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Lucknow: उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव 2027 में भले ही वक्त हो, लेकिन सूबे की सियासत का तापमान सातवें आसमान पर है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने सियासी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। सवाल सिर्फ जीत-हार का नहीं, बल्कि वोट बैंक के नए समीकरणों और खिसकते आधार को साधने का है।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) एक बार फिर सत्ता वापसी के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। पार्टी का पूरा फोकस महिला, युवा, किसान, अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और लाभार्थी वर्ग पर है। सरकारी योजनाओं के जरिए जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत कर भगवा दल हर वर्ग को अपने पाले में करने की रणनीति पर काम कर रहा है।
वहीं, विपक्षी दल भी मैदान छोड़ने के मूड में नहीं हैं। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने बेरोजगारी, महंगाई, आरक्षण, जातीय जनगणना और सामाजिक न्याय जैसे तीखे मुद्दों के साथ सरकार को घेरने का चक्रव्यूह तैयार किया है। सपा का 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समीकरण और कांग्रेस का सामाजिक न्याय का एजेंडा इसी बड़ी सियासी रणनीति का अहम हिस्सा है।
डाइनामाइट न्यूज़ स्टूडियो रूम में एग्जीक्यूटिव एडिटर सुभाष रतूड़ी ने जब उत्तर प्रदेश के चुनावी माहौल को समझने के लिए जमीनी संवाददाताओं से चर्चा की, तो धरातल की असल तस्वीर सामने आ गई। सिद्धार्थनगर के संवाददाता ने बताया कि जनपद में पलायन, बदहाल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं सबसे बड़े नासूर बने हुए हैं। इसके अलावा, खुले में घूम रहे आवारा पशुओं के कारण आए दिन सड़क हादसे होना और फसलों का नुकसान होना आम जनता की बड़ी पीड़ा है।
दूसरी ओर, एटा से ग्राउंड रिपोर्ट साझा करते हुए संवाददाता ने बताया कि वहां युवाओं के लिए रोजगार का संकट सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा है, साथ ही बदहाल सड़कें भी क्षेत्र की जनता के लिए परेशानी का सबब बनी हुई हैं।
स्पष्ट है कि एक तरफ जहां सरकार विकास कार्यों और योजनाओं के जरिए वैतरणी पार करना चाहती है, वहीं विपक्ष जमीनी हकीकत और जनता के बुनियादी मुद्दों को हथियार बनाकर चुनावी वैतरणी में सेंध लगाने की पुरजोर कोशिश कर रहा है।
Location : Lucknow
Published : 11 September 2026, 3:51 PM IST