यूपी में पानी के नाम पर बेचा जा रहा जहर: 57 बोतलबंद फर्मों के लाइसेंस सस्पेंड

उत्तर प्रदेश में एफएसडीए की बड़ी कार्रवाई में 57 बोतलबंद पानी की फर्मों के सैंपल असुरक्षित पाए गए हैं। पानी में ई. कोलाई और कोलीफॉर्म जैसे खतरनाक बैक्टीरिया मिलने पर लाइसेंस सस्पेंड कर दिए गए हैं।

Updated : 14 October 2026, 8:25 AM IST
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Lucknow: उत्तर प्रदेश में आम जनता की सेहत के साथ किस स्तर पर खिलवाड़ हो रहा है, इसका एक डरावना सच सामने आया है। राज्य में बिकने वाले बोतलबंद पानी की गुणवत्ता को लेकर खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन (एफएसडीए) द्वारा कराई गई हालिया जांच ने चौंकाने वाले और चिंताजनक खुलासे किए हैं। प्रदेश के विभिन्न जिलों में लिए गए पानी के नमूनों में खतरनाक कीटाणु और विषाणु पाए गए हैं, जिससे यह साफ हो गया है कि लोगों को प्यास बुझाने के नाम पर धीमा जहर परोसा जा रहा है।

पानी के नमूनों में मिले जानलेवा बैक्टीरिया और फंगस

एफएसडीए द्वारा पैक्ड ड्रिंकिंग और पैक्ड मिनरल वाटर के कुल 242 सैंपल जांच के लिए प्रयोगशाला में भेजे गए थे। इन सभी नमूनों की रिपोर्ट ने प्रशासन के भी होश उड़ा दिए। जांच में सामने आया कि 242 में से 146 सैंपल पूरी तरह से अधोमानक (घटिया गुणवत्ता वाले) हैं। स्थिति तब और भयावह हो गई जब इनमें से 57 फर्मों के पानी के सैंपल सीधे तौर पर असुरक्षित पाए गए।

इन असुरक्षित नमूनों में जानलेवा बीमारियां फैलाने वाले 'ई कोलाई' (E. coli) और 'कोलीफॉर्म' जैसे खतरनाक बैक्टीरिया के साथ-साथ 'यीस्ट' और 'मोल्ड' जैसे हानिकारक सूक्ष्मजीव पाए गए हैं। दूषित पानी में इन कीटाणुओं की मौजूदगी सीधे तौर पर डायरिया, उल्टी-दस्त, टाइफाइड और पेट से जुड़ी गंभीर बीमारियों को न्योता देती है, जो बच्चों और बुजुर्गों के लिए जानलेवा साबित हो सकती हैं।

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57 फर्मों के लाइसेंस सस्पेंड और उत्पादन पर रोक

जनता के स्वास्थ्य से हो रहे इस बड़े खिलवाड़ को गंभीरता से लेते हुए एफएसडीए आयुक्त ने कड़ा रुख अपनाया है। प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए इन सभी 57 असुरक्षित फर्मों के लाइसेंस को तुरंत प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। इसके साथ ही इन सभी इकाइयों को आदेश दिया गया है कि वे अपने यहां पानी का उत्पादन तत्काल प्रभाव से पूरी तरह बंद कर दें।

प्रशासन ने इन कंपनियों और फर्मों के लिए कड़ी शर्तें तय की हैं। असुरक्षित सैंपल वाली 57 फर्मों को अपनी इकाइयों में जरूरी सुधार करने होंगे। इसके बाद उन्हें 'टेस्ट ऑफ स्कीम' के तहत अपने पानी के पांच अलग-अलग बैचों की नए सिरे से लैब जांच करवानी होगी। इन कड़े परीक्षणों में जब तक सैंपल पूरी तरह सुरक्षित और मानक के अनुरूप पास नहीं हो जाते, तब तक उन्हें दोबारा उत्पादन शुरू करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। वहीं, जो 146 फर्मों के सैंपल अधोमानक मिले हैं, उन्हें भी एक हफ्ते के भीतर कमियां दूर कर तीन बैचों की जांच रिपोर्ट सौंपनी होगी।

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हर तरफ फैला है जहर: गाजियाबाद से लेकर चंदौली तक हाल बेहाल

यह समस्या सिर्फ किसी एक शहर तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश में फैली हुई है। आंकड़ों के अनुसार, गाजियाबाद और हापुड़ में चार-चार, गौतमबुद्ध नगर और अयोध्या में तीन-तीन, तथा लखीमपुर खीरी, प्रयागराज, बरेली, बिजनौर, जौनपुर, हाथरस, श्रावस्ती और सिद्धार्थनगर में दो-दो नमूने असुरक्षित पाए गए। इसके अलावा हरदोई, अमेठी, बाराबंकी, अंबेडकर नगर, कानपुर नगर, शाहजहांपुर, बागपत, मुरादाबाद, रामपुर, कुशीनगर, गोरखपुर, देवरिया, चंदौली, वाराणसी, अलीगढ़, फर्रुखाबाद, बहराइच, आजमगढ़, चित्रकूट, ललितपुर, संत कबीर नगर, मीरजापुर, सोनभद्र, झांसी, आगरा और लखनऊ में एक-एक नमूना असुरक्षित मिला है।

अधोमानक नमूनों की कुल सूची में चंदौली जिला सबसे ऊपर है, जहां 12 नमूने तय गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे। इसी तरह अयोध्या, बाराबंकी, गाजियाबाद और जौनपुर में आठ-आठ, कानपुर नगर में सात, आगरा और बरेली में छह-छह, प्रयागराज और वाराणसी में पांच-पांच, और गोरखपुर व हापुड़ में चार-चार नमूने खराब पाए गए। बाकी अन्य जिलों में भी दो से तीन और एक-एक नमूना अधोमानक मिला है।

Location :  Lucknow

Published :  14 October 2026, 8:25 AM IST

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