Magh Mela 2026: जानें कब है माघ मेले का अंतिम महास्नान? महाशिवरात्रि पर मिलेगा विशेष पुण्य

प्रयागराज में आयोजित माघ मेले का अंतिम और छठा महास्नान 15 फरवरी 2026 को महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महाशिवरात्रि पर स्नान और भगवान शिव की पूजा करने से विशेष पुण्य फल और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 13 February 2026, 9:22 AM IST

Prayagraj: उत्तर प्रदेश की पवित्र तीर्थ नगरी प्रयागराज में लगने वाला मशहूर माघ मेला अब अपने आखिरी पड़ाव पर पहुंच गया है। पिछले कई दिनों से गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पवित्र संगम पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। देश भर के अलग-अलग राज्यों के साथ-साथ विदेशों से भी श्रद्धालु यहां पवित्र स्नान करने आ रहे हैं।

मेला प्रशासन और कैलेंडर के मुताबिक, माघ मेले का छठा और आखिरी महास्नान रविवार, 15 फरवरी, 2026 को होगा। इस दिन महाशिवरात्रि का पवित्र त्योहार भी है, जिससे इस स्नान का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। इसी दिन 44 दिन तक चलने वाले इस आध्यात्मिक मेले का औपचारिक समापन भी होगा।

घाट पर लगेगी श्रद्धालुओं की भीड़

माघ मेले के दौरान कई बड़े स्नानों के बाद, आखिरी महास्नान की तारीख तय कर दी गई है। रविवार, 15 फरवरी को सुबह से ही संगम तट पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ेगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पवित्र संगम में स्नान करने और भगवान शिव को जल चढ़ाने से विशेष पुण्य मिलता है।

प्रशासन ने सुरक्षा, सफाई और ट्रैफिक के लिए बड़े पैमाने पर तैयारी की है। लाखों भक्तों के आने की उम्मीद में अतिरिक्त पुलिस बल और मेडिकल कैंप तैनात किए गए हैं।

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महाशिवरात्रि पर एक खास संयोग

इस साल, महास्नान महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर पड़ रहा है। हिंदू धर्म में, महाशिवरात्रि भगवान शिव और देवी पार्वती के दिव्य मिलन का प्रतीक है। ज्योतिषियों के अनुसार, इस दिन कई शुभ योग बन रहे हैं, जिससे स्नान और पूजा बहुत फलदायी है।

ऐसा माना जाता है कि इस पवित्र दिन संगम में डुबकी लगाने से पाप धुल जाते हैं और मोक्ष का रास्ता खुलता है। भक्त व्रत रखकर, रुद्राभिषेक करके और पूरी रात जागकर भगवान शिव की पूजा करेंगे।

माघ मेला क्यों खास है?

माघ मेला सनातन परंपरा का एक महत्वपूर्ण त्योहार है, जो हर साल संगम के किनारे लगता है। माघ महीने में भक्त कल्पवास (एक पवित्र रस्म) करते हैं। कल्पवासी टेंट में रहते हैं और स्नान, ध्यान, जप और दान-पुण्य करते हैं।

साधु, अखाड़े और अलग-अलग धार्मिक संगठनों की मौजूदगी इस मेले को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देती है। सुबह संगम के किनारे मंत्रों का जाप और घंटियों की गूंज माहौल को भक्ति से भर देती है।

यह मेला न सिर्फ धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण है बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक है। अलग-अलग इलाकों, लोक परंपराओं और आध्यात्मिक प्रवचनों की झलक भक्तों को एक अनोखा अनुभव देती है।

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आस्था का त्योहार खत्म हो रहा है

माघ मेला 15 फरवरी को आखिरी महास्नान के साथ खत्म हो जाएगा, लेकिन आस्था और विश्वास की लौ भक्तों के दिलों में हमेशा जलती रहेगी। संगम के पवित्र पानी में एक डुबकी जीवन भर की आध्यात्मिक याद बन जाती है।

Location : 
  • Prayagraj

Published : 
  • 13 February 2026, 9:22 AM IST