करोड़ों उपभोक्ताओं को बड़ा झटका या सिर्फ अफवाह? बिजली दरों में अचानक उछाल के पीछे का क्या है वो ‘सरप्लस’ सच!

उत्तर प्रदेश में एनपीसीएल का 'सरप्लस' फंड ₹1500 करोड़ से घटाकर ₹593 करोड़ करने के फैसले से बिजली दरें बढ़ने का बड़ा खतरा पैदा हो गया है। इस वित्तीय बदलाव के खिलाफ उपभोक्ता परिषद ने नियामक आयोग में आपत्ति जताई है और मुख्यमंत्री से दखल देकर ट्रिब्यूनल जाने की मांग की है।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 20 June 2026, 10:14 AM IST
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Lucknow: उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं को मिलने वाली राहत पर अब कॉरपोरेट और रेगुलेटरी फैसलों की नजर लग गई है। जो मामला ऊपरी तौर पर सिर्फ 'बिजली दरें बढ़ने की आशंका' दिख रहा है, वह असल में बिजली कंपनियों (Discoms) का एक ऐसा वित्तीय चक्रव्यूह है, जिसके जाल में प्रदेश के साढ़े तीन करोड़ उपभोक्ता फंसने वाले हैं। आइए इस पूरे खेल को एक नए नजरिए से समझते हैं।

₹51,000 करोड़ का वो 'कवच', जिसे तोड़ने की तैयारी है

अब तक उत्तर प्रदेश के उपभोक्ता सुरक्षित थे क्योंकि उनका बिजली कंपनियों पर 51,000 करोड़ रूपए का सरप्लस (अधिशेष धन) जमा था। यह जनता का वो पैसा है जो कंपनियों ने ज्यादा वसूला था और इसी के दबाव में वे पिछले कई सालों से दरें बढ़ाने की हिम्मत नहीं कर पा रही थीं।

  • नया पैंतरा: नोएडा पॉवर कंपनी लिमिटेड (NPCL) ने कानूनी दांव-पेंच खेलकर अपने ₹1500.63 करोड़ के सरप्लस को कागजों पर घटवाकर मात्र  593.81 करोड़ करा लिया।

  • खतरा: यह सिर्फ एक कंपनी का मामला नहीं है। एनपीसीएल के इस फॉर्मूले को ढाल बनाकर अब राज्य की बाकी सरकारी और निजी बिजली कंपनियां भी अपने सरप्लस को कम करने का खेल शुरू करेंगी। जैसे ही यह ₹51 हजार करोड़ का कवच टूटेगा, दरों में बेतहाशा बढ़ोतरी का रास्ता साफ हो जाएगा।

नोएडा मॉडल: पहले 10% की छूट छीनी, अब महंगी बिजली की बारी

इस पूरे खेल का पहला शिकार नोएडा और ग्रेटर नोएडा के ढाई लाख उपभोक्ता बने हैं। अब तक मिल रही 10 फीसदी की सीधी छूट अब खत्म होने की कगार पर है क्योंकि कंपनी ने कागजों पर खुद को 'कम मुनाफे' में दिखा दिया है।  उपभोक्ताओं के लिए यह दोहरी मार है; एक तरफ छूट जाएगी और दूसरी तरफ नया टैरिफ लागू कर बिल में सीधे बढ़ोतरी की जाएगी।

'स्मार्ट मीटर' का टॉर्चर और कंपनियों की जेब भरने की जिद

इस नए एंगल में सबसे बड़ा विरोधाभास यह है कि एक तरफ जनता पहले से ही तकनीकी खामियों वाले स्मार्ट मीटरों की ओवरबिलिंग (ज्यादा बिल आने) से त्रस्त है, वहीं दूसरी तरफ कंपनियां विनियामक आयोग (Regulatory Commission) के जरिए कानूनी मुकदमों का खर्च भी उपभोक्ताओं के बिल में जोड़ रही हैं। यानी "कंपनियां जनता के पैसे से जनता के ही खिलाफ मुकदमा लड़ती हैं, और फिर सरप्लस घटाकर उन्हीं की जेब पर दोबारा डाका डालती हैं।"

सीएम का दखल और ट्रिब्यूनल की जंग

इस बड़े संस्थागत खेल को भांपते हुए राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने मोर्चा खोल दिया है। मामला अब सीधे मुख्यमंत्री के दरबार में है। मांग यह है कि सरकार खुद नियामक आयोग के इस जनविरोधी फैसले के खिलाफ तत्काल अपीलीय न्यायाधिकरण (Tribunal) में मुकदमा दर्ज करे।

अगर सरकार ने समय रहते इस 'सरप्लस घटाओ खेल' को नहीं रोका, तो आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश का हर घर बिजली के भारी-भरकम बिल के अंधेरे में डूबने को मजबूर हो जाएगा।

Location :  Lucknow

Published :  20 June 2026, 10:14 AM IST

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