सोनभद्र में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन कर मानदेय और सरकारी कर्मचारी दर्जा जैसी लंबित मांगों को लेकर प्रशासन को चेतावनी दी। 8 मार्च को लखनऊ में कलम बंद हड़ताल की भी घोषणा की गई।

आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का प्रदर्शन
Sonbhadra: जिले की हजारों आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने गुरुवार को कलेक्ट्रेट प्रांगण में जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने और मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि की लंबित मांगों को प्रशासन तक पहुंचाना था। कार्यकर्ताओं ने इस दौरान जिलाधिकारी को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को संबोधित मांग पत्र सौंपा।
आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं की मांगें कई दशकों से लंबित हैं। उन्होंने कहा कि भारत सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार ने अब तक न तो उन्हें सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया और न ही उनके मानदेय में कोई सुधार किया। इसी के विरोध में उन्होंने जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को मांग पत्र भेजा।
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धरना प्रदर्शन के दौरान जगदीश प्रसाद वर्मा ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें 7 मार्च 2026 तक पूरी नहीं की गईं, तो आंदोलन तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पोषण ट्रैकर और अन्य ऑनलाइन कार्य बंद कर दिए जाएंगे। इसके साथ ही प्रदेश की सभी आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां 8 मार्च 2026 को लखनऊ में कलम बंद हड़ताल करेंगी।
कलेक्ट्रेट परिसर में उमड़ी भीड़
मोरचा ने पोषण ट्रैकर पर ऑनलाइन कार्य के लिए उच्च गुणवत्ता वाले मोबाइल फोन की मांग की है, जिनकी कीमत कम से कम ₹20,000 हो, और साथ ही मासिक ₹2,500 रिचार्ज एवं डेटा भत्ता तत्काल प्रदान करने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह सुविधा नहीं मिली, तो अप्रैल 2026 से पोषण ट्रैकर और ऑनलाइन कार्य पूरी तरह बंद कर दिए जाएंगे।
मोरचा ने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों के किराए का भुगतान सीधे भवन स्वामी को किया जाए और सभी केंद्रों पर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। इसके अलावा, ₹1500 प्रोत्साहन राशि (PLI) को नियमित मानदेय में शामिल करने की मांग की गई। निजीकरण और आउटसोर्सिंग की व्यवस्था पूरी तरह बंद करने पर भी जोर दिया गया।
कार्यकर्ताओं ने प्रशासन और विभागीय अधिकारियों से यह भी मांगा कि कर्मचारियों पर अनावश्यक विभागीय कार्य और राजनीतिक कार्यक्रमों में बलपूर्वक भागीदारी बंद की जाए। इसके अलावा विभागीय निरीक्षण और सुपरविजन की प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष हो।
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आंगनबाड़ी संघों ने यह भी आग्रह किया कि उनकी समस्याओं के समाधान और योजनाओं के प्रभावी संचालन के लिए नियमित सरकारी बैठकें सुनिश्चित की जाएं। इसके साथ ही सभी सरकारी और विभागीय बैठकों में सहभागिता के लिए उचित टी.ए./डी.ए. प्रदान किया जाना चाहिए।