गुप्त संपत्तियों पर गहराया सस्पेंस: 5000 कर्मचारियों की एक गलती और बंद हो गया वेतन… अब क्या होगा अगला कदम?

लखनऊ में मानव संपदा पोर्टल पर चल-अचल संपत्ति का ब्योरा न देने वाले करीब 5,000 राज्यकर्मियों (मुख्यतः समूह ग और घ) का वेतन मार्च से रुका हुआ है। अब कार्मिक विभाग ने सभी विभागाध्यक्षों को इन कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई करने और रिपोर्ट शासन को सौंपने के सख्त निर्देश दिए हैं।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 20 June 2026, 9:10 AM IST
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Lucknow: उत्तर प्रदेश के सरकारी महकमों में इन दिनों एक बड़े सस्पेंस और हड़कंप का माहौल है। राज्य सरकार की लाख चेतावनियों के बावजूद अपनी चल-अचल संपत्ति का ब्योरा छिपाने वाले कर्मचारियों पर अब शासन का डंडा चलने जा रहा है। मानव संपदा पोर्टल पर अपनी संपत्ति की जानकारी अपलोड न करने वाले करीब 5000 कर्मचारियों को अब गंभीर विभागीय कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। चौंकाने वाली बात यह है कि इन डिफॉल्टर कर्मचारियों को पिछले चार महीनों से वेतन भी नहीं मिला है, जिससे उनके सामने बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

विभागाध्यक्षों को सख्त आदेश, शासन ने मांगी रिपोर्ट

कार्मिक विभाग द्वारा जारी नए शासनादेश ने इस मामले में सस्पेंस और बढ़ा दिया है। शासन ने सभी विभागाध्यक्षों को दोटूक निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने विभागों में संपत्ति का ब्योरा न देने वाले कर्मचारियों के खिलाफ तत्काल अनुशासनात्मक और विभागीय कार्रवाई शुरू करें। इसके साथ ही इस कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट शासन को भेजने के लिए कहा गया है, ताकि इन कर्मचारियों का अटका हुआ वेतन जारी करने पर अंतिम निर्णय लिया जा सके।

ज्यादातर समूह 'ग' और 'घ' के कर्मचारी शामिल

एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के मुताबिक, संपत्ति का ब्योरा पोर्टल पर दर्ज न करने वालों में सबसे बड़ी संख्या समूह 'ग' (Group C) और समूह 'घ' (Group D) के कर्मचारियों की है। मार्च महीने से वेतन रुकने के कारण अब इन कर्मचारियों की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। शासन का मानना है कि इतनी लंबी मोहलत के बाद भी ब्योरा न देना कहीं न कहीं जानबूझकर जानकारियों को छिपाने की कोशिश है।

डेडलाइन और अंतिम अवसर को भी किया नजरअंदाज

नियमों के मुताबिक, सभी राज्यकर्मियों को 31 जनवरी 2026 तक अपनी संपत्ति का ब्योरा हर हाल में देना था। इस तय समयसीमा तक 47,816 कर्मचारियों ने डेटा फीड नहीं किया। इसके बाद शासन ने नरमी दिखाते हुए 10 मार्च 2026 तक का आखिरी मौका (अंतिम अवसर) भी दिया, लेकिन इसके बावजूद करीब 5,000 कर्मियों ने इसे पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया।

कड़े दंड का प्रावधान: रुक सकती है तरक्की

इस लापरवाही के लिए केवल वेतन रोकना ही काफी नहीं है, बल्कि शासन ने इन कर्मचारियों के खिलाफ चौतरफा दंडात्मक कार्रवाई का चक्रव्यूह तैयार किया है। दोषी कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच तो होगी ही, साथ ही चालू चयन वर्ष में उनकी पदोन्नति (Promotion) पर रोक लगा दी जाएगी। इसके अलावा उन्हें एसीपी (ACP) का लाभ भी नहीं मिलेगा। यदि कोई कर्मचारी विदेश यात्रा या प्रतिनियुक्ति (Deputation) पर जाना चाहता है, तो उसे विजिलेंस क्लियरेंस भी नहीं दी जाएगी।

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भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति

शासन के सूत्रों के अनुसार, इस कड़े कदम के पीछे मुख्य उद्देश्य सरकारी तंत्र में पारदर्शिता लाना और आय से अधिक संपत्ति के मामलों पर अंकुश लगाना है। जो कर्मचारी ब्योरा देने से बच रहे हैं, उनके बैंक खातों और अचल संपत्तियों की गोपनीय जांच के लिए विजिलेंस टीम को भी सक्रिय किया जा सकता है।

Location :  Lucknow

Published :  20 June 2026, 9:10 AM IST

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