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गंगा सप्तमी के अवसर पर शनिवार को श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिली है। पढ़िये डाइनामाइट न्यूज़ की पूरी रिपोर्ट
वाराणसी के घाटों पर गंगा सप्तमी की रौनक
वाराणसी: गंगा सप्तमी के अवसर पर शनिवार को उत्तर प्रदेश के वाराणसी के दशाश्वमेध घाट पर श्रद्धालुओं ने पवित्र डुबकी लगाई। मान्यता है कि इस दिन गंगा नदी में स्नान करने से कई जन्मों के पाप धुल जाते हैं और श्रद्धालुओं को पुण्य की प्राप्ति होती है।
डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के मुताबिक, भगीरथ की तपस्या के बाद ब्रह्मा के कमंडल से मां गंगा के प्रकट होने के उपलक्ष्य में वाराणसी में गंगा सप्तमी मनाई जाती है। इस खास दिन श्रद्धालु पवित्र स्नान करते हैं, उसके बाद सूर्य को अर्घ्य देकर पूजा अर्चना करते हैं। बता दें कि, इस दिन गंगा घाटों पर खास तैयारियां की जाती हैं। सुबह के समय में भक्त गंगा नदी में स्नान करने आते हैं।
श्रद्धालु इस दिन पवित्र स्नान करते हैं, जिसके बाद सूर्य को अर्घ्य देकर और घाटों पर दुग्धाभिषेक करते हैं। इस तरह से पूजा करते हैं। इसी के चलते गंगा घाटों पर खास तैयारियां की जाती हैं। सुबह के समय श्रद्धालु गंगा नदी पहुंचते हैं, जिसके बाद सभी लोग बाबा विश्वनाथ मंदिर में पूजा पाठ करने जाते हैं। इस तरह से पूजा अर्चना करके परिवार के लिए प्रार्थना करते हैं।
मिली जानकारी के मुताबिक, यहां की मान्यता है कि यहां बहने वाली नदी उत्तरवाहिनी गंगा है और काशी को मोक्ष का प्रवेश द्वार माना जाता है। इसलिए यहां की खास मान्यता यही है कि यहां का जल बाहर नहीं जाता। वही दुनिया का सबसे बड़ा महाश्मशान काशी में है। यहां लोग पितरों के लिए दान के लिए आते हैं। गंगा सप्तमी पर लोग यहां दूर-दूर से आते हैं। घाटों को सजाया जाता है।
पूजा करने के बाद एक विशेष आरती की जाती है। तीर्थ पुरोहितों ने भी ऐसी जानकारी दी है। वैशाख माह में गंगा सप्तमी का पर्व काशीवासियों के बीच खास महत्व रखता है। मान्यता है कि यहां पर गंगा स्नान करने से पाप धुल जातेहैं। इतना ही नहीं, यहां स्नान करने के बाद यदि आप कुछ मांगतेहैं तो वह दुआ भी पूरी होती है। वैशाख माह में गंगा सप्तमी का व्रत करने से एक महीने का फल मिलता है। रोग दूर होते हैं। सबसे पहले लोग मां गंगा में डुबकी लगाते हैं।