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गोरखपुर में नाबालिग से लैंगिक अपराध के मामले में अदालत ने सख्त फैसला सुनाते हुए आरोपी को 20 साल की कठोर सजा दी है। पुलिस के “ऑपरेशन कनविक्शन” अभियान के तहत मजबूत पैरवी से केस को समय पर अंजाम तक पहुंचाया गया, जिससे पीड़ित को न्याय मिला।
Gorakhpur Court
Gorakhpur: गोरखपुर में नाबालिग के साथ हुई दरिंदगी के मामले में आखिरकार इंसाफ का पल आया। करीब दो साल तक चली कानूनी लड़ाई के बाद अदालत ने आरोपी को ऐसा सबक सिखाया, जो समाज में एक सख्त संदेश बनकर गूंजेगा। जैसे ही फैसला आया। कोर्ट रूम में सन्नाटा छा गया- 20 साल की कठोर सजा ने साफ कर दिया कि ऐसे अपराध अब किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं होंगे।
पॉक्सो कोर्ट का सख्त फैसला
जनपद गोरखपुर के थाना राजघाट क्षेत्र में वर्ष 2023 में दर्ज इस गंभीर मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद विशेष पॉक्सो न्यायालय प्रथम ने अभियुक्त बिट्टू को दोषी करार दिया। अदालत ने उसे 20 वर्ष के कठोर कारावास और 29,000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। यह मामला नाबालिग के साथ लैंगिक हमला और मारपीट से जुड़ा था, जिसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 147, 323, 452 और पॉक्सो एक्ट की धारा 5/6 के तहत केस दर्ज किया गया था।
ऑपरेशन कनविक्शन बना गेमचेंजर
इस पूरे मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस के “ऑपरेशन कनविक्शन” अभियान की अहम भूमिका रही। इस अभियान के तहत गंभीर मामलों में तेजी से सुनवाई और सजा सुनिश्चित करने के लिए मजबूत पैरवी की जाती है। गोरखपुर पुलिस की मॉनिटरिंग सेल और थाना राजघाट की टीम ने लगातार केस पर नजर बनाए रखी, जिससे सुनवाई समयबद्ध तरीके से पूरी हो सकी।
मजबूत पैरवी से मिला न्याय
अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी राघवेन्द्र त्रिपाठी और अरविन्द श्रीवास्तव ने अदालत में ठोस तरीके से पक्ष रखा। गवाहों और साक्ष्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया, जिससे अदालत को आरोपी को दोषी ठहराने में मदद मिली। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में केस की लगातार निगरानी भी इस फैसले की बड़ी वजह बनी।
सख्त संदेश: अब नहीं बचेंगे अपराधी
इस फैसले को पीड़ित के लिए बड़ी राहत और न्याय की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। पुलिस का साफ कहना है कि महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध करने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। यह फैसला न सिर्फ एक केस का अंत है, बल्कि समाज के लिए एक कड़ा संदेश भी है कि कानून का डर अब और मजबूत होगा।