरा गईं। विवेक ने वहां से निकलने के लिए गाड़ी को किनारे से निकालने की कोशिश की।
चश्मदीद सना के अनुसार, विवेक की SUV पुलिसकर्मियों की बाइक से टकरा गई। इसके बाद करीब दो मीटर की दूरी से गोली चलने की बात सामने आई।
गोली लगने के बावजूद विवेक ने गाड़ी चलाकर वहां से निकलने की कोशिश की। बाद में उनकी SUV शहीद पथ अंडरपास के पास अनियंत्रित होकर खंभे से टकरा गई। वाहन के तकनीकी निरीक्षण में उसकी रफ्तार 60 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक होने की बात सामने आई थी।
घटना के बाद विवेक को इलाज के लिए राम मनोहर लोहिया अस्पताल ले जाया गया। उपलब्ध मेडिकल रिकॉर्ड के मुताबिक उन्हें रात 2:05 बजे अस्पताल में भर्ती कराया गया था और 2:25 बजे उनकी मौत हो गई।
सना ने बाद में आरोप लगाया था कि विवेक को अस्पताल पहुंचाने में देरी हुई। हालांकि, इस मामले में सामने आए अलग-अलग बयानों और जांच के तथ्यों को अदालत में पेश साक्ष्यों के संदर्भ में देखा गया।
विवेक तिवारी की मौत के मामले में करीब आठ साल तक सुनवाई चली। 17 सितंबर 2026 को लखनऊ की जिला एवं सत्र अदालत ने बर्खास्त सिपाही प्रशांत चौधरी को IPC की धारा 304(II) के तहत गैर इरादतन हत्या का दोषी माना। वहीं, दूसरे आरोपी सिपाही संदीप कुमार को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया।
प्रशांत चौधरी की सजा की अवधि पर अदालत 21 सितंबर को सुनवाई करेगी। यानी अभी दोषसिद्धि के बाद सजा की मात्रा तय होना बाकी है।
फैसले के बाद विवेक की पत्नी कल्पना ने असंतोष जताया। उन्होंने कहा कि आठ साल तक न्याय की लड़ाई लड़ने के बाद भी वह इस फैसले से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि वह अपने बच्चों को इस फैसले के बारे में क्या जवाब देंगी।
कल्पना ने यह भी सवाल उठाया कि जब प्रशांत चौधरी को दोषी माना गया है तो उसके साथ मौजूद संदीप कुमार को किस आधार पर बरी किया गया। उन्होंने फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती देने की बात कही है।
इस तरह आठ साल बाद अदालत का फैसला आने के बावजूद विवेक तिवारी केस की कानूनी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। अब निगाहें प्रशांत चौधरी की सजा और परिवार की प्रस्तावित अपील पर रहेंगी।
Location : Lucknow
Published : 18 September 2026, 3:25 PM IST