संगम के माघ मेले में हठयोगी संतों का अनोखा संसार, इन साधुओं की साधना बनी चर्चा

प्रयागराज के संगम पर लगे माघ मेले में हठयोगी संतों की कठिन तपस्या श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही है। खड़े होकर तपस्या करने वाले महेशानंद गिरि और उर्दूबाहु साधना करने वाले सोमेश्वर गिरि माघ मेले में आस्था और तपस्या का अद्भुत संगम पेश कर रहे हैं।

Post Published By: Sapna Srivastava
Updated : 20 January 2026, 9:36 AM IST
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Prayagraj: प्रयागराज के संगम तट पर चल रहे माघ मेले में इस बार आस्था के साथ-साथ तपस्या के अनोखे रंग देखने को मिल रहे हैं। साधु-संतों, नागा संन्यासियों और हठयोगियों की मौजूदगी ने मेले को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया है। खास बात यह है कि इस बार माघ मेले में ऐसे संत भी पहुंचे हैं, जिन्हें लोग आमतौर पर महाकुंभ में ही देखा करते थे। उनकी कठिन और असाधारण तपस्या श्रद्धालुओं को हैरान कर रही है और वे माघ मेले के सबसे बड़े आकर्षण बन गए हैं।

खड़े होकर तपस्या करने वाले संत महेशानंद गिरि

माघ मेले में पहुंचे संत महेशानंद गिरि महाराज अपनी अनोखी हठयोग साधना को लेकर चर्चा में हैं। वह वर्षों से खड़े होकर तपस्या कर रहे हैं। संत महेशानंद गिरि ने 12 वर्षों तक लगातार खड़े रहकर तपस्या करने का संकल्प लिया है। फिलहाल उन्हें इस कठिन साधना को करते हुए करीब 5 वर्ष पूरे हो चुके हैं।

संत महेशानंद गिरि बगलामुखी साधना कर रहे हैं और उनका कहना है कि उनकी यह तपस्या केवल व्यक्तिगत मोक्ष के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्र कल्याण के उद्देश्य से है। माघ मेले की व्यवस्थाओं को लेकर उन्होंने प्रशासन की खुलकर सराहना की और कहा कि इस बार संतों और श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

उर्दूबाहु हठयोग करने वाले संत सोमेश्वर गिरि

वहीं, माघ मेले में पहुंचे संत सोमेश्वर गिरि बाबा अपनी उर्दूबाहु हठयोग साधना के कारण लोगों को आश्चर्यचकित कर रहे हैं। उन्होंने वर्षों से एक हाथ आसमान की ओर उठाकर रखने का संकल्प ले रखा है और वह अपना हाथ कभी नीचे नहीं करते। इस कठिन तपस्या के चलते उनके हाथ की मांसपेशियां पतली हो चुकी हैं और नाखून काफी लंबे हो गए हैं।

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संत सोमेश्वर गिरि का कहना है कि वह यह तपस्या मोक्ष प्राप्ति के लिए कर रहे हैं। उनका मानना है कि यदि उन्हें मोक्ष की अनुभूति होगी, तो वह समाज को भी मोक्ष का मार्ग दिखा सकेंगे। वह इससे पहले प्रयागराज के पिछले कुंभ मेले में भी आ चुके हैं और इस बार माघ मेले में उनकी मौजूदगी फिर से लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।

साधु-संतों ने की व्यवस्थाओं की तारीफ

माघ मेले में आए साधु-संतों ने प्रशासन द्वारा की गई व्यवस्थाओं की जमकर प्रशंसा की है। साफ-सफाई, सुरक्षा, आवास और स्नान घाटों की सुविधाओं को लेकर संतों ने संतोष जताया। उनका कहना है कि बेहतर व्यवस्थाओं के कारण साधना और तपस्या में कोई बाधा नहीं आ रही है।

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आस्था और तपस्या का अद्भुत संगम

संगम तट पर माघ मेला केवल स्नान और पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह तपस्या, साधना और आध्यात्मिक प्रयोगों का भी बड़ा केंद्र बन चुका है। हठयोगी संतों की कठोर साधना श्रद्धालुओं को न सिर्फ आकर्षित कर रही है, बल्कि उन्हें आत्मचिंतन और आस्था की गहराइयों से भी जोड़ रही है। माघ मेला एक बार फिर यह साबित कर रहा है कि यह सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन परंपराओं की जीवंत झलक है।

Location : 
  • Prayagraj

Published : 
  • 20 January 2026, 9:36 AM IST

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