एक तरफ राहत, दूसरी तरफ जेल की दीवारें… पूर्व मंत्री कमलेश पाठक की कहानी में नया मोड़

आगरा जेल में बंद पूर्व विधायक और पूर्व मंत्री कमलेश पाठक को रंगदारी और धमकी के मामले में कोर्ट से राहत मिली है। अदालत ने उन्हें 50 हजार रुपये के मुचलके पर जमानत देने का आदेश दिया, लेकिन अन्य लंबित मामलों के चलते वह अभी जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 20 June 2026, 4:45 PM IST
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Agra: आगरा जेल में पिछले सात साल से बंद पूर्व विधायक और पूर्व मंत्री कमलेश पाठक को एक रंगदारी और धमकी के मामले में बड़ी राहत मिली है। औरैया से जुड़े इस मामले में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट/अपर सिविल जज सीडी कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई करते हुए कमलेश पाठक को 50 हजार रुपये के मुचलके और निजी बंधपत्र पर रिहा करने का आदेश दिया। हालांकि जमानत मिलने के बाद भी कमलेश पाठक फिलहाल जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे। उनके खिलाफ डबल मर्डर केस, गैंगस्टर एक्ट और अन्य मामले अभी लंबित हैं, जिसके चलते उनकी जेल से रिहाई नहीं हो सकेगी।

सात साल पुराने रंगदारी केस में मिली राहत

यह मामला 7 जनवरी 2020 को औरैया थाने में दर्ज हुआ था। संकटमोचन गली निवासी राजेश कुमार ने पुलिस को शिकायत देकर आरोप लगाया था कि पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक और अब्दुल सत्तार उनसे पिछले सात साल से हर महीने 50 हजार रुपये की रंगदारी मांग रहे थे। शिकायत के आधार पर पुलिस ने दोनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 308(5) यानी रंगदारी और धारा 351(2) यानी धमकी देने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया था।

वकील ने कोर्ट में रखी अपनी दलील

जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान कमलेश पाठक के वकील सौरभ पांडेय ने कोर्ट को बताया कि उनके मुवक्किल 16 मार्च 2020 से आगरा जेल में बंद हैं। उन्होंने दलील दी कि जेल नियमों के अनुसार सांसद और विधायक श्रेणी के बंदियों को सीमित लोगों से ही बातचीत की अनुमति होती है। ऐसे में अब्दुल सत्तार से बातचीत या संपर्क का आरोप साबित करना मुश्किल है, क्योंकि वह उन अधिकृत लोगों की सूची में शामिल नहीं हैं।

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अभियोजन ने किया जमानत का विरोध

वहीं अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध किया। सरकारी पक्ष की ओर से कहा गया कि कमलेश पाठक पर पहले से 39 मुकदमे दर्ज हैं और जमानत मिलने के बाद वह शर्तों का उल्लंघन कर सकते हैं। अभियोजन ने कोर्ट के सामने उनके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड का हवाला देते हुए जमानत नहीं देने की मांग की। हालांकि कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद आदेश में कहा कि रिकॉर्ड में रंगदारी का कोई सीधा प्रमाण दिखाई नहीं देता। कोर्ट ने यह भी माना कि जेल में बंद व्यक्ति का सीधे तौर पर संपर्क करना आसान नहीं होता।

जमानत के बाद भी जेल से बाहर नहीं होंगे

कमलेश पाठक के लिए यह राहत जरूर है, लेकिन फिलहाल उनकी रिहाई संभव नहीं है। वह साल 2020 के एक डबल मर्डर केस में पहले से आगरा जेल में बंद हैं। इसके अलावा उनके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट और अन्य मामले भी चल रहे हैं। इन मामलों के चलते रंगदारी केस में जमानत मिलने के बावजूद उन्हें जेल में ही रहना पड़ेगा।

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पुरानी रंजिश का भी सामने आया विवाद

इस मामले में कमलेश पाठक पक्ष की ओर से शिकायतकर्ता राजेश कुमार के साथ पुरानी रंजिश होने की बात कही गई है। पाठक पक्ष का कहना है कि वर्ष 2021 में राजेश कुमार ने कमलेश पाठक की पत्नी मधु पाठक और अब्दुल सत्तार के खिलाफ जमीन कब्जे को लेकर मामला दर्ज कराया था। उनका आरोप है कि इसी विवाद के चलते रंगदारी का मुकदमा दर्ज कराया गया। फिलहाल कोर्ट के आदेश के बाद रंगदारी केस में कमलेश पाठक को राहत मिल गई है, लेकिन पुराने मामलों के कारण उनकी मुश्किलें अभी खत्म नहीं हुई हैं।

Location :  Agra

Published :  20 June 2026, 4:45 PM IST

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