यूपी की बहुचर्चित FIR नहीं होगी रद्द, हलाला की आड़ में नाबालिग से दुष्कर्म और गैंगरेप; याचिकाएं रद्द

हालाला के नाम पर नाबालिग लड़की के साथ गैंगरेप से जुड़ी उत्तर प्रदेश की बहुचर्चित एफआईआर रद्द नहीं होगी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले में दायर सभी याचिकाओं को रद्द कर दिया है।

Post Published By: Komal Chauhan
Updated : 3 July 2026, 4:33 PM IST
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Prayagraj: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अमरोहा जिले में हलाला के नाम पर नाबालिग से दुष्कर्म और सामूहिक दुष्कर्म के आरोपों से जुड़े मामले में दर्ज FIR को रद्द करने की मांग खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि मामले में पहली नजर में गंभीर अपराध के संकेत मिलते हैं, इसलिए विस्तृत जांच जरूरी है।

चार याचिकाएं एक साथ हुईं खारिज

जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने इस मामले में पांच आरोपियों की ओर से दाखिल चार अलग-अलग याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की। सभी याचिकाओं को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि इस स्तर पर FIR रद्द नहीं की जा सकती। FIR के अनुसार पीड़िता की शादी वर्ष 2015 में कराई गई थी। आरोप है कि शादी के बाद उसके साथ मारपीट हुई और बाद में उसे तीन तलाक दे दिया गया। इसके बाद दोबारा निकाह के लिए हलाला की प्रक्रिया अपनाने का दबाव बनाया गया। पीड़िता का आरोप है कि इस दौरान उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया गया। बाद में वर्ष 2025 में दोबारा हलाला के नाम पर सामूहिक दुष्कर्म का आरोप भी लगाया गया।

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POCSO की धाराएं भी जोड़ी गईं

जांच के दौरान पुलिस ने मामले में अन्य आरोपियों के नाम भी शामिल किए। मेडिकल रिपोर्ट और अन्य तथ्यों के आधार पर भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के साथ पॉक्सो एक्ट की धाराएं भी लगाई गईं। फिलहाल इस मामले में कुल नौ आरोपी बनाए गए हैं। आरोपियों की ओर से अदालत में कहा गया कि एफआईआर दबाव बनाने के उद्देश्य से दर्ज कराई गई है। साथ ही यह भी दावा किया गया कि संबंधित घटनाओं के समय पीड़िता बालिग थी और हलाला धार्मिक परंपरा का हिस्सा है। इसी आधार पर एफआईआर रद्द करने की मांग की गई।

सरकार और पीड़िता पक्ष का पक्ष

राज्य सरकार और पीड़िता की ओर से अदालत को बताया गया कि उपलब्ध साक्ष्य प्रथम दृष्टया गंभीर अपराध की ओर इशारा करते हैं। मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर यह भी कहा गया कि पहली घटना के समय पीड़िता नाबालिग थी। ऐसे मामलों में पॉक्सो कानून लागू होता है और विस्तृत जांच आवश्यक है। अदालत ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को पर्सनल लॉ का हवाला देकर आपराधिक जिम्मेदारी से छूट नहीं मिल सकती। यदि किसी नाबालिग के साथ अपराध हुआ है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वह हलाला प्रथा की संवैधानिक वैधता पर कोई टिप्पणी नहीं कर रहा है, बल्कि केवल FIR में लगाए गए आरोपों के आधार पर निर्णय दे रहा है।

जांच जारी रहेगी

हाईकोर्ट ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच जारी रहनी चाहिए। इसी आधार पर सभी याचिकाएं खारिज कर दी गईं और पहले दिए गए अंतरिम आदेश भी समाप्त कर दिए गए। अब पुलिस मामले की जांच आगे बढ़ाएगी और उसके आधार पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

Location :  Prayagraj

Published :  3 July 2026, 4:33 PM IST

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