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श्री गुरु हरकृष्ण साहिब के प्रकाश पर्व पर गूंजा मानव सेवा का संदेश (Img: Dynamite News)
Sultanpur: उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा, सुल्तानपुर में सिखों के आठवें गुरु श्री गुरु हरकृष्ण साहिब जी का पावन प्रकाश पर्व श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने गुरुद्वारा साहिब पहुंचकर श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के समक्ष मत्था टेका, गुरबाणी का श्रवण किया और गुरु साहिब के बताए मानवता, सेवा एवं करुणा के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
प्रकाश पर्व के अवसर पर गुरुद्वारा परिसर में विशेष दीवान सजाया गया, जहां रागी जत्थों ने मधुर गुरबाणी कीर्तन प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। कीर्तन के दौरान संगत गुरु वाणी में लीन रही और गुरु साहिब के जीवन, उनके आदर्शों तथा मानव कल्याण के लिए किए गए कार्यों का स्मरण किया गया। कार्यक्रम के समापन पर अरदास हुई, जिसके बाद सभी श्रद्धालुओं ने गुरु का अटूट लंगर ग्रहण कर समानता, सेवा और भाईचारे की परंपरा को साकार किया।
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गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा के सचिव सुदीप पाल सिंह ने संगत को संबोधित करते हुए कहा कि श्री गुरु हरकृष्ण साहिब जी सिख इतिहास के ऐसे महान गुरु हैं जिन्होंने अल्पायु में ही आध्यात्मिक नेतृत्व, विनम्रता और निस्वार्थ सेवा की अद्वितीय मिसाल प्रस्तुत की। उन्होंने मात्र पाँच वर्ष की आयु में गुरुगद्दी संभाली, किंतु अपने संक्षिप्त जीवनकाल में मानवता की सेवा को सर्वोच्च धर्म मानते हुए समाज को प्रेम, करुणा और परोपकार का अमूल्य संदेश दिया।
उन्होंने बताया कि दिल्ली में चेचक और हैजा जैसी घातक महामारियों के दौरान गुरु हरकृष्ण साहिब जी ने स्वयं रोगियों की सेवा की, उन्हें सांत्वना दी और पीड़ित मानवता के बीच रहकर सेवा का ऐसा आदर्श स्थापित किया, जो आज भी पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा का स्रोत है। इसी सेवा-भाव के कारण उन्हें श्रद्धापूर्वक "बाला पीर" के नाम से भी स्मरण किया जाता है।
वक्ताओं ने कहा कि आज जब समाज अनेक सामाजिक और नैतिक चुनौतियों का सामना कर रहा है, ऐसे समय में गुरु हरकृष्ण साहिब जी का जीवन और उनके आदर्श पहले से अधिक प्रासंगिक हो उठते हैं। उनका संदेश बताता है कि किसी भी धर्म की वास्तविक शक्ति पूजा-पद्धति में नहीं, बल्कि मानव सेवा, करुणा, समानता और पीड़ितों के प्रति संवेदनशीलता में निहित होती है। सिख परंपरा की 'सेवा' और 'लंगर' जैसी व्यवस्थाएं सामाजिक समरसता, जाति-वर्ग से ऊपर उठकर समानता तथा साझा मानवीय मूल्यों की सशक्त अभिव्यक्ति हैं।
प्रकाश पर्व केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को मानवता, निस्वार्थ सेवा, विनम्रता और विश्व बंधुत्व का संदेश देने का अवसर भी बना। संगत ने गुरु साहिब के चरणों में शीश नवाकर सभी के सुख, शांति, स्वास्थ्य और विश्व कल्याण की अरदास की।
Location : Sultanpur
Published : 7 August 2026, 7:00 PM IST