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राम मंदिर और सुप्रीम कोर्ट (IMG: Dynamite News)
New Delhi: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की रकम की कथित चोरी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। मंदिर में चढ़ावे की गिनती के दौरान कथित तौर पर पैसों की हेराफेरी और चोरी के आरोपों से जुड़े मामले में शीर्ष अदालत ने स्वतंत्र जांच और ऑडिट की मांग करने वाली सभी याचिकाओं का निपटारा कर दिया है। सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से बताया गया कि विशेष जांच दल (SIT) मामले में जांच पूरी कर निचली अदालत में चार्जशीट दाखिल कर चुका है।
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अब मामले की आगे की कानूनी कार्यवाही निचली अदालत में होगी। हालांकि, अदालत ने याचिकाकर्ताओं को राहत देते हुए कहा कि वे ट्रायल के दौरान शिकायतकर्ता के तौर पर मजिस्ट्रेट की सहायता कर सकेंगे। इस मामले में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कथित चोरी के कई चौंकाने वाले तथ्य भी अदालत के सामने रखे। SIT की जांच में सीसीटीवी फुटेज के आधार पर 105 बार अनधिकृत तरीके से पैसे निकालने की घटनाएं सामने आने की जानकारी दी गई।
राम मंदिर में चढ़ावे की रकम की कथित चोरी से जुड़े मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने की। सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार ने अदालत को जानकारी दी कि मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल अपनी जांच पूरी कर चुका है और निचली अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाओं का निपटारा करते हुए शिकायतकर्ताओं और याचिकाकर्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण व्यवस्था भी की है। अदालत ने कहा कि चूंकि इस मामले का संबंध जनहित से है, इसलिए याचिकाकर्ता निचली अदालत में मुकदमे की सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता के रूप में मजिस्ट्रेट की सहायता कर सकते हैं। उन्हें उसी तरह अदालत की मदद करने की अनुमति होगी, जिस तरह कानून के तहत किसी अपराध के पीड़ित को सहायता करने की छूट दी जाती है।
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सुनवाई के दौरान भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अदालत के सामने SIT की जांच से जुड़ी जानकारी रखी। उन्होंने बताया कि मंदिर में आने वाले चढ़ावे की रकम की गिनती के दौरान कथित तौर पर कुछ लोग पैसे अपने पास रख लेते थे। आरोप है कि रकम की गिनती करने वाले कुछ लोग चढ़ावे में आई नकदी का एक हिस्सा निकालकर अपने पास रख लेते थे। इसके बाद इस पैसे को अपने बैंक खातों में जमा किया जाता था या फिर अलग-अलग जगह निवेश किया जाता था।
इस मामले में सीसीटीवी फुटेज की जांच को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सॉलिसिटर जनरल के मुताबिक, मंदिर में चढ़ावे की रकम की गिनती के दौरान हुई गतिविधियों की फुटेज खंगाली गई। इसमें 105 ऐसी घटनाएं सामने आईं, जिनमें कथित तौर पर बिना अनुमति के रकम निकाली गई थी। जांच एजेंसी ने इन घटनाओं के आधार पर मामले से जुड़े लोगों और पैसों के लेनदेन की पड़ताल की। इसके अलावा कथित रूप से चोरी की गई रकम कहां रखी गई और उसका इस्तेमाल किन कामों में हुआ, इसकी भी जानकारी जुटाई गई।
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कथित वित्तीय अनियमितताओं का उदाहरण देते हुए एक संपत्ति का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि जांच में एक ऐसी संपत्ति सामने आई, जिसकी कीमत दस्तावेजों में करीब 15 लाख रुपये दिखाई गई थी, जबकि उसकी वास्तविक कीमत लगभग 50 लाख रुपये पाई गई। सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि इस संपत्ति के बाकी भुगतान की रकम कथित तौर पर नकद दी गई थी।
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण भी दिया। उन्होंने अदालत को बताया कि मंदिर में आने वाले सभी ऐतिहासिक अवशेष, कलाकृतियां और मुख्य चढ़ावा पूरी तरह सुरक्षित हैं। यानी जांच में सामने आए आरोप चढ़ावे की नकदी की गिनती के दौरान कथित रूप से पैसे निकालने और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े हैं। ऐतिहासिक वस्तुओं और कलाकृतियों के चोरी होने की बात सरकार की ओर से नहीं कही गई।
Location : New Delhi
Published : 2 November 2026, 1:47 PM IST
Topics : Ram Mandir Donation Case Ram Janmabhoomi ram mandir news SIT Investigation Supreme Court News