मुजफ्फरनगर के शाहपुर थाना क्षेत्र में मानसिक तनाव से जूझ रहे एक BLO ने स्कूल परिसर में जहर का सेवन कर आत्महत्या का प्रयास किया। प्राथमिक विद्यालय में कार्यरत 54 वर्षीय शिक्षामित्र की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिन्हें मेरठ मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है। परिजनों ने SIR प्रक्रिया के तहत BLO ड्यूटी के कारण बढ़े..

बूथ स्तर अधिकारी
Muzaffarnagar: मुजफ्फरनगर जनपद से एक गंभीर और चिंताजनक घटना सामने आई है, जिसने सरकारी कर्मचारियों पर बढ़ते मानसिक दबाव को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। शाहपुर थाना क्षेत्र के गांव किनोनी में एक BLO द्वारा स्कूल परिसर में जहर का सेवन कर आत्महत्या का प्रयास किए जाने से क्षेत्र में हड़कंप मच गया। पीड़ित की हालत गंभीर बनी हुई है और उनका इलाज मेरठ मेडिकल कॉलेज में चल रहा है।
जानकारी के अनुसार, 54 वर्षीय अनुजवीर बालियान गांव के ही प्राथमिक विद्यालय में शिक्षामित्र के पद पर कार्यरत हैं। करीब एक माह पहले उनकी ड्यूटी SIR प्रक्रिया के तहत बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के रूप में लगाई गई थी। परिजनों का कहना है कि इसी ड्यूटी के बाद से वह लगातार मानसिक तनाव में रहने लगे थे। हालांकि घर में किसी प्रकार का पारिवारिक विवाद नहीं था और उनका स्वभाव शांत बताया जा रहा है।
परिजनों के मुताबिक, 2 फरवरी सोमवार को अनुजवीर बालियान मुजफ्फरनगर सदर तहसील गए थे। वहां से लौटने के बाद उन्होंने बिना किसी को बताए सीधे स्कूल का रुख किया। स्कूल पहुंचने के बाद उन्होंने एक क्लासरूम का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया और जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया।
कुछ समय तक क्लासरूम से कोई गतिविधि न होने पर स्कूल स्टाफ को संदेह हुआ। जब दरवाजा नहीं खुला तो मामले की जानकारी तुरंत परिजनों को दी गई। सूचना मिलते ही परिजन स्कूल पहुंचे और क्लासरूम का दरवाजा तोड़कर अनुजवीर को बाहर निकाला। उस समय वह अचेत अवस्था में पड़े हुए थे।
परिजन उन्हें तत्काल जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उनकी हालत गंभीर बताते हुए देर रात मेरठ मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया। फिलहाल उनकी स्थिति नाजुक बताई जा रही है।
अनुजवीर बालियान के परिवार में पत्नी, बड़े भाई-भाभी और दो बच्चे हैं। इस घटना के बाद परिवार में कोहराम मचा हुआ है। परिजन सदमे में हैं और पूरे गांव में भी शोक और चिंता का माहौल है। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस और जिला प्रशासन मौके पर पहुंचा और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है। प्रशासनिक स्तर पर यह भी जांच की जा रही है कि कहीं सरकारी कार्यों, विशेषकर BLO और SIR प्रक्रिया से जुड़े दायित्वों के अत्यधिक दबाव के चलते यह स्थिति तो नहीं बनी।
यह मामला एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि चुनावी और प्रशासनिक कार्यों में लगे कर्मचारियों पर काम का दबाव किस कदर बढ़ता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर समय रहते सहयोग और परामर्श की व्यवस्था न होने से ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं। प्रशासन की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि इस घटना के पीछे वास्तविक कारण क्या रहे।