हिंदी
राम मंदिर चढ़ावा घोटाला (img: google)
Ayodhya: अयोध्या के श्रीराम मंदिर से जुड़ा मामला अब सिर्फ कथित गबन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। कहावत है कि "वही कातिल, वही मुद्दई और वही मुंसिफ" और इन दिनों श्रीराम मंदिर ट्रस्ट में चढ़ावे की रकम में हुई कथित हेराफेरी की जांच के बीच यही कहावत चर्चा में है। आरोप है कि मंदिर में आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं के चढ़ावे में गड़बड़ी हुई, लेकिन हैरानी की बात ये है कि जिन जिम्मेदार लोगों के ऊपर निगरानी की जिम्मेदारी थी, उन्हीं की नाक के नीचे यह सब होता रहा और उन्हें भनक तक नहीं लगी।
श्रीराम मंदिर ट्रस्ट में कई ऐसे पदाधिकारी हैं जिनकी जिम्मेदारी मंदिर की व्यवस्थाओं से लेकर चढ़ावे की रकम की निगरानी और गिनती तक की है। इनमें चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव समेत कई बड़े नाम शामिल हैं। आरोप है कि इतनी मजबूत व्यवस्था के बावजूद चढ़ावे की रकम में हेराफेरी हुई। इससे मंदिर प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि मामला सामने आने के बाद भी ट्रस्ट की तरफ से किसी बड़े पदाधिकारी ने अब तक कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।
मामले की जांच अब एसआईटी के हाथों में है, लेकिन जांच एजेंसी के सामने कई बड़ी चुनौतियां हैं। सवाल ये है कि जिन लोगों से पूछताछ होनी है, अगर वही लोग व्यवस्था के बड़े हिस्से में शामिल हैं तो जांच कितनी आसान होगी। सूत्रों के मुताबिक, जिन लोगों पर सीधे आरोप लग रहे हैं, उनमें से कई किसी न किसी रूप में ट्रस्ट से जुड़े लोगों के संपर्क में थे। ऐसे में जांच एजेंसी को हर कड़ी को जोड़ना होगा।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर अखिलेश यादव का बड़ा बयान! SIT जांच पर उठाए सवाल, योगी सरकार को घेरा
इस पूरे मामले में अब तक पांच संदिग्धों को पकड़ा गया है। उनकी निशानदेही पर करीब तीन करोड़ रुपये बरामद किए जाने की बात सामने आई है। जांच एजेंसियों को शक है कि रकम का बड़ा हिस्सा पहले ही इधर-उधर किया जा चुका है। शुरुआत में गबन की रकम आठ करोड़ रुपये से ज्यादा बताई जा रही थी, लेकिन अब सोशल मीडिया पर यह आंकड़ा सैकड़ों करोड़ तक पहुंच गया है। कुछ लोग इसे 200 करोड़ रुपये तक बता रहे हैं। हालांकि अभी तक किसी भी अधिकारी की तरफ से इस रकम की पुष्टि नहीं की गई है।
सिर्फ नकदी ही नहीं बल्कि चढ़ावे में आए सोने-चांदी के जेवरात को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार बड़ी मात्रा में जेवरात गायब होने की आशंका जताई जा रही है। चर्चा यह भी है कि करीब दो किलो की सोने की गदा भी गायब है। हालांकि इस मामले में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन सवाल लगातार बढ़ते जा रहे हैं कि आखिर इतनी बड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच यह सब कैसे हुआ?
मामले की जड़ में कर्मचारियों की नियुक्ति और निगरानी व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल सामने आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि बैंक ने एक कंपनी के माध्यम से कर्मचारियों को आउटसोर्स किया था, लेकिन ट्रस्ट की तरफ से जिन लोगों के नाम तय किए गए, उन्हीं को नौकरी मिली। आरोप है कि इनमें से कई कर्मचारी किसी न किसी पदाधिकारी के रिश्तेदार या करीबी थे। यही वजह रही कि कर्मचारियों के सत्यापन, निगरानी और तलाशी जैसी प्रक्रिया पर ध्यान नहीं दिया गया।
श्रीराम मंदिर परिसर में पुलिस और सुरक्षाबलों की तैनाती रहती है, लेकिन आरोप है कि मंदिर के अंदर काम करने वाले कर्मचारियों के लिए अलग तरह की छूट थी। कर्मचारी आईकार्ड लगाकर पूरे परिसर में घूम सकते थे। सूत्रों के मुताबिक कई कर्मचारियों की तलाशी तक नहीं ली जाती थी। यही लापरवाही कथित तौर पर गड़बड़ी करने वालों के लिए मौका बन गई।
राम मंदिर के चढ़ावे पर क्यों मचा है बवाल? जानिए अयोध्या में हर घंटे कितना आता है दान
जांच में सामने आया है कि जिन लोगों के पास से रकम बरामद हुई, वे कर्मचारी 12 से 18 हजार रुपये महीने की नौकरी कर रहे थे। ये लोग दिन-रात मंदिर परिसर में मौजूद रहते थे। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इतनी कम सैलरी में इतने लंबे समय तक काम करने के पीछे असली वजह क्या थी।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने कहा है कि जांच सिर्फ दोषियों तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि व्यवस्था की खामियों की भी पड़ताल होगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि श्रद्धालुओं के विश्वास को और मजबूत किया जाएगा।
मामले पर विनय कटियार ने सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि दोषियों को किसी भी कीमत पर छोड़ा नहीं जाना चाहिए और सभी की जांच होनी चाहिए। उनका कहना है कि ऐसी कार्रवाई होनी चाहिए जिससे भविष्य में कोई इस तरह की गलती करने की हिम्मत न कर सके।
बाबरी मस्जिद के पूर्व पक्षकार इकबाल अंसारी ने भी मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि मंदिर के पैसे की सुरक्षा जरूरी है और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भगवान का पैसा कहीं नहीं जाएगा और सच्चाई जांच के बाद सामने आएगी।
मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी पत्र याचिका भेजी गई है। याचिका में स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने और पूरे मामले की न्यायिक निगरानी की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े धन के हिसाब-किताब में पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए।
श्रीराम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। ऐसे में चढ़ावे की रकम को लेकर उठे सवाल सिर्फ आर्थिक नहीं बल्कि भरोसे से भी जुड़े हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जांच कितनी गहराई तक जाती है और क्या असली जिम्मेदार लोगों तक कार्रवाई पहुंच पाती है।
Location : Ayodhya
Published : 16 June 2026, 7:50 AM IST