अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण में बड़े नाम सुरक्षित, बैंक अधिकारी भी बेदाग, SIT जांच पर सवाल तेज

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में दर्ज एफआईआर में ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी चंपत राय, डॉ अनिल मिश्रा और गोपाल राव का नाम शामिल नहीं होने से सवाल उठ रहे हैं। बैंक अधिकारियों पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है। एसआईटी जांच की निष्पक्षता और जवाबदेही को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 26 June 2026, 7:57 AM IST

Ayodhya: राम मंदिर में चढ़ावा और दानराशि में कथित अनियमितताओं के मामले में दर्ज एफआईआर को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। मामले में ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों के बजाय केवल छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ अनिल मिश्रा और निर्माण समिति के सहायक गोपाल राव का एफआईआर में कहीं उल्लेख नहीं है। इससे जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं और आरोप लग रहे हैं कि बड़े पदाधिकारियों को फिलहाल बचा लिया गया है।

मामला सामने आने के बाद शुरू हुई आंतरिक जांच

चढ़ावा चोरी का मामला उजागर होने के बाद ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने स्वयं स्तर पर जांच शुरू कर दी थी। संदिग्धों को पकड़कर उनके घरों से रकम भी बरामद की गई, लेकिन तत्काल एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई। करीब एक सप्ताह बाद विशेष जांच दल (एसआईटी) के गठन की मांग की गई और उसके बाद जांच शुरू हुई। शुरुआत से ही आशंका जताई जा रही थी कि कार्रवाई केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित रहेगी।

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बैंक अधिकारियों की भूमिका पर भी नहीं हुई कार्रवाई

मामले में बैंक की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। चढ़ावे की गणना की व्यवस्था बैंक के माध्यम से होती है, लेकिन इसमें संविदाकर्मियों की तैनाती की गई थी। आरोप है कि इन संविदाकर्मियों में कई लोग पदाधिकारियों के करीबी या रिश्तेदार थे। इसके बावजूद दर्ज एफआईआर में किसी भी बैंक अधिकारी का नाम शामिल नहीं किया गया है।

जिम्मेदारी तय करने को लेकर उठ रहे सवाल

मामले में यह चर्चा है कि छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई कर विवाद को शांत करने की कोशिश की जाएगी। साथ ही, ट्रस्ट के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारी इस्तीफा देकर नैतिक जिम्मेदारी लेने का संदेश दे सकते हैं। हालांकि सवाल यह उठ रहा है कि यदि उनके करीबी लोगों ने कथित अनियमितताओं को अंजाम दिया, तो शीर्ष पदाधिकारियों की जवाबदेही क्यों तय नहीं की गई।

विहिप की बैठक से बढ़ी राजनीतिक और सांगठनिक हलचल

चढ़ावा विवाद और एसआईटी जांच के बीच विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इसमें चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा, गोपाल राव, बजरंग लाल बांगड़ा, मिलिंद परांडे और विनायक राव सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल हुए। बैठक का आधिकारिक एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया, लेकिन माना जा रहा है कि चढ़ावा विवाद, एसआईटी जांच और उसके संभावित प्रभावों पर चर्चा हुई।

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सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचा मामला

राम मंदिर के दान में कथित हेराफेरी और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को 29 जून को मामले का उल्लेख करने के लिए कहा है। याचिका में सीबीआई के नेतृत्व में विशेष जांच दल गठित कर ट्रस्ट से जुड़े वित्तीय मामलों और कथित अनियमितताओं की जांच कराने की मांग की गई है।

केजरीवाल और संजय सिंह ने लगाए गंभीर आरोप

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने अयोध्या पहुंचकर आरोप लगाया कि भगवान के घर में चढ़ावा, गहने और अन्य वस्तुओं तक की चोरी हुई है तथा एसआईटी बड़े लोगों को बचाने के लिए लीपापोती कर रही है। वहीं, राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने एसआईटी को जमीन खरीद-फरोख्त से जुड़े 11 दस्तावेज सौंपते हुए करोड़ों रुपये के घोटाले का आरोप लगाया। उनका दावा है कि मंदिर के लिए कई जमीनें बाजार मूल्य से कई गुना अधिक कीमत पर खरीदी गईं और जिन लोगों के नाम चढ़ावा विवाद में सामने आए हैं, उनकी भूमिका जमीन खरीद के विवादित सौदों में भी दिखाई देती है।

Location :  Ayodhya

Published :  26 June 2026, 7:57 AM IST