लखनऊ पुलिस ने सुलतानपुर के पांडेय दंपती को क्यों किया गिरफ्तार? जानिए पूरा मामला

सुल्तानपुर सदर के भाजपा विधायक एवं पूर्व मंत्री विनोद सिंह से जुड़े कथित फर्जी अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) प्रकरण में लखनऊ पुलिस ने शशांक पांडेय और उनकी पत्नी को गिरफ्तार किया है

Updated : 25 October 2026, 7:28 PM IST
google-preferred

लखनऊ/सुलतानपुर: सुलतानपुर सदर के भाजपा विधायक एवं पूर्व मंत्री विनोद सिंह से जुड़े कथित फर्जी अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) प्रकरण में लखनऊ पुलिस ने शशांक पांडेय और उनकी पत्नी को गिरफ्तार किया है। दोनों के खिलाफ लखनऊ के हजरतगंज थाने में धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेज तैयार करने के आरोप में मुकदमा दर्ज है। गिरफ्तारी के बाद यह मामला एक बार फिर सुलतानपुर से लेकर लखनऊ तक चर्चा में आ गया है।

प्रकरण की शुरुआत सुलतानपुर में वेयरहाउस स्थापित करने के लिए केंद्रीय भंडारण निगम (सीडब्ल्यूसी) से अनापत्ति प्रमाणपत्र दिलाने के दावे से हुई थी। विधायक विनोद सिंह की शिकायत के मुताबिक, शशांक पांडेय ने वेयरहाउस के लिए एनओसी उपलब्ध कराने का भरोसा दिया था। आरोप है कि इसके लिए केंद्रीय भंडारण निगम के नाम से एक दस्तावेज उपलब्ध कराया गया, जिसे बाद में कथित तौर पर फर्जी पाया गया। विधायक की ओर से दस्तावेज की सत्यता की जांच कराए जाने के बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।

हजरतगंज थाने में दर्ज है मुकदमा

विधायक की शिकायत के आधार पर 10 जुलाई 2026 को हजरतगंज थाने में शशांक पांडेय और उनकी पत्नी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई थी। विधायक का दावा था कि केंद्रीय भंडारण निगम के अधिकारियों से संपर्क करने पर संबंधित एनओसी के फर्जी होने की जानकारी मिली। इसके बाद मामले में कानूनी कार्रवाई की गई।

मुकदमा दर्ज होने के बाद आरोपी पक्ष की ओर से प्राथमिकी को निरस्त कराने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किए जाने की भी खबरें सामने आई थीं। विधायक के सार्वजनिक बयान के मुताबिक, हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद पुलिस कार्रवाई का रास्ता खुला रहा। अब दंपती की गिरफ्तारी को इसी मामले में आगे की कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है।

विवाद के बीच विधायक पर लगाए थे गंभीर आरोप

इस कानूनी विवाद ने उस समय राजनीतिक रंग ले लिया, जब महिला ने विधायक विनोद सिंह पर उत्पीड़न और यौन दुर्व्यवहार के गंभीर आरोप लगाए। महिला ने सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखी थी, जबकि विधायक ने आरोपों को खारिज करते हुए इन्हें निराधार बताया था। विधायक का दावा रहा कि उनके खिलाफ आरोप दर्ज मुकदमे की कार्रवाई से बचने और दबाव बनाने के उद्देश्य से लगाए गए।

इस तरह मामले में दोनों पक्षों की ओर से एक-दूसरे के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए गए। हालांकि, महिला के आरोपों को जांच में पूरी तरह निराधार साबित किए जाने संबंधी दावे की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। केवल दंपती की गिरफ्तारी से महिला की शिकायत के सभी आरोप स्वतः गलत साबित नहीं होते। दोनों मामलों की स्थिति संबंधित जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही स्पष्ट होगी।

सुल्तानपुर में भी दर्ज मुकदमों की चर्चा

इस प्रकरण के बीच दंपती के खिलाफ सुल्तानपुर में भी धोखाधड़ी से जुड़े मुकदमे दर्ज होने के दावे सामने आए हैं। इन मामलों की संख्या, धाराओं और वर्तमान स्थिति की आधिकारिक पुष्टि होना अभी आवश्यक है। पुलिस की जांच में यदि अन्य शिकायतें या संबंधित साक्ष्य सामने आते हैं, तो मामले का दायरा और बढ़ सकता है।

फिलहाल, लखनऊ पुलिस की कार्रवाई के बाद निगाहें आगे की कानूनी प्रक्रिया पर टिकी हैं। गिरफ्तारी के बाद पुलिस की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान, बरामदगी या पूछताछ से जुड़े तथ्यों की पुष्टि होने पर प्रकरण के अन्य पहलुओं की तस्वीर साफ हो सकेगी।

Location :  Lucknow

Published :  25 October 2026, 7:28 PM IST

Advertisement